मिर्जापुर। कोरोना से विजय में होम्योपैथिक की भूमिका विषय पर आरोग्य भारती के तत्वावधान में वेबीनार का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि कोरोना उपचार में अंग्रेजी के साथ होम्योपैथिक का भी प्रयोग करें। इसके अच्छे परिणाम आते हैं। आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री अशोक वार्ष्णेय ने कहा होम्योपैथिक की दवा आज पूरे विश्व में व्यापक स्तर पर प्रयोग की जा रही है। जिन छात्रों का प्रवेश होम्योपैथी में हो उन्हें गौर्वान्वित होना चाहिए। होम्योपैथिक दवा सस्ती, सर्व सुलभ एवं प्रभावशाली तो है लेकिन समाज की पहली पसंद बनने के लिए होम्योपैथिक छात्रों ,अध्यापकों एवं चिकित्सकों को शोध परक प्रयत्न करने होंगे। मुख्य अतिथि आरोग्य भारती, काशी प्रांत के अध्यक्ष एवं पूर्वांचल के चर्चित एमडी डॉक्टर डॉ इंद्रनील बसु ने लोगों से आग्रह किया कि वे कोरोना उपचार में अंग्रेजी दवा के साथ-साथ होम्योपैथिक का भी प्रयोग कर सकते हैं। इसके बहुत अच्छे परिणाम आते हैं। केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय की साइंटिफिक एडवाइजरी बोर्ड की पूर्व सदस्य एवं होम्योपैथिक शोध में संलग्न डॉक्टर जूही गुप्ता ने माइल्ड, मॉडरेट एवं सीवियर कोरोना मरीजों के स्टेजों के लक्षण और होम्योपैथिक उपचार पर विधिवत प्रकाश डाला। डॉक्टर प्रदीप गुप्ता ने एक सप्ताह में उनके सेंटर पर आए 4387 मरीजों का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करते हुए बताया कि इन मरीजों में 65 प्रतिशत ब्रायोनिया, 19 प्रतिशत आर्सेनिक, 6 प्रतिशत हीपर सल्फ व शेष बचे प्रतिशत वाले मरीज फास्फोरस, जेल्सीमियम, आर्निका एवं ऐन्टीम टार्ट से ठीक हुए। मरीजों में 60 प्रतिशत पुरुष व 40 प्रतिशत महिलाएं आ रही हैं । वेबीनार में मरीजों के व्यक्तियों वालें वीडियो भी प्रस्तुत किए। संयोजन एवं संचालन डॉ गणेश प्रसाद अवस्थी, आभार डॉ. मनीष त्रिपाठी, संयोजन सहयोग डॉ. संदीप श्रीवास्तव, टेक्निकल सहयोग डॉ. अवनीश पांडेय एवं अध्यक्षता डॉ. इंद्रनील वसु ने किया।