{"_id":"58ced09b4f1c1be3431a1ae4","slug":"uneasy-spooky-sparrow","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेखौफ फुदक रही गौरैया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेखौफ फुदक रही गौरैया
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Mon, 20 Mar 2017 12:10 AM IST
विज्ञापन
गौरैया महफूज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विंध्याचल में गौरैया वर्षों से चहचहा रही है। देश में फुदकने वाली यह नन्हीं चिड़िया भले ही झंझावात से जूझ रही हो लेकिन यहां के शेरकोठी में तो वह बेखौफ फुदकती और चहकती है। मिट्ठू मिश्र का परिवार पिछले तीन दशकों से इस चिड़िया को संरक्षित करने में जुटा है। वे गौरैया बचाओ व आशियाना देने के मुहिम से भी जुड़े हैं।
शेरकोठी निवासी त्रियोगी नारायण मिश्र उर्फ मिट्ठू मिश्र को विरासत में मिली। इनके परिवार ने इस पंछी को संरक्षित करने की मुहिम 1990 में शुरू की थी। इसमें वे कामयाब भी रहे। घनी आबादी वाले इलाके की शेरकोठी में आज बड़ी संख्या में गौरैया आती हैं और चहकती, फुदकती रहती हैं। मिट्ठू मिश्र गौरैया बचाओ अभियान से पूर्वांचल में हजारों लोगों को जोड़ चुके हैं। पिछले वर्ष सरकार ने ‘ उत्तर प्रदेश गिविंग विंग्स टू द स्पैरो..’ वृत्तचित्र बनाया था तो उसमें उनकी मुहिम को जगह दी गई।
उनको एक संस्था ने ‘हीरो आफ द इनवायरमेंट’ देने की घोषणा की है। वह गौरैया से दोस्ती बढ़ाने, घोंसला निर्माण एवं दाना-पानी की व्यवस्था जानकारी देते हैं। उन्होंने बताया कि गौरैया नहीं रहेगी तो पर्यावरण को महफूज रखने वाले पीपल और बरगद जैसे दरख्त भी खत्म हो जाएंगे। गौरैया बरगद व पीपल के फलों को खाकर पाचन तंत्र से गुजारती है तभी इनके बीजों का अंकुरण होता है।
शेरकोठी निवासी त्रियोगी नारायण मिश्र उर्फ मिट्ठू मिश्र को विरासत में मिली। इनके परिवार ने इस पंछी को संरक्षित करने की मुहिम 1990 में शुरू की थी। इसमें वे कामयाब भी रहे। घनी आबादी वाले इलाके की शेरकोठी में आज बड़ी संख्या में गौरैया आती हैं और चहकती, फुदकती रहती हैं। मिट्ठू मिश्र गौरैया बचाओ अभियान से पूर्वांचल में हजारों लोगों को जोड़ चुके हैं। पिछले वर्ष सरकार ने ‘ उत्तर प्रदेश गिविंग विंग्स टू द स्पैरो..’ वृत्तचित्र बनाया था तो उसमें उनकी मुहिम को जगह दी गई।
विज्ञापन
उनको एक संस्था ने ‘हीरो आफ द इनवायरमेंट’ देने की घोषणा की है। वह गौरैया से दोस्ती बढ़ाने, घोंसला निर्माण एवं दाना-पानी की व्यवस्था जानकारी देते हैं। उन्होंने बताया कि गौरैया नहीं रहेगी तो पर्यावरण को महफूज रखने वाले पीपल और बरगद जैसे दरख्त भी खत्म हो जाएंगे। गौरैया बरगद व पीपल के फलों को खाकर पाचन तंत्र से गुजारती है तभी इनके बीजों का अंकुरण होता है।
विज्ञापन