{"_id":"6ab19360c3f87b37c60c9e0f","slug":"the-prospect-of-upi-charges-has-heightened-concerns-among-shopkeepers-mirzapur-news-c-192-1-svns1034-161639-2026-09-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mirzapur News: यूपीआई पर शुल्क की दस्तक से दुकानदारों की चिंता बढ़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mirzapur News: यूपीआई पर शुल्क की दस्तक से दुकानदारों की चिंता बढ़ी
विज्ञापन
15 अक्तूबर से प्रस्तावित व्यवस्था पर कारोबारियों में चर्चा, बोले- भुगतान से रकम कटी तो होगा नुकसान
मिर्जापुर। 15 अक्तूबर से प्रस्तावित यूपीआई शुल्क व्यवस्था को लेकर जिले के कारोबारियों में चिंता बढ़ने लगी है। हालांकि व्यक्ति से व्यक्ति (पी2पी) भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा और 2,000 रुपये तक के व्यापारी भुगतान भी शुल्क मुक्त रहेंगे। महीने में एक लाख रुपये तक यूपीआई क्यूआर के जरिये भुगतान लेने वाले छोटे व्यापारियों को भी शून्य एमडीआर का लाभ मिलेगा।
मिली जानकारी के मुताबिक करीब 95 प्रतिशत व्यापारियों पर नई व्यवस्था का असर नहीं पड़ेगा। वहीं, कारोबारियों का कहना है कि 2,000 रुपये से अधिक के निर्धारित व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगने से बड़े भुगतान लेने पर नुकसान का डर है। 75 हजार रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन बताई गई है।
किराना व्यापारी मनोज कुमार और जनरल स्टोर संचालक राजकुमार ने कहा कि ग्राहक से सीधे शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन भुगतान की रकम में से एमडीआर कटने पर दुकानदार का मुनाफा कम होगा। कम मार्जिन वाले कारोबार में असर ज्यादा हो सकता है।
विज्ञापन
बीमा, ईंधन, रेलवे और दूरसंचार जैसे कुछ क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर पांच रुपये का निश्चित एमडीआर तय किया गया है। सरकार के अनुसार बैंक यह सुनिश्चित करेंगे कि एमडीआर का बोझ ग्राहक पर न डाला जाए और यूपीआई एप प्रदाता भी कोई छिपा शुल्क नहीं लगा सकेंगे।
इधर, ग्राहकों को आशंका है कि शुल्क के कारण कुछ दुकानदार बड़े भुगतान में यूपीआई लेने से बच सकते हैं। ऐसे में नकदी नहीं होने पर खरीदारी में परेशानी हो सकती है।
प्रतिक्रिया
“यूपीआई पर जो 2,000 रुपये से ऊपर के भुगतान पर चार्ज लगाया है, वह चार्ज लगाने का अधिकार बैंक या यूपीआई कंपनी का होता है। सरकार का यह फैसला गलत है, जिसकी वजह से दुकानदारों के मुनाफे और दुकानदारी पर असर पड़ेगा।”
-किशन अग्रवाल, सराफा कारोबारी, चौबेटोला
“2,000 रुपये से ऊपर के भुगतान पर चार्ज का फैसला गलत है। इसके विरोध में दुकानदारों और व्यापारियों में रोष है। अत: सरकार को इस निर्णय को वापस लेना चाहिए।”
-मनोज अग्रवाल, दखिन फाटक
“ऑनलाइन भुगतान की सुविधा से कारोबार आसान हुआ है। अब अतिरिक्त खर्च बढ़ा तो उसका असर हमारे लाभ पर पड़ेगा। ग्राहक से शुल्क लेना भी आसान नहीं होगा।”
-ननकुल्ली, दुकानदार
“ऑनलाइन भुगतान अब रोजमर्रा की जरूरत बन गया है। दुकानदार शुल्क के डर से इसे बंद करते हैं तो खरीदारी के समय ग्राहकों को दिक्कत हो सकती है।”
-दीपक बिंद, ग्राहक
विज्ञापन
मिर्जापुर। 15 अक्तूबर से प्रस्तावित यूपीआई शुल्क व्यवस्था को लेकर जिले के कारोबारियों में चिंता बढ़ने लगी है। हालांकि व्यक्ति से व्यक्ति (पी2पी) भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा और 2,000 रुपये तक के व्यापारी भुगतान भी शुल्क मुक्त रहेंगे। महीने में एक लाख रुपये तक यूपीआई क्यूआर के जरिये भुगतान लेने वाले छोटे व्यापारियों को भी शून्य एमडीआर का लाभ मिलेगा।
मिली जानकारी के मुताबिक करीब 95 प्रतिशत व्यापारियों पर नई व्यवस्था का असर नहीं पड़ेगा। वहीं, कारोबारियों का कहना है कि 2,000 रुपये से अधिक के निर्धारित व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगने से बड़े भुगतान लेने पर नुकसान का डर है। 75 हजार रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन बताई गई है।
विज्ञापन
किराना व्यापारी मनोज कुमार और जनरल स्टोर संचालक राजकुमार ने कहा कि ग्राहक से सीधे शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन भुगतान की रकम में से एमडीआर कटने पर दुकानदार का मुनाफा कम होगा। कम मार्जिन वाले कारोबार में असर ज्यादा हो सकता है।
विज्ञापन
बीमा, ईंधन, रेलवे और दूरसंचार जैसे कुछ क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर पांच रुपये का निश्चित एमडीआर तय किया गया है। सरकार के अनुसार बैंक यह सुनिश्चित करेंगे कि एमडीआर का बोझ ग्राहक पर न डाला जाए और यूपीआई एप प्रदाता भी कोई छिपा शुल्क नहीं लगा सकेंगे।
इधर, ग्राहकों को आशंका है कि शुल्क के कारण कुछ दुकानदार बड़े भुगतान में यूपीआई लेने से बच सकते हैं। ऐसे में नकदी नहीं होने पर खरीदारी में परेशानी हो सकती है।
प्रतिक्रिया
“यूपीआई पर जो 2,000 रुपये से ऊपर के भुगतान पर चार्ज लगाया है, वह चार्ज लगाने का अधिकार बैंक या यूपीआई कंपनी का होता है। सरकार का यह फैसला गलत है, जिसकी वजह से दुकानदारों के मुनाफे और दुकानदारी पर असर पड़ेगा।”
-किशन अग्रवाल, सराफा कारोबारी, चौबेटोला
“2,000 रुपये से ऊपर के भुगतान पर चार्ज का फैसला गलत है। इसके विरोध में दुकानदारों और व्यापारियों में रोष है। अत: सरकार को इस निर्णय को वापस लेना चाहिए।”
-मनोज अग्रवाल, दखिन फाटक
“ऑनलाइन भुगतान की सुविधा से कारोबार आसान हुआ है। अब अतिरिक्त खर्च बढ़ा तो उसका असर हमारे लाभ पर पड़ेगा। ग्राहक से शुल्क लेना भी आसान नहीं होगा।”
-ननकुल्ली, दुकानदार
“ऑनलाइन भुगतान अब रोजमर्रा की जरूरत बन गया है। दुकानदार शुल्क के डर से इसे बंद करते हैं तो खरीदारी के समय ग्राहकों को दिक्कत हो सकती है।”
-दीपक बिंद, ग्राहक