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मंदिर के चारों तरफ गड्ढा खोद दिए जाने से बढ़ा खतरा
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विंध्याचल स्थित मां विंध्यवासिनी मंदिर के चारों तरफ विंध्य कॉरिडोर के निर्माण के मद्देनजर पिलर आदि बनाने के लिए गड्ढे खोदे गए हैं। गड्ढा खोदे जाने के दौरान मंदिर जाने व आने वाले श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानी का भी ध्यान नहीं रखा गया। यही नहीं, गड्ढे वाले स्थान को चारों तरफ से घेरा भी नहीं गया है। इसके चलते मंदिर आने - जाने वाले श्रद्धालुओं को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मां विंध्यवासिनी मंदिर के सुंदरीकरण के लिए 331 करोड़ रुपये की विंध्य कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। इसके तहत मंदिर के चारों तरफ सुंदरीकरण व अन्य विकास कार्य कराए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह परियोजना पूरी हो जाएगी तो मां विंध्यवासिनी मंदिर भी काशी विश्वनाथ मंदिर की तरह भव्य हो जाएगा। इन दिनों विकास कार्य जोरों पर है। कहीं पिलर बनाए जा रहे हैं तो कहीं गड्ढे खोदे जा रहे हैं। कुछ जगह पर चट्टानें काटी जा रही हैं। इस समय मंदिर परिसर के एकदम पास में एक बड़ा गड्ढा खोदा गया है। जिसके चारों तरफ बैरिकेडिंग नहीं कराई गई है। इस पर मंदिर जाने वाले कई लोगों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह गड्ढा इतना बड़ा है कि यदि कोई कहीं से गिर जाए तो किसी दुर्घटना घट सकती है। जो श्रमिक निर्माण कार्य में लगे हुए हैं, वे भी हेलमेट आदि नहीं पहने रहते हैं। इससे उन पर खतरा बना रहता है। जानकारों का कहना है कि विंध्याचल में पूरी भूमि ही चट्टानी है। चाहे मंदिर के आसपास का क्षेत्र हो अथवा कहीं और का। ऊपर की सतह को छोड़कर करीब एक मीटर के बाद से चट्टानें ही मिलने लगती हैं। कॉरिडोर के निर्माण के लिए कहीं मशीन से खोदाई हो रही है तो कहीं श्रमिकों से कार्य कराया जाता है। उधर, विंध्य विकास प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि कार्यस्थल पर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। विंध्य विकास प्राधिकरण के सचिव सिटी मजिस्ट्रेट विनय कुमार सिंह का कहना है कि मां विंध्यवासिनी का मंदिर होने के कारण पूरा मार्ग बंद नहीं किया जा सकता है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। जिस जगह काम होता रहता है, उसको छोड़कर हर जगह को बैरिकेडिंग कर सुरक्षित किया जाता है।
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मां विंध्यवासिनी मंदिर के सुंदरीकरण के लिए 331 करोड़ रुपये की विंध्य कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। इसके तहत मंदिर के चारों तरफ सुंदरीकरण व अन्य विकास कार्य कराए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह परियोजना पूरी हो जाएगी तो मां विंध्यवासिनी मंदिर भी काशी विश्वनाथ मंदिर की तरह भव्य हो जाएगा। इन दिनों विकास कार्य जोरों पर है। कहीं पिलर बनाए जा रहे हैं तो कहीं गड्ढे खोदे जा रहे हैं। कुछ जगह पर चट्टानें काटी जा रही हैं। इस समय मंदिर परिसर के एकदम पास में एक बड़ा गड्ढा खोदा गया है। जिसके चारों तरफ बैरिकेडिंग नहीं कराई गई है। इस पर मंदिर जाने वाले कई लोगों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह गड्ढा इतना बड़ा है कि यदि कोई कहीं से गिर जाए तो किसी दुर्घटना घट सकती है। जो श्रमिक निर्माण कार्य में लगे हुए हैं, वे भी हेलमेट आदि नहीं पहने रहते हैं। इससे उन पर खतरा बना रहता है। जानकारों का कहना है कि विंध्याचल में पूरी भूमि ही चट्टानी है। चाहे मंदिर के आसपास का क्षेत्र हो अथवा कहीं और का। ऊपर की सतह को छोड़कर करीब एक मीटर के बाद से चट्टानें ही मिलने लगती हैं। कॉरिडोर के निर्माण के लिए कहीं मशीन से खोदाई हो रही है तो कहीं श्रमिकों से कार्य कराया जाता है। उधर, विंध्य विकास प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि कार्यस्थल पर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। विंध्य विकास प्राधिकरण के सचिव सिटी मजिस्ट्रेट विनय कुमार सिंह का कहना है कि मां विंध्यवासिनी का मंदिर होने के कारण पूरा मार्ग बंद नहीं किया जा सकता है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। जिस जगह काम होता रहता है, उसको छोड़कर हर जगह को बैरिकेडिंग कर सुरक्षित किया जाता है।
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