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धराशायी हुआ मंदिर का गुंबद
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Mon, 27 Apr 2015 12:54 AM IST
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क्षेत्र के बौलिया इलाके में स्थित अति प्राचीन शिव मंदिर भूकंप की चपेट में आ गया है, जिससे न केवल मंदिर से सटा छज्जा गिरा, बल्कि मंदिर के गुंबद का कुछ हिस्सा भी गिर गया।
मौके पर मौजूद पुजारी गुंबद गिरा देख हतप्रभ रह गए। उन्हाेंने न सिर्फ भूकंप के झटकों के थमने का इंतजार किया बल्कि इस आपदा से बचने के लिए ईश्वर से प्रार्थना भी की।
शिव मंदिर करीब ढाई सौ साल पुराना बताया जा रहा हैै। बताते चलें कि संवत् 1827 में राजा चेत बहादुर सिंह ने शिव मंदिर का निर्माण कराया था, जिसके मध्य में भगवान शिव, उत्तर-पूर्व में श्रीराम जानकी, उत्तर-पश्चिम में हनुमान जी, पश्चिम-दक्षिण में भगवान गणेश जी तथा पूरब-दक्षिण में भगवान सूर्य नारायण स्थापित हैं।
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इस विशालकाय मंदिर में पत्थर की नक्काशी कला से परिपूर्ण है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की लीला और गोपियों के साथ रासलीला का दृश्य पत्थर पर स्थापित है।
शनिवार की दोपहर आए भूकंप के तेज झटके से पूरा मंदिर परिसर थर्रा उठा। अचानक शिव मंदिर के पूर्वी छोर का छज्जा धाराशायी हो गया।
जब तक पुजारी राम नारायन दूबे कुछ समझ पाते तब तक मंदिर के गुंबद का कुछ हिस्सा भी धड़ाम से नीचे गया। इस घटना के बाद पुजारी ने भगवान की अर्चना शुरू कर दी।
पुजारी की माने तो शिव मंदिर का महात्म बहुत ही पुराना है इसकी सजीवता का महात्म अपने आप में काफी महत्वपूर्ण है। शिव मंदिर के गुंबद के मामले में अब तक कोई सूचना प्रशासन के संज्ञान में नहीं आई है।
बहरहाल क्षेत्र के राजस्व कर्मी में इलाके में हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं।
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मौके पर मौजूद पुजारी गुंबद गिरा देख हतप्रभ रह गए। उन्हाेंने न सिर्फ भूकंप के झटकों के थमने का इंतजार किया बल्कि इस आपदा से बचने के लिए ईश्वर से प्रार्थना भी की।
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शिव मंदिर करीब ढाई सौ साल पुराना बताया जा रहा हैै। बताते चलें कि संवत् 1827 में राजा चेत बहादुर सिंह ने शिव मंदिर का निर्माण कराया था, जिसके मध्य में भगवान शिव, उत्तर-पूर्व में श्रीराम जानकी, उत्तर-पश्चिम में हनुमान जी, पश्चिम-दक्षिण में भगवान गणेश जी तथा पूरब-दक्षिण में भगवान सूर्य नारायण स्थापित हैं।
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इस विशालकाय मंदिर में पत्थर की नक्काशी कला से परिपूर्ण है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की लीला और गोपियों के साथ रासलीला का दृश्य पत्थर पर स्थापित है।
शनिवार की दोपहर आए भूकंप के तेज झटके से पूरा मंदिर परिसर थर्रा उठा। अचानक शिव मंदिर के पूर्वी छोर का छज्जा धाराशायी हो गया।
जब तक पुजारी राम नारायन दूबे कुछ समझ पाते तब तक मंदिर के गुंबद का कुछ हिस्सा भी धड़ाम से नीचे गया। इस घटना के बाद पुजारी ने भगवान की अर्चना शुरू कर दी।
पुजारी की माने तो शिव मंदिर का महात्म बहुत ही पुराना है इसकी सजीवता का महात्म अपने आप में काफी महत्वपूर्ण है। शिव मंदिर के गुंबद के मामले में अब तक कोई सूचना प्रशासन के संज्ञान में नहीं आई है।
बहरहाल क्षेत्र के राजस्व कर्मी में इलाके में हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं।