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धनुष टूटते ही आकाश से फूलों की वर्षा
संवाददाता सीखड़ ।
Updated Mon, 19 Oct 2015 12:28 AM IST
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श्रीरामलीला समिति खैरा के तत्वावधान में रामलीला के तीसरे दिन सीता स्वयंवर के लिए घनुष यज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें श्रीराम और जानकी के विवाह के लिए धनुष यज्ञ के टूटने की कथा का भावपूर्ण मंचन कलाकारों द्वारा किया गया। मंचन के दौरान श्रीराम द्वारा सीता स्वयंवर के दौरान धनुष तोड़ते ही आकाश से पुष्प वर्षा होने लगी। वहीं आकाश से देवता जय जयकार करने लगे।
राजा जनक ने जनकपुर में निवास कर रहे मुनि विश्वामित्र, राम और लक्ष्मण को बुलाने के लिए मंत्री सदानंद को भेजा। स्वयंवर में मुनि विश्वामित्र के साथ राम और लक्ष्मण के पहुंचने पर सभी राजा और राजकुमार अचंभित हो जाते हैं। राजा जनक स्वयंबर में उपस्थित राजाओं के बीच स्वयंवर की शर्तों को बताते हैं। सुमति और विमति उपस्थित राजाओं का परिचय देते हुए उनकी वीरता का विस्तार से वर्णन करते हैं। स्वयंवर में उपस्थित रावण, बाणासुर सहित अनेक राजा धनुष उठाने में असमर्थ होने पर स्वंयवर से लौट जाते हैं। वहीं कुछ राजा अपने बल का प्रदर्शन कर मौजूद लोगों की हंसी का पात्र बनते हैं। इसी बीच रा जनक की टिप्पणी पर लक्ष्मण क्रोधित हो जाते हैं। मुनि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर श्रीराम शिव धनुष को उठाकर तोड़ देते हैं। जिसके बाद आकाश से पुष्प वर्षा होती है और श्रीराम के जयकारे से क्षेत्र गुजायमान हो जाता है। इस दौरान श्रीप्रकाश नारायण पाठक, मदन त्रिपाठी, रविंद्र नारायण सिंह, राम निहोर सिंह, रुप नारायण सिंह, राजन सिंह, शिव नारायण सिंह आदि मौजूद रहे।
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राजा जनक ने जनकपुर में निवास कर रहे मुनि विश्वामित्र, राम और लक्ष्मण को बुलाने के लिए मंत्री सदानंद को भेजा। स्वयंवर में मुनि विश्वामित्र के साथ राम और लक्ष्मण के पहुंचने पर सभी राजा और राजकुमार अचंभित हो जाते हैं। राजा जनक स्वयंबर में उपस्थित राजाओं के बीच स्वयंवर की शर्तों को बताते हैं। सुमति और विमति उपस्थित राजाओं का परिचय देते हुए उनकी वीरता का विस्तार से वर्णन करते हैं। स्वयंवर में उपस्थित रावण, बाणासुर सहित अनेक राजा धनुष उठाने में असमर्थ होने पर स्वंयवर से लौट जाते हैं। वहीं कुछ राजा अपने बल का प्रदर्शन कर मौजूद लोगों की हंसी का पात्र बनते हैं। इसी बीच रा जनक की टिप्पणी पर लक्ष्मण क्रोधित हो जाते हैं। मुनि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर श्रीराम शिव धनुष को उठाकर तोड़ देते हैं। जिसके बाद आकाश से पुष्प वर्षा होती है और श्रीराम के जयकारे से क्षेत्र गुजायमान हो जाता है। इस दौरान श्रीप्रकाश नारायण पाठक, मदन त्रिपाठी, रविंद्र नारायण सिंह, राम निहोर सिंह, रुप नारायण सिंह, राजन सिंह, शिव नारायण सिंह आदि मौजूद रहे।
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