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वीणा के साहस और जज्बे को सलाम कर रहे लोग
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Sat, 16 Jul 2016 12:44 AM IST
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वीणा उपाध्याय
- फोटो : mirzapur
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जमालपुर की वीणा के साहस और जज्बे को हर कोई सलाम कर रहा है। पिता को लीवर देने वाली वीणा का हर जगह गुणगान हो रहा है। मां सरिता त्रिपाठी बोली कि हर मां को वीणा जैसी बेटी को जन्म देना चाहिए। दादा रविंद्र नाथ त्रिपाठी ने रोते हुए कहा कि वीणा ने अपने पिता को लीवर देकर मेरे और अपने खानदान का मान बढ़ाया है।
बता दें कि जमालपुर थाना क्षेत्र के बहुआर गांव निवासी रवि प्रकाश त्रिपाठी उर्फ ब्रह्मदेव त्रिपाठी दो वर्षों से लीवर संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे। उन्होंने वाराणसी सहित पूर्वांचल के कई हास्पिटल में जाने-माने चिकित्सकाें से उपचार कराया, लेकिन ठीक नहीं हुए। थक-हार कर वह गुड़गांव के वेदांता हास्पिटल गए और चिकित्सकाें ने उनसे लीवर ट्रांसप्लांट कराने के लिए कहा।
इस स्थिति में कुछ लोग सामने आए, लेकिन उनका ब्लड ग्रुप नहीं मिला। तब उनकी बड़ी बेटी वीणा ने साहस दिखाया और उनको लीवर देने का निर्णय लिया। लीवर देने के बाद वीणा स्वस्थ है, वहीं उसके पिता के चेहरे की मुस्कान लौट आई है। वीणा के साहसिक कदम की क्षेत्र में चर्चा है।
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उसके ससुराल कंचनपुर में लोग वीणा की सराहना कर रहे हैं। वीणा के पति मनीष उपाध्याय ने कहा कि माता-पिता की मदद करना हर बेटे और बेटी का धर्म है।
मेरी पत्नी वीणा ने वही कार्य किया जो हर बेटी को करना चाहिए। वीणा के ससुर श्रीपति उपाध्याय ने कहा कि बहू के साहस की जितना सराहना की जाए, कम है। वीणा के दादा रविंद्र नाथ त्रिपाठी ने रोते हुए कहा कि मैं अपने इकलौते बेटे को लीवर नहीं दे सका, जिसका हमें हमेशा पछतावा रहेगा।
णा ने अपने पिता को लीवर देकर खानदान को गौरवान्वित किया है। वीणा की मां सरिता त्रिपाठी जो बहुआर गांव की प्रधान हैं, ने बताया कि मैं इस समय वेदांता हास्पिटल में हूं। क्षेत्र के बहुत से लोगों का फोन आ रहा है। मुझे अपनी बेटी पर गर्व है।
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बता दें कि जमालपुर थाना क्षेत्र के बहुआर गांव निवासी रवि प्रकाश त्रिपाठी उर्फ ब्रह्मदेव त्रिपाठी दो वर्षों से लीवर संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे। उन्होंने वाराणसी सहित पूर्वांचल के कई हास्पिटल में जाने-माने चिकित्सकाें से उपचार कराया, लेकिन ठीक नहीं हुए। थक-हार कर वह गुड़गांव के वेदांता हास्पिटल गए और चिकित्सकाें ने उनसे लीवर ट्रांसप्लांट कराने के लिए कहा।
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इस स्थिति में कुछ लोग सामने आए, लेकिन उनका ब्लड ग्रुप नहीं मिला। तब उनकी बड़ी बेटी वीणा ने साहस दिखाया और उनको लीवर देने का निर्णय लिया। लीवर देने के बाद वीणा स्वस्थ है, वहीं उसके पिता के चेहरे की मुस्कान लौट आई है। वीणा के साहसिक कदम की क्षेत्र में चर्चा है।
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उसके ससुराल कंचनपुर में लोग वीणा की सराहना कर रहे हैं। वीणा के पति मनीष उपाध्याय ने कहा कि माता-पिता की मदद करना हर बेटे और बेटी का धर्म है।
मेरी पत्नी वीणा ने वही कार्य किया जो हर बेटी को करना चाहिए। वीणा के ससुर श्रीपति उपाध्याय ने कहा कि बहू के साहस की जितना सराहना की जाए, कम है। वीणा के दादा रविंद्र नाथ त्रिपाठी ने रोते हुए कहा कि मैं अपने इकलौते बेटे को लीवर नहीं दे सका, जिसका हमें हमेशा पछतावा रहेगा।
णा ने अपने पिता को लीवर देकर खानदान को गौरवान्वित किया है। वीणा की मां सरिता त्रिपाठी जो बहुआर गांव की प्रधान हैं, ने बताया कि मैं इस समय वेदांता हास्पिटल में हूं। क्षेत्र के बहुत से लोगों का फोन आ रहा है। मुझे अपनी बेटी पर गर्व है।