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उलझता जा रहा 668 बीघा चारागाह की विवादित जमीन का मामला
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मड़िहान। कलवारी माफी स्थित गुरुदेवनगर आश्रम के कब्जे वाली 668 बीघा चारागाह की विवादित जमीन का मामला उलझता जा जा रहा। ग्रामीणों की शिकायत पर शनिवार को एसडीएम के नेतृत्व में पुलिस टीम के साथ पहुँचे राजस्व अधिकारी कर्मचारियों को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। शिकायत कर रहे ग्रामीणों के प्रतिनिधियों को लाक डाउन समाप्त होने के बाद वार्ता के लिए तहसील बुलाया गया।
दो दिन पूर्व विवादित जमीन पर जोताई- बोआई करने पहुँचे आश्रम के लोगों को ग्रामीणों ने रोक दिया था। यहाँ तक कि बाबाओं को ट्रैक्टर लेकर वापस जाना पड़ा। इसके बाद ग्रामीणों ने स्थिति से उपजिलाधिकारी को अवगत करा दिया। शनिवार को एसडीएम शिवप्रसाद, सीओ ऑपरेशन हितेंद्र कृष्ण, कोतवाली इंचार्ज राजीव कुमार सिंह के साथ राजस्व निरीक्षक व लेखपाल समेत टीम गुरुदेव नगर धमक पड़ी। जानकारी होते ही धीरे-धीरे ग्रामीणों की भीड़ बढ़ती जा रही थी। अपनी मांग के आगे अधिकारियों की बात ग्रामीण सुनने को कतई तैयार नहीं थे। सूत्रों से जानकारी मिली कि ग्रामीणों की भीड़ को देखते हुए अधिकारी आश्रम के पक्ष मे चाहते हुए भी कुछ नहीं कर सके। ग्रामीण प्रतिनिधियों को तहसील में वार्ता के लिए बुलाया गया है।
यह है मामला
मड़िहान। कहा जा रहा है कि राजस्वकर्मियों की मिलीभगत से छह सौ 68 बीघा चारागाह की जमीन पर आश्रम का कब्जा हो गया। लेकिन बंदोबस्त रिकार्ड में चरागाह इंद्राज रह गया। जमीन पर अनाधिकार कब्जे को लेकर पहले भी कई बार ग्रामीण व बाबाओं के बीच तनीतना हो चुकी है। तत्कालीन एसडीएम विमलकुमार दूबे ने जमीन पर जोताई बोआई से रोक लगाते हुए नोटिस भी दिया था। सोनभद्र घोरावल तहसील के उभ्भा गांव में पिछले साल हुए नरसंहार को यादकर अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं।
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दो दिन पूर्व विवादित जमीन पर जोताई- बोआई करने पहुँचे आश्रम के लोगों को ग्रामीणों ने रोक दिया था। यहाँ तक कि बाबाओं को ट्रैक्टर लेकर वापस जाना पड़ा। इसके बाद ग्रामीणों ने स्थिति से उपजिलाधिकारी को अवगत करा दिया। शनिवार को एसडीएम शिवप्रसाद, सीओ ऑपरेशन हितेंद्र कृष्ण, कोतवाली इंचार्ज राजीव कुमार सिंह के साथ राजस्व निरीक्षक व लेखपाल समेत टीम गुरुदेव नगर धमक पड़ी। जानकारी होते ही धीरे-धीरे ग्रामीणों की भीड़ बढ़ती जा रही थी। अपनी मांग के आगे अधिकारियों की बात ग्रामीण सुनने को कतई तैयार नहीं थे। सूत्रों से जानकारी मिली कि ग्रामीणों की भीड़ को देखते हुए अधिकारी आश्रम के पक्ष मे चाहते हुए भी कुछ नहीं कर सके। ग्रामीण प्रतिनिधियों को तहसील में वार्ता के लिए बुलाया गया है।
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यह है मामला
मड़िहान। कहा जा रहा है कि राजस्वकर्मियों की मिलीभगत से छह सौ 68 बीघा चारागाह की जमीन पर आश्रम का कब्जा हो गया। लेकिन बंदोबस्त रिकार्ड में चरागाह इंद्राज रह गया। जमीन पर अनाधिकार कब्जे को लेकर पहले भी कई बार ग्रामीण व बाबाओं के बीच तनीतना हो चुकी है। तत्कालीन एसडीएम विमलकुमार दूबे ने जमीन पर जोताई बोआई से रोक लगाते हुए नोटिस भी दिया था। सोनभद्र घोरावल तहसील के उभ्भा गांव में पिछले साल हुए नरसंहार को यादकर अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं।
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