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अमान्य विद्यालयों के जाल में फंस रहे अभिभावक

Sun, 08 May 2022 12:42 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 08 May 2022 12:42 AM IST
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Parents getting trapped in the trap of invalid schools
एक अप्रैल से नया शिक्षण सत्र शुरू हो गया है। सभी शिक्षण संस्थाएं खुल गई हैं। पठन-पाठन की प्रक्रिया भी गति पकड़ रही है, लेकिन बड़ी समस्या यह है कि जिले में अमान्य विद्यालयों का भी जाल बिछना शुरू हो गया है। इससे अभिभावकों की भी परेशानी बढ़ गई है।
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बड़े-बड़े होर्डिंग्स पर लिखे स्लोगन और चित्रों के माध्यम से अभिभावकों को आकर्षित किया जा रहा है। ऐसे विद्यालय विशेषकर जिले के हलिया, लालगंज व मड़िहान के कुछ इलाकों में खुल रहे हैं। इन विद्यालयों की न तो सरकारी तौर पर मान्यता है और न ही इनमें बुनियादी सुविधाएं हैं। कहीं-कहीं तो एक कमरे और कुछ खाली जगह में ही विद्यालय खोल दिया गया है। अभिभावक जानकारी के अभाव में इन विद्यालयों का शिकार बन जा रहे हैं। एक बार नामांकन कराने के बाद उनका आर्थिक दोहन शुरू हो जाता है। जिले में इस समय लगभग 25 से 30 अमान्य विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें से अधिकांश हलिया, मड़िहान, लालगंज तथा अन्य विकास खंडों के इलाकों में हैं। अमान्य विद्यालयों को चिह्नित करने के लिए विभाग की तरफ से निर्देश भी है, लेकिन अभी तक ऐसेे विद्यालयों की कोई सूची सामने नहीं आई है।
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उधर, इस प्रकार के अधिकांश विद्यालय अपने नाम के आगे या उनके ऊपर बड़े- बड़े अक्षरों में सिलेबस ऑफ सीबीएसई जैसे शब्द लिखवा रहे हैं। जिसको देखकर ग्रामीण क्षेत्रों के अभिभावक भ्रमित हो जा रहे हैं। ग्रामीण ही नहीं, शहरी क्षेत्रों में भी अभिभावक इसको देख कर भ्रमित हो रहे हैं। वे सोचते हैं कि यह सीबीएसई से संबंधित विद्यालय है, जबकि हकीकत इसके विपरीत है। उनके पास न तो मान्यता होती है और न ही प्रशिक्षित शिक्षक। बस उनका एकमात्र उद्देश्य वसूली करना होता है। इस पर भी अभिभावकों ने अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराया है।
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इस संबंध में बीएसए गौतम प्रसाद का कहना है कि नया सत्र आरंभ हुआ है। विद्यालय खुल रहे हैं। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्र में इस प्रकार के विद्यालयों की जांच करें और उनकी सूची विभाग को उपलब्ध कराएं, ताकि कठोर कार्रवाई की जा सके।
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