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आम में स्वाद के साथ मौजूद हैं औषधीय गुण
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अदलहाट। फलों के राजा आम का नाम आते ही लोगों के जेहन में स्वाद के साथ इसके आध्यात्मिक महत्व की बात याद आने लगती है। यह गुणकारी औषधि भी है। आम का महत्व भारत में प्राचीन काल से ही रहा है। आम एक ऐसा फल है जिसे भगवान ने प्रकृति के सुंदर रूप, अनुपम स्वाद व अनेक औषधि गुणों से नवाजा है। इसका नाम लेते ही बच्चे, बूढ़े व जवान सभी के मुंह में पानी आ जाता है। यह फल कच्चा व पक्का दोनों रूपों में बड़े चाव से खाया जाता है।
आम के पेड़ की छाल, लकड़ी, मंजरी सबके अपने-अपने महत्व हैं। वैद्य लक्ष्मी कांत दीक्षित एवं आयुर्वेद के जानकार मुरारी मिश्र ने बताया कि मंजरी से लेकर आम बनने तक फिर इसके पेड़ की छाल व लकड़ी तक के अपने औषधीय गुण हैं। मंजरी की सुगंध जहां आदमी को बसंत ऋतु की याद दिलाती है तो आदमी में कामवासना भी जगाती है। भारतीय समाज में धार्मिक अनुष्ठानों एवं संस्कारों में इसके पत्ते व लकड़ी का काफी महत्व है। वहीं इसके कच्चे व पक्के फल का अलग औषधि गुण भी है। विशेषज्ञों के अनुसार कच्चा आम खट्टा कसैले वात एवं पित्त उत्पन्न करता है, तो वृक्ष पर पका आम यदि चूस कर सेवन किया जाय तो इससे नेत्र ज्योति बढ़ती है। इसमें ए और बी नामक विटामिन भी पाया जाता है। इसके सेवन से विष प्रकोप, कीटाणु नाशक और चर्म रोग नाश होते हैं। इसके सेवन से रतौंधी रोग भी दूर हो जाती है। इसके साथ यदि दूध का भी सेवन हो तो अत्यधिक लाभ होता है। इसकी छाल उत्तम संग्राहक और गर्भाशय के रक्त स्राव को रोकती है। इसकी गुठली के चूर्ण सेवन से कृमि का नाश होता है। ये रक्त संग्राहक है। मंजरी चूर्ण को मिश्री व दूध के साथ सेवन करने से रक्त की शुद्धि, छद्रि रोग, कर्णशूल व नकसीर में फायदा होता है। यह वादीकारक भी होता है। इसके छाल को पीसकर शहद के साथ सेवन से अतिसार, सुजाक, वमन में लाभकारी होता है। वैद्य द्वय ने बताया कि छाल चूर्ण का लेप अत्यंत लाभकारी है। इसके पत्ते का उपयोग दंत मंजन, जलने, पथरी में लाभकारी है। आम के छिलके को पीसकर उसमें नीम की पत्ती व हर्रे मिलाकर चेहरे पर लेप करने से कील, मुहांसे, झाइयां दूर होकर चेहरा कांतिमान बनाता है। आदमियों के अलावा पशु रोग में भी आम के अमचूर का प्रयोग किया जाता है।
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आम के पेड़ की छाल, लकड़ी, मंजरी सबके अपने-अपने महत्व हैं। वैद्य लक्ष्मी कांत दीक्षित एवं आयुर्वेद के जानकार मुरारी मिश्र ने बताया कि मंजरी से लेकर आम बनने तक फिर इसके पेड़ की छाल व लकड़ी तक के अपने औषधीय गुण हैं। मंजरी की सुगंध जहां आदमी को बसंत ऋतु की याद दिलाती है तो आदमी में कामवासना भी जगाती है। भारतीय समाज में धार्मिक अनुष्ठानों एवं संस्कारों में इसके पत्ते व लकड़ी का काफी महत्व है। वहीं इसके कच्चे व पक्के फल का अलग औषधि गुण भी है। विशेषज्ञों के अनुसार कच्चा आम खट्टा कसैले वात एवं पित्त उत्पन्न करता है, तो वृक्ष पर पका आम यदि चूस कर सेवन किया जाय तो इससे नेत्र ज्योति बढ़ती है। इसमें ए और बी नामक विटामिन भी पाया जाता है। इसके सेवन से विष प्रकोप, कीटाणु नाशक और चर्म रोग नाश होते हैं। इसके सेवन से रतौंधी रोग भी दूर हो जाती है। इसके साथ यदि दूध का भी सेवन हो तो अत्यधिक लाभ होता है। इसकी छाल उत्तम संग्राहक और गर्भाशय के रक्त स्राव को रोकती है। इसकी गुठली के चूर्ण सेवन से कृमि का नाश होता है। ये रक्त संग्राहक है। मंजरी चूर्ण को मिश्री व दूध के साथ सेवन करने से रक्त की शुद्धि, छद्रि रोग, कर्णशूल व नकसीर में फायदा होता है। यह वादीकारक भी होता है। इसके छाल को पीसकर शहद के साथ सेवन से अतिसार, सुजाक, वमन में लाभकारी होता है। वैद्य द्वय ने बताया कि छाल चूर्ण का लेप अत्यंत लाभकारी है। इसके पत्ते का उपयोग दंत मंजन, जलने, पथरी में लाभकारी है। आम के छिलके को पीसकर उसमें नीम की पत्ती व हर्रे मिलाकर चेहरे पर लेप करने से कील, मुहांसे, झाइयां दूर होकर चेहरा कांतिमान बनाता है। आदमियों के अलावा पशु रोग में भी आम के अमचूर का प्रयोग किया जाता है।
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