{"_id":"65f0bf139568d4f7010eaa21","slug":"lohandi-river-will-be-rejuvenated-by-spending-rs-10174-lakh-in-11-gram-panchayats-mirzapur-news-c-192-1-svns1034-113654-2024-03-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mirzapur News: 11 ग्राम पंचायतों में 101.74 लाख खर्च कर होगा लोहंदी नदी का जीणोद्धार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mirzapur News: 11 ग्राम पंचायतों में 101.74 लाख खर्च कर होगा लोहंदी नदी का जीणोद्धार
विज्ञापन
मिर्जापुर। सिटी ब्लाॅक के सिरसी गहरवार गांव में मंगलवार को प्राचीन लोहंदी नदी के जीर्णोद्धार के लिए जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी ने भूमि पूजन कर फावड़ा चलाकर तलहटी में खोदाई कार्य का शुभारंभ किया। जिलाधिकारी ने लोगों से नदी के जीर्णोद्धार के साथ ही इसे संरक्षित करने के लिए आगे आने का आह्वान किया।
जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने कहा कि नदी अथवा तालाब कभी सूखते नहीं हैं, बल्कि हमारी उपेक्षा के कारण इसमें कुछ न कुछ समस्या आ जाती है। जिलाधिकारी ने नदी को जीवन दायिनी बताते हुए कहा कि इसका सीधा जुड़ाव लगाव जीव, जंतुओं, खेत-खलिहानों से है। उन्होंने कहा दो साल से पर्याप्त मात्रा में बारिश नहीं हुई है। बारिश नहीं होने से नदियों के जल स्तर पर भी प्रभाव पड़ा है। नदी जगह-जगह तालाब के रूप में तब्दील हो गई है। जिलाधिकारी ने लोहंदी नदी की उत्पत्ति पर चर्चा की और बताया कि यह सिटी विकास खंड के बरकछा खुर्द के अटारी से होते हुए छीतपुर, सिरसी गहरवार, सिरसी बघेल, लोहंदी खुर्द, नकहरा, लोहंदी कला, चंदईपुर, गोपालपुर, राजापुर एवं कंतित गांव होते हुए 16.76 किमी दूरी तय कर गंगा में मिलती है। उन्होंने बताया कि 101.74 लाख रुपये में से मनरेगा के तहत 94.63 लाख रुपये से वित्तीय वर्ष 2023-24 में नदी की तलहटी की खोदाई तथा सफाई आदि के काम कराए जाएंगे। चंदईपुर, बरकछा खुर्द, गोपालपुर में बृहद वृक्षारोपण एवं अमृत उद्यान तैयार किए जाएंगे। सीडीओ विशाल कुमार ने बतायाकि नदी को और भी गहरा बनाया जाएगा। जल संचयन के साथ-साथ नदी के जीर्णोद्धार और चेक डैम भी बनाए जाएगा। सीडीओ ने बताया कि जल संरक्षण के लिए 400 कार्य स्वीकृत हैं। इनमें से 180 काम शुरू हो गए हैं। संचालन ग्राम विकास अधिकारी राजाराम निर्मल ने किया।
विज्ञापन
जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने कहा कि नदी अथवा तालाब कभी सूखते नहीं हैं, बल्कि हमारी उपेक्षा के कारण इसमें कुछ न कुछ समस्या आ जाती है। जिलाधिकारी ने नदी को जीवन दायिनी बताते हुए कहा कि इसका सीधा जुड़ाव लगाव जीव, जंतुओं, खेत-खलिहानों से है। उन्होंने कहा दो साल से पर्याप्त मात्रा में बारिश नहीं हुई है। बारिश नहीं होने से नदियों के जल स्तर पर भी प्रभाव पड़ा है। नदी जगह-जगह तालाब के रूप में तब्दील हो गई है। जिलाधिकारी ने लोहंदी नदी की उत्पत्ति पर चर्चा की और बताया कि यह सिटी विकास खंड के बरकछा खुर्द के अटारी से होते हुए छीतपुर, सिरसी गहरवार, सिरसी बघेल, लोहंदी खुर्द, नकहरा, लोहंदी कला, चंदईपुर, गोपालपुर, राजापुर एवं कंतित गांव होते हुए 16.76 किमी दूरी तय कर गंगा में मिलती है। उन्होंने बताया कि 101.74 लाख रुपये में से मनरेगा के तहत 94.63 लाख रुपये से वित्तीय वर्ष 2023-24 में नदी की तलहटी की खोदाई तथा सफाई आदि के काम कराए जाएंगे। चंदईपुर, बरकछा खुर्द, गोपालपुर में बृहद वृक्षारोपण एवं अमृत उद्यान तैयार किए जाएंगे। सीडीओ विशाल कुमार ने बतायाकि नदी को और भी गहरा बनाया जाएगा। जल संचयन के साथ-साथ नदी के जीर्णोद्धार और चेक डैम भी बनाए जाएगा। सीडीओ ने बताया कि जल संरक्षण के लिए 400 कार्य स्वीकृत हैं। इनमें से 180 काम शुरू हो गए हैं। संचालन ग्राम विकास अधिकारी राजाराम निर्मल ने किया।
विज्ञापन