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गो आश्रय स्थलों में कम हो रही टैगिंग
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कोविड-19 के समय में भी जिले के गो आश्रय स्थल में गोवंश की टैगिंग नहीं हो रही हैं। साथ ही कई केंद्रों पर बजट का अभाव हो जा रहा है। इससे पशुओं के सामने चारे का संकट खड़ा हो गया है। नगर पालिका परिषद द्वारा संचालित टांडा फाल स्थित गोआश्रय स्थल में इस समय 496 पशु उपस्थित हैं। उनमें से तीन पशु बीमार थे। उनका उपचार किया जा रहा है। लगभग दो दर्जन की संख्या में गोवंशों की टैगिंग नहीं की गई है।
एक सप्ताह पूर्व सीडीओ श्रीलक्ष्मी वीएस ने इस आश्रय स्थल का निरीक्षण किया था। टैगिंग कराने का निर्देश दिया था। चारा व अन्य व्यवस्था ठीक-ठाक चल रही है। नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी ओमप्रकाश ने बताया कि इन पशुओं का पशु चिकित्सकों द्वारा निरीक्षण कर उपचार कराया जाता है। हलिया, विकासखंड के गलरा तथा गौरवा गांव में अस्थायी पशु आश्रय स्थल बनाया गया है। गलरा गांव में 202 नर-मादा पशु हैं तथा 50 क्विंटल भूसा की व्यवस्था है। निर्वाचित ग्राम प्रधान ममता मिश्र तथा ग्राम विकास अधिकारी पीयूष दुबे द्वारा दो चरवाहों के माध्यम से आश्रय स्थल की व्यवस्था की जा रही है।
गौरवा गांव में अस्थायी पशु आश्रय स्थल पर 140 पशु मौजूद हैं। वहां पर भी 40 क्विंटल भूसा उपलब्ध है। पानी की व्यवस्था सोलर पंप से की जाती है। ग्राम विकास अधिकारी राजेंद्र प्रसाद बिंद द्वारा व्यवस्था की जा रही है दोनों जगहों पर टीन शेड भी उपलब्ध है। लालगंज, क्षेत्र में दो अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल बनाए गए हैं। दोनों गोवंश अस्थायी आश्रय स्थलों में से बामी गांव में 392 पशु और उसरी खम्हरिया में 156 गोवंश है। इसमें बामी गांव में गोवंशो के लिए 10दिन के लिए 250 क्विंटल भूसा चारा है जबकि उसरी खम्हरिया में पर्याप्त मात्रा मात्रा में मौजूद है। पशुधन प्रसार अधिकारी जगतंबा पटेल ने बताया कि पशुओं के स्वास्थ्य की नियमित जांच की जा रही है। कछवा, नगर पंचायत की ओर से संचालित गो आश्रय स्थल में इन दिनों 85 पशु उपस्थित हैं। उनके चारा आदि की व्यवस्था नगर पंचायत की ओर से की जा रही है। ईओ ने बताया कि आश्रय स्थल के लिए आठ माह से बजट नहीं आ रहा है। नगर पंचायत अपने संसाधनों व कुछ संस्थाओं के सहयोग से व्यवस्था कर रही है।
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एक सप्ताह पूर्व सीडीओ श्रीलक्ष्मी वीएस ने इस आश्रय स्थल का निरीक्षण किया था। टैगिंग कराने का निर्देश दिया था। चारा व अन्य व्यवस्था ठीक-ठाक चल रही है। नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी ओमप्रकाश ने बताया कि इन पशुओं का पशु चिकित्सकों द्वारा निरीक्षण कर उपचार कराया जाता है। हलिया, विकासखंड के गलरा तथा गौरवा गांव में अस्थायी पशु आश्रय स्थल बनाया गया है। गलरा गांव में 202 नर-मादा पशु हैं तथा 50 क्विंटल भूसा की व्यवस्था है। निर्वाचित ग्राम प्रधान ममता मिश्र तथा ग्राम विकास अधिकारी पीयूष दुबे द्वारा दो चरवाहों के माध्यम से आश्रय स्थल की व्यवस्था की जा रही है।
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गौरवा गांव में अस्थायी पशु आश्रय स्थल पर 140 पशु मौजूद हैं। वहां पर भी 40 क्विंटल भूसा उपलब्ध है। पानी की व्यवस्था सोलर पंप से की जाती है। ग्राम विकास अधिकारी राजेंद्र प्रसाद बिंद द्वारा व्यवस्था की जा रही है दोनों जगहों पर टीन शेड भी उपलब्ध है। लालगंज, क्षेत्र में दो अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल बनाए गए हैं। दोनों गोवंश अस्थायी आश्रय स्थलों में से बामी गांव में 392 पशु और उसरी खम्हरिया में 156 गोवंश है। इसमें बामी गांव में गोवंशो के लिए 10दिन के लिए 250 क्विंटल भूसा चारा है जबकि उसरी खम्हरिया में पर्याप्त मात्रा मात्रा में मौजूद है। पशुधन प्रसार अधिकारी जगतंबा पटेल ने बताया कि पशुओं के स्वास्थ्य की नियमित जांच की जा रही है। कछवा, नगर पंचायत की ओर से संचालित गो आश्रय स्थल में इन दिनों 85 पशु उपस्थित हैं। उनके चारा आदि की व्यवस्था नगर पंचायत की ओर से की जा रही है। ईओ ने बताया कि आश्रय स्थल के लिए आठ माह से बजट नहीं आ रहा है। नगर पंचायत अपने संसाधनों व कुछ संस्थाओं के सहयोग से व्यवस्था कर रही है।
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