तकनीक: अब लैब में तैयार होंगे भ्रूण, पैदा होंगी अच्छी नस्ल की बछिया; भारत सरकार को भेजा गया प्रस्ताव
विंध्य के पशुपालकों तक बीएचयू की नई तकनीक पहुंचेगी। इससे अब गाय के पेट में नहीं लैब में बछिया के भ्रूण तैयार होंगे। इस प्रोजेक्ट को सरकार को भेज दिया गया है।
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बीएचयू में अब तक श्रेष्ठ नस्ल की गाय से भ्रूण तैयार कर उसे दूसरी सरोगेट गाय के गर्भ में प्रत्यारोपित कर बछिया पैदा की जा रही थी। इस प्रक्रिया में पहले गाय में सुपर ओव्यूलेशन कराकर सेक्स-सॉर्टेड सीमन से कृत्रिम गर्भाधान कराया जाता था। बने भ्रूण को सरोगेट गाय में प्रत्यारोपित किया जाता था। अब इससे एक कदम आगे ओवम पिक-अप (ओपीयू), इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) और एम्ब्रियो ट्रांसफर (ईटी) तकनीक अपनाने की तैयारी है। इसमें गाय के अंडाणु सीधे निकालकर प्रयोगशाला में श्रेष्ठ सांड के शुक्राणु से निषेचित कर भ्रूण तैयार किया जाएगा।
यानी बार-बार गाय में सुपर ओव्यूलेशन कराने की बजाय उसके अंडाणुओं से लैब में कई भ्रूण तैयार करने की दिशा में काम होगा। परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. मनीष कुमार ने बताया कि पहले सेरोगेट गंगातीरी गाय में सुपर ओव्यूलेशन कराकर सेक्स-सॉर्टेड सीमन से कृत्रिम गर्भाधान कर साहीवाल बछिया का जन्म कराते थे।
यह प्रक्रिया एक गाय में वर्ष में चार बार ही कर सकते है पर आईवीएफ तकनीक से एक महीने में कम से कम चार बार कर सकते हैं। इससे ज्यादा से ज्यादा अच्छी नस्ल की गाय पैदा होंगी। बताया कि इस प्रोजेक्ट को सरकार को भेज दिया गया है। बजट मिलने के बाद इस पर काम शुरू हो जाएगा।
बीएचयू की योजना इस तकनीक शोध परिसर से निकालकर विंध्य क्षेत्र के पशुपालकों तक पहुंचाने की है। इससे गंगातीरी समेत अन्य स्वदेशी नस्लों के उच्च आनुवंशिक क्षमता वाले पशुओं की संख्या तेजी से बढ़ाने और दुग्ध उत्पादन बढ़ाकर पशुपालकों की आय में इजाफा करने का लक्ष्य है।
सेरोगेट गाय से अब तक आठ बछिया का हो चुका है जन्म
परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. मनीष कुमार ने बताया कि बीएचयू के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर स्थित पशुचिकित्सा व पशुविज्ञान संकाय ने स्वदेशी गोवंशीय नस्लों के संरक्षण एवं आनुवंशिक सुधार के उद्देश्य से संचालित राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत वित्तपोषित सहायक प्रजनन परियोजना को 2022 में शुरू किया था। इससे अब तक आठ बछिया का जन्म हो चुका है। इससे तीन लीटर दूध देने वाली गंगातीरी सरोगेट गाय से 14–16 लीटर प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन की क्षमता वाली साहीवाल बछिया का जन्म हुआ है।
क्या है ओपीयू–आईवीएफ–ईटी तकनीक
डॉ. मनीष कुमार ने बताया कि ओपीयू–आईवीएफ–ईटी तकनीक पारंपरिक एमओईटी की तुलना में उत्कृष्ट स्वदेशी पशुओं के तीव्र आनुवंशिक उन्नयन, गुणन एवं प्रसार के लिए अधिक उन्नत व संभावनाशील सहायक प्रजनन तकनीक है। श्रेष्ठ पशुओं से बार-बार अंडाणुओं का संग्रहण, उच्च आनुवंशिक मूल्य वाले एवं सेक्स-सॉर्टेड सीमन का दक्षतापूर्वक उपयोग व अपेक्षाकृत कम अवधि में अधिक संख्या में भ्रूण बन सकेगा। इससे श्रेष्ठ आनुवंशिक क्षमता वाले पशुओं की संख्या में तेजी से वृद्धि होगी। उन्नत जर्मप्लाज्म को व्यापक स्तर पर पशुपालकों तक पहुंचाया जा सकता है। वर्तमान में क्षेत्र में एमओईटी आधारित कार्यों से प्राप्त अनुभव व उपलब्ध आधारभूत संरचना का लाभ उठाते हुए ओपीयू–आईवीएफ–ईटी तकनीक से यूपी के पशुपालकों को उत्तम पशु मिल सकेंगे।