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दुर्गम पहाड़ी रास्तों से बेचूबीर बाबा के धाम पहुंच रहे श्रद्धालु
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दुर्गम पहाड़ी रास्तों से होकर संतान प्राप्ति और प्रेत बाधाओं से मुक्ति के लिए श्रद्धालु बेचूबीर बाबा के धाम पहुंचने लगे हैं। श्रद्धालुओं को क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत नहीं होने से आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
रास्ते भर हिचकोले खाते नौनिहालों के साथ श्रद्धालु बाबा के धाम में मत्था टेकने मंगलवार को पहुंचे। श्रद्धालुओं को मेला क्षेत्र में पेयजल की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। संतान प्राप्ति और प्रेत बाधा निवारण के लिए बेचूबीर बाबा की चौरी का विशेष महत्व है। जहां प्रतिवर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर एकादशी तक तीन दिवसीय मेला का आयोजन किया जाता है। मेला में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड तथा महाराष्ट्र के काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मान्यता है कि कई साल पहले बरही के घने जंगलों में भगवान शंकर के अनन्य भक्त पहलवान बेचू यादव भैंस चराया करते थे। उन दिनों इस जंगल में हिंसक जानवरों का आतंक था। एक दिन भैंस चराने के दौरान बाघ ने बेचू यादव पर हमला कर दिया। तीन दिनों तक दोनों के बीच मुकाबला चलता रहा। तीसरे दिन बाघ से लड़ते-लड़ते बेचू यादव वीरगति को प्राप्त हो गए और घायल बाघ ने भी दम तोड़ दिया। इस घटना की जानकारी मौके पर मौजूद बेचू यादव के कुत्ते ने घर पहुंच कर परिजनों को अपने तरीके से दी।
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इसके बाद बेचू यादव की पत्नी मौके पर पहुंचीं और अपने बारह दिन के बच्चे को गोद में लेकर उन्होंने प्राण त्याग दिया। इस असामयिक मृत्यु के चलते परिजनों को बुरे सपने आने लगे। जानकारों की सलाह पर परिजनों ने इसी जगह बेचू यादव तथा जहां बारह दिन के बच्चे को गोद में लेकर उनकी पत्नी ने दम तोड़ा था, उसी जगह दोनों लोगों की चौरी बनवा दी। तभी से बरहिया माता और बेचूबीर बाबा की पूजा अर्चना की जाने लगी। मान्यता है कि यहां प्रेत बाधा निवारण और संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होती है।
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रास्ते भर हिचकोले खाते नौनिहालों के साथ श्रद्धालु बाबा के धाम में मत्था टेकने मंगलवार को पहुंचे। श्रद्धालुओं को मेला क्षेत्र में पेयजल की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। संतान प्राप्ति और प्रेत बाधा निवारण के लिए बेचूबीर बाबा की चौरी का विशेष महत्व है। जहां प्रतिवर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर एकादशी तक तीन दिवसीय मेला का आयोजन किया जाता है। मेला में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड तथा महाराष्ट्र के काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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मान्यता है कि कई साल पहले बरही के घने जंगलों में भगवान शंकर के अनन्य भक्त पहलवान बेचू यादव भैंस चराया करते थे। उन दिनों इस जंगल में हिंसक जानवरों का आतंक था। एक दिन भैंस चराने के दौरान बाघ ने बेचू यादव पर हमला कर दिया। तीन दिनों तक दोनों के बीच मुकाबला चलता रहा। तीसरे दिन बाघ से लड़ते-लड़ते बेचू यादव वीरगति को प्राप्त हो गए और घायल बाघ ने भी दम तोड़ दिया। इस घटना की जानकारी मौके पर मौजूद बेचू यादव के कुत्ते ने घर पहुंच कर परिजनों को अपने तरीके से दी।
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इसके बाद बेचू यादव की पत्नी मौके पर पहुंचीं और अपने बारह दिन के बच्चे को गोद में लेकर उन्होंने प्राण त्याग दिया। इस असामयिक मृत्यु के चलते परिजनों को बुरे सपने आने लगे। जानकारों की सलाह पर परिजनों ने इसी जगह बेचू यादव तथा जहां बारह दिन के बच्चे को गोद में लेकर उनकी पत्नी ने दम तोड़ा था, उसी जगह दोनों लोगों की चौरी बनवा दी। तभी से बरहिया माता और बेचूबीर बाबा की पूजा अर्चना की जाने लगी। मान्यता है कि यहां प्रेत बाधा निवारण और संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होती है।