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Mirzapur News: हर दिन आ रहे जहर खाने के मामले, इनमें 60 प्रतिशत हैं, 18 से 26 वर्ष की युवतियां

Tue, 13 Oct 2026 01:48 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 13 Oct 2026 01:48 AM IST
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Cases of poison ingestion are being reported daily; 60 percent of these involve young women aged 18 to 26.
मंडलीय अस्पताल की इमरजेंसी में औसतन रोज पहुंच रहा विषाक्त पदार्थ के सेवन का एक मामला
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संवाद न्यूज एजेंसी
मिर्जापुर। जिले में हर दिन जहर खाकर जान देने का प्रयास करने के मामले सामने आ रहे हैं। मंडलीय अस्पताल की इमरजेंसी और सीएचसी और पीएचसी की पिछले तीन महीने की रिपोर्ट में औसतन प्रतिदिन ऐसा एक मामला पहुंच रहा है। किसी-किसी दिन दो से तीन मामले भी आते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जहर खाने वालों में 60 प्रतिशत 18 से 26 वर्ष की युवतियां हैं। जहर खाने के मामलों में 10 में से दो की जान भी चली जाती है। ज्यादातर मामलों में किसी लड़के से प्रेम संबंध की जानकारी होने पर परिजनों की डांट या पति की मांग पूरी न होने पर विवाद के बाद विषाक्त पदार्थ का सेवन करने की बात सामने आती है।
जिले में 18 थाने हैं। प्रतिदिन किसी न किसी थाना क्षेत्र से जहर खाकर जान देने के प्रयास का मामला सामने आते हैं। मंडलीय अस्पताल की इमरजेंसी में विषाक्त पदार्थ का सेवन करने के बाद औसतन एक व्यक्ति को प्रतिदिन लाया जाता है। इमरजेंसी की पुलिस मेडिकल बुक में ऐसे मामलों को दर्ज किया जाता है। इनमें कुछ मरीज इलाज के बाद ठीक हो जाते हैं, जबकि कुछ को दूसरे अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। इसके अलावा सीएचसी और पीएचसी में भी विषाक्त पदार्थ का सेवन करने वाले मरीज पहुंचते रहते हैं।
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जहर खाने के बाद अस्पताल पहुंचने वालों में 70 प्रतिशत महिलाएं और 30 प्रतिशत पुरुष हैं। महिलाओं में 16 से 26 वर्ष की युवतियों की संख्या सबसे अधिक बताई गई है। ऐसे 80 प्रतिशत मामले ग्रामीण और 20 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों के हैं।
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राजगढ़ और मड़िहान में सबसे अधिक मामले
जिले के 18 थानों में राजगढ़ और मड़िहान क्षेत्र में ऐसे मामले सबसे अधिक सामने आते हैं। यहां हर दूसरे या तीसरे दिन जहर खाने के मामले आते हैं। पिछले एक महीने में राजगढ़ क्षेत्र से जहर खाने के 10 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं।

केस-1
पति वाराणसी में काम करता है। छह महीने पहले शादी हुई थी। प्रतिदिन आने-जाने में परेशानी होने से पति वाराणसी में रहकर काम करता है और छुट्टी पर घर आता है। पत्नी ने उसे घर आने के लिए फोन किया, लेकिन पति ने मना कर दिया। इसके बाद उसने घर में रखा सिंदूर घोलकर पी लिया। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे।

केस-दो
16 वर्षीय लड़की फोन पर अक्सर किसी से बात करती थी। परिजनों के पूछने पर वह बताती थी कि उसकी स्कूल की दोस्त है। रात में किसी लड़के से बात करते समय परिजनों ने उसे पकड़ लिया और डांटा। इसके बाद उसने घर में रखी कई गोलियां खा लीं।

केस-तीन
राजगढ़ थाना क्षेत्र के नदिहार निवासी एक महिला ने पति की रोजाना शराब पीकर मारपीट करने की आदत से परेशान होकर जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजगढ़ ले जाया गया, जहां से उसे रेफर कर दिया गया।

केस-चार
20 वर्षीय युवती को एक लड़के से प्रेम था। शादी की बात करने पर लड़के ने मना कर दिया। इसके बाद युवती ने विषाक्त पदार्थ का सेवन कर जान देने का प्रयास किया। उपचार के बाद परिजनों ने उसकी काउंसलिंग कराई।

इनसेट
परिजनों को सलाह- युवाओं से करें बात, युवा भी न उठाएं जल्दबाजी में आत्मघाती कदम
नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि जब कोई व्यक्ति जहर खाकर जान देने की कोशिश करता है, तो वह भावनात्मक दर्द से छुटकारा पाने का प्रयास कर सकता है। इसके पीछे अवसाद एक कारण हो सकता है। इसमें लंबे समय तक उदासी, निराशा, खुद को बेकार समझने और भविष्य के प्रति उम्मीद खत्म होने जैसी भावनाएं हो सकती हैं। कई बार व्यक्ति बाहर से सामान्य दिखता है, लेकिन अंदर से बहुत टूट चुका होता है। रिश्ते में धोखा या ब्रेकअप, शोषण, ताने, अपमान और सोशल मीडिया पर बदनामी का डर भी परेशानी का कारण बन सकता है। कम उम्र में भावनाएं तीव्र होती हैं और सहन करने की क्षमता कम हो सकती है। पढ़ाई या कॅरिअर के लिए अत्यधिक अपेक्षाओं से पारिवारिक दबाव भी ऐसे कदम उठाने की वजह बन सकता है। डॉ. सिंह ने कहा कि परिवार और समाज को युवाओं की बात सुननी चाहिए। उन्हें जज करने के बजाय समझने का प्रयास करना चाहिए। युवाओं को भी जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहिए। जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। समय पर काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता से ऐसे मामलों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
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