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ग्रहण काल में स्नान, दान, मंत्र जाप, हवन व श्राद्ध कर्म सफल होता है
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मिर्जापुर। सूर्य ग्रहण, रविवार को दिन में 10 बजकर 30 मिनट से लेकर दोपहर दो बजकर 04 मिनट तक लग रहा है। अमावस्या पर लगने वाला कंकणाकृति खंडग्रास सूर्य ग्रहण नौ सौ वर्ष बाद लग रहा है। इससे पहले पांच जून को चंद्र ग्रहण लग चुका है। एक ही महीने में दो ग्रहण लगने को ज्योतिषि ठीक नहीं बता रहे हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित रामलाल त्रिपाठी की माने तो एक ही माह में दो ग्रहण प्राकृतिक आपदाओं के साथ ही महामारी लेकर आते हैं। उन्होंने कहा इस ग्रहण काल में स्नान, दान, मंत्र जाप हवन, श्राद्ध कर्म सफल होता है। मंत्र सिद्धी के लिए यह समय शीघ्र फलदायक होता है। राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बताने के दौरान ज्योतिषाचार्य ने कहा कि मेष को लाभ, वृष को हानि, मिथुन को घात, कर्क को व्यय, सिंह को लाभ, कन्या को सुख, तुला को मान नाश, वृश्विक को अधिक कष्ट, धनु को स्त्री कष्ट, मकर को सुख, कुंभ को चिंता, मीन को व्यथा। उन्होंने कहा ग्रहण काल में यात्रा, भोजन एवं मैथुन आदि क्रिया नहीं करनी चाहिए। ज्योतिषाचार्य ने कहा इस काल मे मंदिर में प्रवेश व देवता का स्पर्श नहीं करना चाहिए। यदि कोई गर्भिणी स्त्री एवं गर्भिणी गाय हो तो उसके पेट को गोबर से गोठ देना चाहिए।
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ज्योतिषाचार्य पंडित रामलाल त्रिपाठी की माने तो एक ही माह में दो ग्रहण प्राकृतिक आपदाओं के साथ ही महामारी लेकर आते हैं। उन्होंने कहा इस ग्रहण काल में स्नान, दान, मंत्र जाप हवन, श्राद्ध कर्म सफल होता है। मंत्र सिद्धी के लिए यह समय शीघ्र फलदायक होता है। राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बताने के दौरान ज्योतिषाचार्य ने कहा कि मेष को लाभ, वृष को हानि, मिथुन को घात, कर्क को व्यय, सिंह को लाभ, कन्या को सुख, तुला को मान नाश, वृश्विक को अधिक कष्ट, धनु को स्त्री कष्ट, मकर को सुख, कुंभ को चिंता, मीन को व्यथा। उन्होंने कहा ग्रहण काल में यात्रा, भोजन एवं मैथुन आदि क्रिया नहीं करनी चाहिए। ज्योतिषाचार्य ने कहा इस काल मे मंदिर में प्रवेश व देवता का स्पर्श नहीं करना चाहिए। यदि कोई गर्भिणी स्त्री एवं गर्भिणी गाय हो तो उसके पेट को गोबर से गोठ देना चाहिए।
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