बैकों के नीजीकरण के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के राष्ट्रव्यापी दो दिवसीय हड़ताल का पहले ही दिन असर दिखा। वृहस्पतिवार को सौ से डेढ़ सौ करोड़ रुपये का क्लीयरिंग का कार्य प्रभावित रहा। शहर से लेकर गांव तक लाभार्थी अपने भुगतान को लेकर दिन भर बैंक का चक्कर लगा रहे थे।नगर में बैंक हड़ताल को देखते हुए सभी बैंक अधिकारी और कर्मचारी डंकीनगंज स्थित इंडियन बैंक शाखा के सामने एकत्रित होकर नीजीकरण के विरोध में सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाया। सभा को संबोधित करते यूएफबीयू के जिला संयोजक सुरेश पांडेय ने बताया कि दो दिवसीय बैंक हड़ताल किसी प्रकार के सुख-सुविधा व वेतन बढ़ोत्तरी के लिए नहीं बल्कि यह देश के आम गरीब, किसान, मजदूर व व्यापारी वर्ग के बैंको में जमा धन को सुरक्षित बचाने के लिए किया जा रहा है। जिला संयोजक ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैँको का नीजीकरण किसी भी रुप में देशहित में नहीं। कहा 1969 बैंको का राष्ट्रीयकरण पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरागांधी ने देशहित में किया था। उन्होने कहा दो दिवसीय हड़ताल के बाद भी यदि सरकार न चेती तो बैंककर्मी आर-पार की लड़ाई लड़ने को मजबूर होंगे। संजीव पांडेय ने कहा बैंको का नीजीकरण देश के भविष्य के साथ धोखा होगा। विरोध प्रदर्शन में आशीष कुमार मिश्रा, रामनारायण, संजीव कुमार पांडेय, भरत लाल, नंदलाल, दीपक कुमार, राकेश कुमार, रोशन, धनंजय राय, रमाशंकर जायसवाल आदि मौजूद रहे।