- तेंदुई में भागवत कथा का समापन
लालगंज। तेंदुई स्थित जानकी कुंज मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन मंगलवार को कथा व्यास पवन कुमार महाराज ने कहा कि मनुष्य के आत्मस्वरूप के साक्षात्कार में सबसे बड़ी बाधा अहंकार है। विवेक जागृत होने पर अहंकार का आवरण हटता है और जीव अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान लेता है।
उन्होंने कहा कि एक ही सोने से कंगन, कुंडल और अनेक आभूषण बनाए जाते हैं, लेकिन उनका मूल तत्व सोना ही रहता है। इसी प्रकार परमात्मा एक होते हुए भी अनेक रूपों में दिखाई देते हैं। सूर्य से उत्पन्न बादल सूर्य को ही ढंक देता है। उसी प्रकार ब्रह्म से उत्पन्न अहंकार ब्रह्म के अंश जीव को परमात्मा के साक्षात्कार से रोकता है। राजा परीक्षित को शुकदेव जी के अंतिम उपदेश का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि आत्मा न जन्म लेती है और न उसकी मृत्यु होती है। मुख्य अजमान अंतर्राष्ट्रीय संत बाल योगी संजय महाराज, अमरनाथ तिवारी, जानकी देवी ने आरती पूजन किया। कथा श्रवण करने वालों में पूर्व विधायक भगवती प्रसाद चौधरी ,शशि भूषण दुबे, इंद्रमणि पांडेय, राजेंद्र सिंह यादव, विनोद तिवारी आदि उपस्थित रहे।