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नगर की रफ्तार रोक रहे छुट्टा पशु
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नगर के मुख्य मार्गों पर स्वच्छंद रूप से विचरण करने वाले छुट्टा पशुओं से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। छुट्टा पशुओं की वजह से सड़कों पर हादसे का खतरा बना रहता है। छुट्टा पशु सब्जी की दुकानों पर भी नुकसान भी पहुंचाते हैं। रामबाग में बीते सोमवार को इन्हीं छुट्टा पशुओं की वजह से जाम लग गया था।
इस समय नगर के हर चौक-चौराहों व सड़कों पर छुट्टा पशुओं का जमघट लगा रहता है। कई बार तो ये पशु सड़क के बीचोबीच इस तरह से बैठ जाते हैं कि वहां से वाहन निकाल पाना मुश्किल हो जाता है। विवश होकर लोगों को सड़क के किनारे से आवागमन करना पड़ता है। नगर के बाजार में लोगों की भीड़ के बीच भी ये पशु घूमते रहते हैं। आसपास से गुुजरने पर ये सींग दिखाते हैं। यदि आदमी ध्यान देकर न चले तो इनकी चपेट में आकर घायल हो सकता है। छुट्टा पशुओं की लगातार बढ़ती संख्या से नागरिक आक्रोशित हैं। नगर में फैले कूड़े भी इनके विचरण का प्रमुख कारण हैं। जहां इनको भोजन मिलने लगता है और वहा आसपास बैठ जाते हैं। नगर क्षेत्र में नगरपालिका की ओर से भी समय-समय पर छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जाता है, लेकिन इसमें कमी आई है। कुछ माह पूर्व दो-तीन दिन तक अभियान चलाया गया था। उस दौरान छुट्टा पशुओं को पकड़कर टांडा फाल स्थित अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल भेजा गया, लेकिन उसके बाद वह भी बंद हो गया। अब स्थिति यह है कि नगर में अधिकांश जगहों पर बीच सड़क पर छुट्टा पशु बैठे मिल जाते हैं। इससे आवागमन प्रभावित होता है। कभी-कभी छुट्टा पशुओं की चपेट में आकर नागरिक भी घायल हो जा रहे हैं। नगर पालिका परिषद मिर्जापुर के अधिशासी अधिकारी अंगद गुप्ता का कहना है कि छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसमें तेजी लाई जाएगी। जिले में सड़कों पर अधिकांश गोवंश ही मिलते हैं। इस प्रकार के गोवंश के लिए प्रदेश सरकार ने गो आश्रय स्थल की व्यवस्था की है। जिले में पहाड़ी विकास खंड के सिंधोरा व पटेहरा तथा हलिया के उमरिया में स्थायी गो आश्रय स्थल बनवाए गए हैं। इसके साथ ही 21 अस्थायी गो आश्रय स्थल बनाए गए हैं। इन सबमें 5457 गोवंश रखे गए हैं। इनके लिए 30 रुपये प्रतिदिन प्रति गोवंश की भोजन की व्यवस्था की गई है। गोवंश आश्रय स्थलों की मानिटरिंग के लिए देवीपाटन मंडल के अपर निदेशक डॉ. एसपी पांडेय को मंडल का नोडल अधिकारी बनाया गया है। वे इस मंडल के सभी गो आश्रय स्थलों की निगरानी करेंगे। जो पशु पकड़े जाते हैं, उनको इन आश्रय स्थलों में रखा जाता है। इनकी मानिटरिंग के लिए शासन स्तर से नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं। देवी पाटन मंडल के पशु चिकित्सा विभाग के अपर निदेशक डॉ.एसपी पांडेय को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।
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इस समय नगर के हर चौक-चौराहों व सड़कों पर छुट्टा पशुओं का जमघट लगा रहता है। कई बार तो ये पशु सड़क के बीचोबीच इस तरह से बैठ जाते हैं कि वहां से वाहन निकाल पाना मुश्किल हो जाता है। विवश होकर लोगों को सड़क के किनारे से आवागमन करना पड़ता है। नगर के बाजार में लोगों की भीड़ के बीच भी ये पशु घूमते रहते हैं। आसपास से गुुजरने पर ये सींग दिखाते हैं। यदि आदमी ध्यान देकर न चले तो इनकी चपेट में आकर घायल हो सकता है। छुट्टा पशुओं की लगातार बढ़ती संख्या से नागरिक आक्रोशित हैं। नगर में फैले कूड़े भी इनके विचरण का प्रमुख कारण हैं। जहां इनको भोजन मिलने लगता है और वहा आसपास बैठ जाते हैं। नगर क्षेत्र में नगरपालिका की ओर से भी समय-समय पर छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जाता है, लेकिन इसमें कमी आई है। कुछ माह पूर्व दो-तीन दिन तक अभियान चलाया गया था। उस दौरान छुट्टा पशुओं को पकड़कर टांडा फाल स्थित अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल भेजा गया, लेकिन उसके बाद वह भी बंद हो गया। अब स्थिति यह है कि नगर में अधिकांश जगहों पर बीच सड़क पर छुट्टा पशु बैठे मिल जाते हैं। इससे आवागमन प्रभावित होता है। कभी-कभी छुट्टा पशुओं की चपेट में आकर नागरिक भी घायल हो जा रहे हैं। नगर पालिका परिषद मिर्जापुर के अधिशासी अधिकारी अंगद गुप्ता का कहना है कि छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसमें तेजी लाई जाएगी। जिले में सड़कों पर अधिकांश गोवंश ही मिलते हैं। इस प्रकार के गोवंश के लिए प्रदेश सरकार ने गो आश्रय स्थल की व्यवस्था की है। जिले में पहाड़ी विकास खंड के सिंधोरा व पटेहरा तथा हलिया के उमरिया में स्थायी गो आश्रय स्थल बनवाए गए हैं। इसके साथ ही 21 अस्थायी गो आश्रय स्थल बनाए गए हैं। इन सबमें 5457 गोवंश रखे गए हैं। इनके लिए 30 रुपये प्रतिदिन प्रति गोवंश की भोजन की व्यवस्था की गई है। गोवंश आश्रय स्थलों की मानिटरिंग के लिए देवीपाटन मंडल के अपर निदेशक डॉ. एसपी पांडेय को मंडल का नोडल अधिकारी बनाया गया है। वे इस मंडल के सभी गो आश्रय स्थलों की निगरानी करेंगे। जो पशु पकड़े जाते हैं, उनको इन आश्रय स्थलों में रखा जाता है। इनकी मानिटरिंग के लिए शासन स्तर से नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं। देवी पाटन मंडल के पशु चिकित्सा विभाग के अपर निदेशक डॉ.एसपी पांडेय को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।
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