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Mirzapur News: 10 नैनो मीटर का टैबलेट दवा को खून तक सीधा पहुंचाएगा

Tue, 09 Sep 2025 11:36 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 09 Sep 2025 11:36 PM IST
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A 10 nanometer tablet will deliver the medicine directly to the blood
अमेरिका में नेशनल डेंड्रिमर सेंटर में संयुक्त रूप से सीईओ डॉ. डोनाल्ड टोमालिया के साथ मिर्जापुर
अदलहाट। चुनार क्षेत्र के बगहीं गांव निवासी भारतीय मूल के वैज्ञानिक डॉ. मयंक की ओर से तैयार किए गए नैनो एक्सेपिएंट फार्मूला को अब पूरा विश्व सुप्रा-प्लेक्स के नाम से जानेगा। इस तकनीक से दवाएं और भी सुरक्षित व असरदार साबित होगी। 5 सितंबर को भारत में शिक्षक दिवस पर संयुक्त राज्य अमेरिका-मिशिगन स्थित नेशनल डेंड्रिमर एंड नैनोटेक्नोलॉजी सेंटर के प्रधान वैज्ञानिक एवं निदेशक पद पर कार्यरत डॉ. मयंक सिंह एवं संस्थान के सीईओ डॉ. डोनाल्ड टोमालिया ने संयुक्त रूप से विगत पांच वर्षों के प्रयास के बाद एक्सेपिएंट की अगली तकनीक सुप्रा-प्लेक्स एक्सेपिएंट की आधिकारिक घोषणा की। अमर उजाला से वीडियो कॉल पर बातचीत के दौरान डॉ. मयंक ने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान विकसित की गई। डॉ. मयंक एवं डॉ. टोमालिया द्वारा संचालित यह संस्थान डेंड्रीमर विज्ञान एवं नैनो-सक्षम समाधानों के क्षेत्र में अपनी अग्रणी अनुसंधान एवं अनुप्रयोग आधारित उपलब्धियों के लिए वैश्विक स्तर पर विख्यात है। प्रथम फेज में नेशनल फेज एंट्री भारत, यूरोप, कनाडा और मैक्सिको सहित कई देशों में हो चुका है। इसका मूल उद्देश्य दवाओं और अन्य रासायनिक एजेंटों को पर्यावरण के अनुकूल, सुरक्षित और न्यूनतम लागत पर उपलब्ध कराना है। इसका आकार दश नैनोमीटर से भी कम है। इतने छोटे आकार के कारण यह दवा को खून और ज़रूरी ऊतकों तक आसानी से पहुंचा देता है और बाद में आसानी से टूटकर शरीर से बाहर निकल जाता है। यह बहुआयामी तकनीक फार्मास्यूटिकल्स, न्यूट्रास्यूटिकल्स, फूड सप्लीमेंट्स, कॉस्मेटिक्स, वैक्सीन, पशु चिकित्सा उत्पाद, कृषि उर्वरक, औद्योगिक गोंद, आग बुझाने की संरचनाएं, खाद्य पदार्थों का संरक्षण और पेय उद्योग जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उपयोगी साबित हैं। तथा सुप्रा-प्लेक्स की तकनीक से दवाएं सुरक्षित व असरदार साबित होंगी। डॉ. मयंक ने कहा एक्सिपिएंट दवाओं के निर्माण में एक आधारभूत भूमिका निभाते हैं। इनके बिना कई औषधीय उत्पाद स्थिर और प्रभावी रूप में बन ही नहीं सकते। सुप्रा-प्लेक्स जैसी नयी तकनीक दवाओं को अधिक स्थिर बनाएगी, उनकी शेल्फ-लाइफ बढ़ाएगी और मरीज़ों तक सस्ती कीमत पर पहुंचाएगी।
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टीम में ये भी वैज्ञानिक रहे शामिल

इस टीम में शामिल वैज्ञानिकों में प्रो. डॉ. डोनाल्ड टोमालिया, मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में नेतृत्व कर रहे हैं। उनके साथ डॉ. डेविड हेडस्ट्रैंड, उपाध्यक्ष (अनुसंधान एवं विकास), तथा लिंडा निक्सन, उपाध्यक्ष (ऑपरेशन्स) के रूप में लंबे समय से कार्यरत हैं। इनके साथ ही डॉ. मयंक विश्व की विभिन्न संस्थाओं के साथ जुड़कर कई क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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