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पति समेत तीन को आजीवन कारावास
Updated Sun, 27 May 2018 12:28 AM IST
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मिर्जापुर। अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश आलोक पांडेय ने बहू की हत्या के जुर्म में दोष सिद्ध पति, ससुर और सास को आजीवन कारावास की सजा सुुुनाई। साथ ही प्रत्येक को तीस-तीस हजार रुपये का अर्थदंड दिया।
अभियोजन अनुुसार हलिया थाना क्षेत्र के मझिगवां मतवार गांव निवासी वादी झुल्लू ने पुलिस को दी गई तहरीर में कहा था कि उसने अपनी पुत्री कंचन की शादी लगभग पांच वर्ष पूर्व शंकर उर्फ हरिशंकर निवासी हलिया के पिड़रिया से की थी। शंकर, उसके पिता बहादुर तथा मा सिताबी देवी दहेज में कुछ नगद रुपये और मोटरसाइकिल की मांग कर रहे थे। नहीं देने पर पुुत्री को लगातार प्रताड़ित कर रहे थे। 28 नवंबर 2015 को सुबह पांच बजे दहेज के लिए ससुरालियों ने उसकी पुत्री की मारपीट कर हत्या कर दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस ने धारा 302/34, 498 ए, 304 बी तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में दिया। अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी इस्लाम अहमद ने आठ गवाह प्रस्तुत कराए। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य और अधिवक्ताओें की दलील के आधार पर न्यायालय ने पति हरिशंकर, ससुर बहादुर, सास सिताबी को धारा 302/34 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक को 30-30 हजार रुपये के अर्थदंड दिया। वहीं अन्य धाराओं में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
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अभियोजन अनुुसार हलिया थाना क्षेत्र के मझिगवां मतवार गांव निवासी वादी झुल्लू ने पुलिस को दी गई तहरीर में कहा था कि उसने अपनी पुत्री कंचन की शादी लगभग पांच वर्ष पूर्व शंकर उर्फ हरिशंकर निवासी हलिया के पिड़रिया से की थी। शंकर, उसके पिता बहादुर तथा मा सिताबी देवी दहेज में कुछ नगद रुपये और मोटरसाइकिल की मांग कर रहे थे। नहीं देने पर पुुत्री को लगातार प्रताड़ित कर रहे थे। 28 नवंबर 2015 को सुबह पांच बजे दहेज के लिए ससुरालियों ने उसकी पुत्री की मारपीट कर हत्या कर दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस ने धारा 302/34, 498 ए, 304 बी तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में दिया। अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी इस्लाम अहमद ने आठ गवाह प्रस्तुत कराए। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य और अधिवक्ताओें की दलील के आधार पर न्यायालय ने पति हरिशंकर, ससुर बहादुर, सास सिताबी को धारा 302/34 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक को 30-30 हजार रुपये के अर्थदंड दिया। वहीं अन्य धाराओं में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
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