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नये चेयरमैन के सामने होंगी कई चुनौतियां
Updated Sat, 02 Dec 2017 12:34 AM IST
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मिर्जापुर। कई चक्र की मतगणना के बाद स्थानीय नगर पालिका अध्यक्ष पद पर जीते भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी मनोज जायसवाल की राह आसान नहीं होगी। कई वर्षों से भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में सक्रिय नये चेयरमैन के सामने शहर की कई समस्याओं के समाधान की चुनौतियां होंगी। नगर पालिका में भ्रष्टाचार को समाप्त करने से लेकर शहर में साफ सफाई और छुट्टा पशुओं से नगर को मुक्त कराने जैसे मुद्दों पर उन्हें जनमत हासिल हुआ है।
शहर में सबसे बड़ी समस्या कूड़ों के उठान की है। सालिड वेस्ट मैनेजमेंट की योजना खटाई में है। शहर का कूड़ा गंगा घाटों के इर्द-गिर्द फेंका जा रहा है। बरौधा ओवरब्रिज के पास का पूरा इलाका कूड़े से पट गया है। नगर पालिका कार्यालय में भ्रष्टाचार से निपटना नये चेयरमैन के लिए मुश्किलों भरा काम होगा। भ्रष्टाचार के चलते जिस गति से शहर का विकास होना चाहिए था वह नहीं हो सका। कई इलाकों में गर्मी के दिनों में पानी नहीं पहुंचता है इससे लोगों को पेयजल के लिए मशक्कत करना पड़ता है। कई स्थानों पर पेयजल की पाइप क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इसकी वजह से नालियों का दूषित पानी घरों में पहुंचता है। यह समस्या सबसे अधिक तरकापुर मोहल्ले में है। सफाईकर्मी जिन ट्रालियों पर कूड़ा ढोते हैं उनमें न तो ब्रेक होती है और न ही सीट, पैंडल आदि की बात तो दूर है। ये ट्रालियां इस प्रकार की हैँ जब तक उन्हें पीछे से न धकेला जाय तब तक नहीं चलती हैं। शहर में छुट्टा पशुओं का आतंक अलग है। हर चौराहे पर सांड़ घूमते मिलते हैं। ये सांड कई लोगों को अपने नुकीले सींगों से घायल भी कर चुके हैं लेकिन नवरात्र को छोड़ कर शेष मौकों पर इन पर अंकुश लगाने का कोई प्रयास नहीं किया जाता है।
शहर में सबसे बड़ी समस्या कूड़ों के उठान की है। सालिड वेस्ट मैनेजमेंट की योजना खटाई में है। शहर का कूड़ा गंगा घाटों के इर्द-गिर्द फेंका जा रहा है। बरौधा ओवरब्रिज के पास का पूरा इलाका कूड़े से पट गया है। नगर पालिका कार्यालय में भ्रष्टाचार से निपटना नये चेयरमैन के लिए मुश्किलों भरा काम होगा। भ्रष्टाचार के चलते जिस गति से शहर का विकास होना चाहिए था वह नहीं हो सका। कई इलाकों में गर्मी के दिनों में पानी नहीं पहुंचता है इससे लोगों को पेयजल के लिए मशक्कत करना पड़ता है। कई स्थानों पर पेयजल की पाइप क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इसकी वजह से नालियों का दूषित पानी घरों में पहुंचता है। यह समस्या सबसे अधिक तरकापुर मोहल्ले में है। सफाईकर्मी जिन ट्रालियों पर कूड़ा ढोते हैं उनमें न तो ब्रेक होती है और न ही सीट, पैंडल आदि की बात तो दूर है। ये ट्रालियां इस प्रकार की हैँ जब तक उन्हें पीछे से न धकेला जाय तब तक नहीं चलती हैं। शहर में छुट्टा पशुओं का आतंक अलग है। हर चौराहे पर सांड़ घूमते मिलते हैं। ये सांड कई लोगों को अपने नुकीले सींगों से घायल भी कर चुके हैं लेकिन नवरात्र को छोड़ कर शेष मौकों पर इन पर अंकुश लगाने का कोई प्रयास नहीं किया जाता है।
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