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स्वास्थ मंत्री के संसदीय क्षेत्र के सरकारी अस्पताल की खुली पोल
Updated Tue, 10 Jul 2018 11:24 PM IST
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अहरौरा। क्षेत्र के हनुमान घाटी के पास बने फ्लाईओवर पर सोमवार की रात हुई बस दुर्घटना में मृतकों की संख्या बढ़ कर आठ हो गई है। हादसे में गंभीर रूप से घायल 37 लोगों में से 15 की स्थिति नाजुक है।
वाराणसी से 45 यात्रियों को लेकर सोनभद्र जाते समय रोडवेज की एक अनुबंधित बस सोमवार की रात अहरौरा के हनुमान घाटी के पास फ्लाईओवर पर खड़े ट्रक से टकरा गई थी। इसमें छह लोगों की सोमवार को ही मौत हो गई थी जबकि दो यात्रियों विष्णु और इमरान ने वाराणसी के ट्रामा सेंटर में इलाज के दौैरान मंगलवार की सुबह तोड़ दिया। हादसे में किसी का हाथ कटकर अलग हो गया तो कोई अपना दोनों पैर गंवा बैठा। सोमवार की रात हादसे में मरने वालों का नाम कोई बता ही नहीं पा रहा था लेकिन मंगलवार की सुबह परिजनों के आने के बाद मृतकों के नाम की पुष्टि हो पाई। पुलिस के अनुसार मृतकों में शमीम अहमद (35) पुत्र लाल मोहम्मद, इमरान (23) पुत्र अली मोहम्मद निवासी सुकृत सोनभद्र ,विवेक श्रीवास्तव (32) पुत्र हीरालाल श्रीवास्तव निवासी कल्याणपुर प्रतापगढ़ (सोनभद्र के जिला परिवार नियोजन अधिकारी थे), हिमांशु (22) पुत्र आनंद पांडे निवासी मद्धूपूर सोनभद्र, राजू सिंह (37) श्रीनाथ निवासी शादी बनकट देहात कोतवाली, विष्णु शर्मा (32) और इनकी पत्नी हेमा शर्मा (31) निवासी पिथरौरागढ़ चमौली उत्तराखंड के अलावा सद्दाम (30) पुत्र शौकत अली निवासी नई बस्ती सोनभद्र के निवासी थे। इनमें विष्णु ,इमरान और हिमांशु की मौत ट्रामा सेंटर में हुई थी। वही 15 अन्य घायल ट्रामा सेंटर में भर्ती हैं जिनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। पुलिस ने सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर मृतकों के परिजनों की भीड़ जुटी रही। हृदय विदारक घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा था। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर बस और ट्रक को कब्जे में ले लिया है।
मौके पर नहीं पहुंचा कोई जनप्रतिनिधि: अहरौरा। क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भले ही विभिन्न मौकों पर आम जनता के हित की बात करते हों लेकिन इस बड़े हादसे के बाद मौके पर कोई जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचा। वहीं सीएचसी में अपेक्षित चिकित्सा की व्यवस्था नहीं होने और घायलों को समय से रेफर नहीं किए जाने से कई की हालत काफी गंभीर हो गई। बीस से ज्यादा लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी के बाद भी सीएचसी पर उनके इलाज के लिए अतिरिक्त व्यवस्था नहीं की गई। घटना के चार घंटे के बाद भी सभी घायलों को वाराणसी के लिए रेफर नहीं किया जा सका था जिससे अस्पताल प्रशासन की लापरवाही उजागर हुई। एसडीएम चुनार के हस्तक्षेप के बाद किसी तरह घायलों को रिफर किया जा सका। 60 बेड की सीएचसी होने के बाद भी सीएचसी में ना ही डाक्टर मौजूद रहते हैं और ना ही चिकित्सकीय सुविधा ही मिल पाती है। एंबुलेंस व अन्य वाहनों से दुर्घटनाग्रस्त बस में फंसे लोगों को बाहर निकाल कर सीएचसी पहुंचा दिया गया लेकिन सीएचसी में पर्याप्त दवा व चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध नहीं होने से घायल के परिजन बेबस नजर आ रहे थे।
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वाराणसी से 45 यात्रियों को लेकर सोनभद्र जाते समय रोडवेज की एक अनुबंधित बस सोमवार की रात अहरौरा के हनुमान घाटी के पास फ्लाईओवर पर खड़े ट्रक से टकरा गई थी। इसमें छह लोगों की सोमवार को ही मौत हो गई थी जबकि दो यात्रियों विष्णु और इमरान ने वाराणसी के ट्रामा सेंटर में इलाज के दौैरान मंगलवार की सुबह तोड़ दिया। हादसे में किसी का हाथ कटकर अलग हो गया तो कोई अपना दोनों पैर गंवा बैठा। सोमवार की रात हादसे में मरने वालों का नाम कोई बता ही नहीं पा रहा था लेकिन मंगलवार की सुबह परिजनों के आने के बाद मृतकों के नाम की पुष्टि हो पाई। पुलिस के अनुसार मृतकों में शमीम अहमद (35) पुत्र लाल मोहम्मद, इमरान (23) पुत्र अली मोहम्मद निवासी सुकृत सोनभद्र ,विवेक श्रीवास्तव (32) पुत्र हीरालाल श्रीवास्तव निवासी कल्याणपुर प्रतापगढ़ (सोनभद्र के जिला परिवार नियोजन अधिकारी थे), हिमांशु (22) पुत्र आनंद पांडे निवासी मद्धूपूर सोनभद्र, राजू सिंह (37) श्रीनाथ निवासी शादी बनकट देहात कोतवाली, विष्णु शर्मा (32) और इनकी पत्नी हेमा शर्मा (31) निवासी पिथरौरागढ़ चमौली उत्तराखंड के अलावा सद्दाम (30) पुत्र शौकत अली निवासी नई बस्ती सोनभद्र के निवासी थे। इनमें विष्णु ,इमरान और हिमांशु की मौत ट्रामा सेंटर में हुई थी। वही 15 अन्य घायल ट्रामा सेंटर में भर्ती हैं जिनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। पुलिस ने सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर मृतकों के परिजनों की भीड़ जुटी रही। हृदय विदारक घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा था। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर बस और ट्रक को कब्जे में ले लिया है।
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मौके पर नहीं पहुंचा कोई जनप्रतिनिधि: अहरौरा। क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भले ही विभिन्न मौकों पर आम जनता के हित की बात करते हों लेकिन इस बड़े हादसे के बाद मौके पर कोई जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचा। वहीं सीएचसी में अपेक्षित चिकित्सा की व्यवस्था नहीं होने और घायलों को समय से रेफर नहीं किए जाने से कई की हालत काफी गंभीर हो गई। बीस से ज्यादा लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी के बाद भी सीएचसी पर उनके इलाज के लिए अतिरिक्त व्यवस्था नहीं की गई। घटना के चार घंटे के बाद भी सभी घायलों को वाराणसी के लिए रेफर नहीं किया जा सका था जिससे अस्पताल प्रशासन की लापरवाही उजागर हुई। एसडीएम चुनार के हस्तक्षेप के बाद किसी तरह घायलों को रिफर किया जा सका। 60 बेड की सीएचसी होने के बाद भी सीएचसी में ना ही डाक्टर मौजूद रहते हैं और ना ही चिकित्सकीय सुविधा ही मिल पाती है। एंबुलेंस व अन्य वाहनों से दुर्घटनाग्रस्त बस में फंसे लोगों को बाहर निकाल कर सीएचसी पहुंचा दिया गया लेकिन सीएचसी में पर्याप्त दवा व चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध नहीं होने से घायल के परिजन बेबस नजर आ रहे थे।
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