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Mirzapur News: वीआईपी नंबर के लिए 1500 लाेगों ने 84 लाख खर्च किए
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लोगों को सिर्फ महंगी गाड़ियां खरीदने का ही नहीं गाड़ी पर वीआईपी नंबर लगाने का भी शाैक है। जितनी महंगी गाड़ी है उसका नंबर भी उतना महंगा है।
जिले में एक साल में 1500 लाेगों नें वीआईपी नंबर लेने के लिए 84 लाख रुपये खर्च कर दिए। इसमें 14 वाहन स्वामी ऐसे हैं जो एक लाख रुपये चुकाकर वीआईपी नंबर हासिल किए हैं।
बाहुबली, उद्योगपति, नेता हो या अन्य रसृखदार इनकी वाहनो के काफिले में शामिल नंबर से भी इनकी पहचान होती है। लोग एक ही अंक वाले वाहन नंबर का उपयोग करते है। पूरे काफिले में एक ही नंबर का वाहन होता है। गाड़ियों पर वीआईपी नंबर लगाकर चलने में लोग अपना रूतबा समझते है।
उदयवीर सिंह, आरटीओ प्रशासन ने बताया कि वीआईपी नंबर इतनी आसानी से नहीं मिलता है। वीआईपी नंबर को बुक कराने के लिए परिवहन विभाग में आवेदन करना होता है। इसके लिए फीस तय होती है। जैसा नंबर होता है। वैसी फीस निर्धारित रहती है।
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अतिआकर्षक नंबर पाने पर कार के लिए एक लाख तो बाइक के लिए 20 हजार रुपये चुकाने पड़ते हैं। जिस नंबर पर कार के लिए 50 हजार फीस है, उस पर बाइक के लिए 10 हजार चुकता करना होता है। जिले में 2025 में 1500 लोगों ने वीआईपी नंबर के लिए 84 लाख रुपये खर्च किए।
इसमें 14 लोगाें ने वीआईपी नंबर के लिए एक लाख रुपये खर्च किए। 50 हजार देकर वीआईपी नंबर लेने वाले 13 लोग है। इसके अलावा 25 हजार, 20 हजार, 15 और 10 हजार खर्च कर कर नंबर लिए हैं।
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जिले में एक साल में 1500 लाेगों नें वीआईपी नंबर लेने के लिए 84 लाख रुपये खर्च कर दिए। इसमें 14 वाहन स्वामी ऐसे हैं जो एक लाख रुपये चुकाकर वीआईपी नंबर हासिल किए हैं।
बाहुबली, उद्योगपति, नेता हो या अन्य रसृखदार इनकी वाहनो के काफिले में शामिल नंबर से भी इनकी पहचान होती है। लोग एक ही अंक वाले वाहन नंबर का उपयोग करते है। पूरे काफिले में एक ही नंबर का वाहन होता है। गाड़ियों पर वीआईपी नंबर लगाकर चलने में लोग अपना रूतबा समझते है।
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उदयवीर सिंह, आरटीओ प्रशासन ने बताया कि वीआईपी नंबर इतनी आसानी से नहीं मिलता है। वीआईपी नंबर को बुक कराने के लिए परिवहन विभाग में आवेदन करना होता है। इसके लिए फीस तय होती है। जैसा नंबर होता है। वैसी फीस निर्धारित रहती है।
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अतिआकर्षक नंबर पाने पर कार के लिए एक लाख तो बाइक के लिए 20 हजार रुपये चुकाने पड़ते हैं। जिस नंबर पर कार के लिए 50 हजार फीस है, उस पर बाइक के लिए 10 हजार चुकता करना होता है। जिले में 2025 में 1500 लोगों ने वीआईपी नंबर के लिए 84 लाख रुपये खर्च किए।
इसमें 14 लोगाें ने वीआईपी नंबर के लिए एक लाख रुपये खर्च किए। 50 हजार देकर वीआईपी नंबर लेने वाले 13 लोग है। इसके अलावा 25 हजार, 20 हजार, 15 और 10 हजार खर्च कर कर नंबर लिए हैं।