{"_id":"5b6739df4f1c1bed5e8b7522","slug":"101533491679-mirzapur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ुनार पुल बनकर तैयार लेकिन मुआवजे के लिए आज भी भटक रहे किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ुनार पुल बनकर तैयार लेकिन मुआवजे के लिए आज भी भटक रहे किसान
Updated Sun, 05 Aug 2018 11:36 PM IST
विज्ञापन
मिर्जापुर। चुनार स्थित पक्का पुल पर दोपहिया एवं चारपहिया वाहनों का आवागमन चालू होने से लोगों को सहूलियत हुई है लेकिन पुल निर्माण के लिए अपनी जमीन देने वाले किसानों को अबी तक मुआवजा नहीं मिला है। दस वर्षों में यह पुल तैयार हुआ और बीते माह 15 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इसका लोकार्पण किया था। पुल के लिए अपनी जमीन देने वाले किसान मुआवजा के लिए दफ्तरों का चक्कर काट रहे हैं। इससे संबधित फाइलें एक से दूसरे विभाग में भेजे जाने का सिलसिला जारी है। चुनार के मेड़िया गांव के रहने वाले दो किसानों ने रविवार को जिलाधिकारी अनुराग पटेल से मिलकर मुआवजा दिलाने की मांग की।
चुनार तहसील क्षेत्र के मेड़िया गांव निवासी सौरभ कुमार सिंह और समीर सिंह की लगभग 13 बिस्वा जमीन चुनार में पक्का पुल के निर्माण के लिए ली गई है। गाटा संख्या 533, रकबा 0.164 हेक्टेयर जमीन के मुआवजे के संबंध में लोक निर्माण निगम खंड दो और तहसील चुनार से लगातार पत्राचार होता रहा। दोनों किसानों का कहना है कि चार साल तो प्रशासन मानने के लिए तैयार ही नहीं था कि पुल निर्माण में उनकी जमीन ली गई है। सेतु निगम और लोक निर्माण ने दोनों किसानों को लिखित रूप में दिया कि उनकी जमीन नहीं ली गई है। किसानों का कहना है कि बिना उन्हें सूचित किए हुए जमीन ले ली गई। 2014 में जमीन के कागजात दिखाने के बाद प्रशासन ने माना कि सौरभ और समीर सिंह की 13 बिस्वा जमीन ली गई है। अब इसके बाद मुआवजे के निर्धारण की प्रक्रिया शुरू हुई। तय किया गया कि सड़क से सौ मीटर के दायरे में जिन किसानों की जमीन आई है उन्हें को सात लाख रुपये प्रति बिस्वा की दर से मुआवजा दिया जाएगा। सौ मीटर के बाहर वालों के लिए अलग रेट रखा गया। 13 बिस्वे का डेढ़ लाख रुपये दिया जा रहा था जिसका किसानों ने विरोध किया। बाद में करीब एक लाख रुपये बिस्वा के हिसाब से मुआवजा देने की बात कही। 13 लाख बिस्वे का 14 लाख रुपये 75 हजार रुपये मुआवजा तय किया गया। जिन्हें ज्यादा मुआवजा मिलना था उन्हें दे दिया लेकिन सौ मीटर से दूर वाले किसान परेशान होते रहे। किसानों का कहना है कि दस साल बीत चुके हैं। किसानों ने जिलाधिकारी से जल्द मुआवजा दिलाने की मांग की है।
जिलाधिकारी अनुराग पटेल ने कहा कि मुआवजे की फाइल क्यों लंबित पड़ी है, इसका पता कराया जाएगा। मामले के निस्तारण के लिए एसडीएम चुनार को निर्देशित किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
चुनार तहसील क्षेत्र के मेड़िया गांव निवासी सौरभ कुमार सिंह और समीर सिंह की लगभग 13 बिस्वा जमीन चुनार में पक्का पुल के निर्माण के लिए ली गई है। गाटा संख्या 533, रकबा 0.164 हेक्टेयर जमीन के मुआवजे के संबंध में लोक निर्माण निगम खंड दो और तहसील चुनार से लगातार पत्राचार होता रहा। दोनों किसानों का कहना है कि चार साल तो प्रशासन मानने के लिए तैयार ही नहीं था कि पुल निर्माण में उनकी जमीन ली गई है। सेतु निगम और लोक निर्माण ने दोनों किसानों को लिखित रूप में दिया कि उनकी जमीन नहीं ली गई है। किसानों का कहना है कि बिना उन्हें सूचित किए हुए जमीन ले ली गई। 2014 में जमीन के कागजात दिखाने के बाद प्रशासन ने माना कि सौरभ और समीर सिंह की 13 बिस्वा जमीन ली गई है। अब इसके बाद मुआवजे के निर्धारण की प्रक्रिया शुरू हुई। तय किया गया कि सड़क से सौ मीटर के दायरे में जिन किसानों की जमीन आई है उन्हें को सात लाख रुपये प्रति बिस्वा की दर से मुआवजा दिया जाएगा। सौ मीटर के बाहर वालों के लिए अलग रेट रखा गया। 13 बिस्वे का डेढ़ लाख रुपये दिया जा रहा था जिसका किसानों ने विरोध किया। बाद में करीब एक लाख रुपये बिस्वा के हिसाब से मुआवजा देने की बात कही। 13 लाख बिस्वे का 14 लाख रुपये 75 हजार रुपये मुआवजा तय किया गया। जिन्हें ज्यादा मुआवजा मिलना था उन्हें दे दिया लेकिन सौ मीटर से दूर वाले किसान परेशान होते रहे। किसानों का कहना है कि दस साल बीत चुके हैं। किसानों ने जिलाधिकारी से जल्द मुआवजा दिलाने की मांग की है।
विज्ञापन
जिलाधिकारी अनुराग पटेल ने कहा कि मुआवजे की फाइल क्यों लंबित पड़ी है, इसका पता कराया जाएगा। मामले के निस्तारण के लिए एसडीएम चुनार को निर्देशित किया गया है।
विज्ञापन