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मॉडरेशन फिर रहेगा खास, कम अंक वाले भी होंगे पास
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मॉडरेशन फिर रहेगा खास, कम अंक वाले भी होंगे पास
मेरठ। यूपी बोर्ड में इस बार भी पिछले सालों की ही तरह मॉडरेशन खास रहेगा। कयास है कि इस बार अंक नीति के कारण कम नंबर पाने वालों के भी बेहतर अंक आएंगे। यूपी बोर्ड में फिर से ‘मॉडरेशन व्यवस्था’ लागू होना बताया जा रहा है। हालांकि मॉडरेशन कितने अंक का रहेगा, यह स्पष्ट नहीं है।
पिछले तीन सालों से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के रिजल्ट प्रतिशत को लेकर हैरानी जताई गई थी। बाद में साफ हुआ कि इसे ‘मॉडरेशन नीति’ के तहत तैयार किया गया है। नकल पर नकेल है। इस कारण उत्तर पुस्तिकाएं खाली भी मिल रही थीं, लेकिन हो इससे एकदम उलट रहा है। मेरठ का रिजल्ट प्रतिशत घटने की बजाय बढ़ रहा है। इस बार भी मॉडरेशन के खास रहने का कयास लगाया जा रहा है। इस संबंध में यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय सचिव राणा सहस्त्रांशु सिंह सुमन का कहना है कि नकल रोकने के लिए सख्ती की गई है। जहां तक रिजल्ट की बात है तो वह प्रयागराज से जारी होता है।
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यह है मॉडरेशन
मॉडरेशन के तहत 10वीं-12वीं की परीक्षा कराने वाले बोर्ड सभी विद्यार्थियों को विषय विशेष में अतिरिक्त अंक देते हैं। उदाहरण अगर 12वीं में विद्यार्थी को चार विषयों में तो बहुत अच्छे अंक मिले हैं, लेकिन किसी एक विषय में औसत से भी कम अंक हैं। ऐसी स्थिति में बोर्ड के जिम्मेदार एक फार्मूले को आधार मानते हुए उस विषय में सभी छात्रों को एक, दो, तीन या अधिकतम आठ अंक तक अतिरिक्त दे सकते हैं। अतिरिक्त अंक एक, दो या तीन विषयों में दिए जा सकते हैं। गौरतलब है कि सीबीएससी-सीआईएससीई ने मॉडरेशन पॉलिसी खत्म कर दी है। सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड के छात्र-छात्राओं की तुलना में यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों के अंक 10वीं-12वीं की परीक्षा में कम होने के कारण 2011 में मॉडरेशन नीति लागू की गई थी।
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पांच साल के रिजल्ट का ब्योरा
वर्ष रिजल्ट प्रतिशत
2020 हाईस्कूल- 92.39, इंटरमीडिएट- 88.80
2019 हाईस्कूल- 90.39, इंटरमीडिएट- 75.59
2018 हाईस्कूल- 86.20, इंटरमीडिएट- 83.39 प्रतिशत
2017 हाईस्कूल- 82.06, इंटरमीडिएट- 83.35 प्रतिशत
2016 हाईस्कूल- 87.50, इंटरमीडिएट- 88.45 प्रतिशत
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मेरठ। यूपी बोर्ड में इस बार भी पिछले सालों की ही तरह मॉडरेशन खास रहेगा। कयास है कि इस बार अंक नीति के कारण कम नंबर पाने वालों के भी बेहतर अंक आएंगे। यूपी बोर्ड में फिर से ‘मॉडरेशन व्यवस्था’ लागू होना बताया जा रहा है। हालांकि मॉडरेशन कितने अंक का रहेगा, यह स्पष्ट नहीं है।
पिछले तीन सालों से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के रिजल्ट प्रतिशत को लेकर हैरानी जताई गई थी। बाद में साफ हुआ कि इसे ‘मॉडरेशन नीति’ के तहत तैयार किया गया है। नकल पर नकेल है। इस कारण उत्तर पुस्तिकाएं खाली भी मिल रही थीं, लेकिन हो इससे एकदम उलट रहा है। मेरठ का रिजल्ट प्रतिशत घटने की बजाय बढ़ रहा है। इस बार भी मॉडरेशन के खास रहने का कयास लगाया जा रहा है। इस संबंध में यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय सचिव राणा सहस्त्रांशु सिंह सुमन का कहना है कि नकल रोकने के लिए सख्ती की गई है। जहां तक रिजल्ट की बात है तो वह प्रयागराज से जारी होता है।
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यह है मॉडरेशन
मॉडरेशन के तहत 10वीं-12वीं की परीक्षा कराने वाले बोर्ड सभी विद्यार्थियों को विषय विशेष में अतिरिक्त अंक देते हैं। उदाहरण अगर 12वीं में विद्यार्थी को चार विषयों में तो बहुत अच्छे अंक मिले हैं, लेकिन किसी एक विषय में औसत से भी कम अंक हैं। ऐसी स्थिति में बोर्ड के जिम्मेदार एक फार्मूले को आधार मानते हुए उस विषय में सभी छात्रों को एक, दो, तीन या अधिकतम आठ अंक तक अतिरिक्त दे सकते हैं। अतिरिक्त अंक एक, दो या तीन विषयों में दिए जा सकते हैं। गौरतलब है कि सीबीएससी-सीआईएससीई ने मॉडरेशन पॉलिसी खत्म कर दी है। सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड के छात्र-छात्राओं की तुलना में यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों के अंक 10वीं-12वीं की परीक्षा में कम होने के कारण 2011 में मॉडरेशन नीति लागू की गई थी।
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पांच साल के रिजल्ट का ब्योरा
वर्ष रिजल्ट प्रतिशत
2020 हाईस्कूल- 92.39, इंटरमीडिएट- 88.80
2019 हाईस्कूल- 90.39, इंटरमीडिएट- 75.59
2018 हाईस्कूल- 86.20, इंटरमीडिएट- 83.39 प्रतिशत
2017 हाईस्कूल- 82.06, इंटरमीडिएट- 83.35 प्रतिशत
2016 हाईस्कूल- 87.50, इंटरमीडिएट- 88.45 प्रतिशत