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अनुशासन के कदमों से एकता का प्रदर्शन

Sat, 25 Jan 2020 02:36 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jan 2020 02:36 AM IST
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Unity demonstrated through the steps of discipline
अनुशासन के कदमों से एकता का प्रदर्शन
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मेरठ। 26 जनवरी नजदीक आ रही है, गणतंत्र दिवस की तैयारियां भी जोरों पर है। पुलिस लाइन के परेड ग्राउंड पर पुलिस की आठ टोलियां कदम से कदम मिलाकर न सिर्फ अनुशासन की सीख दे रही हैं, बल्कि उस संस्कृति का प्रदर्शन किया जा रहा है जो सदियों से चला आ रहा है। इसके लिए शुक्रवार को पुलिस लाइन में फुल ड्रेस रिहर्सल किया गया।
परेड में प्रथम कमांडर की अगुवाई सीओ दिनेश शुक्ला कर रहे हैं, सीओ पंकज सिंह द्वतीय कमांडर, एसआई तौफीक खान तृतीय कमांडर की भूमिका में हैं। परेड में पुलिस की आठ टोलियां बनाई गई हैं, जिनमें एसआई, ट्रैफिक पुलिस, महिला पुलिस और होमगार्ड की टोली शामिल हैं। पुलिस लाइन के आरआई होरीलाल सिंह परेड का अभ्यास कराते हुए बताते हैं कि परेड में अपना बेहतर प्रदर्शन दिखाना होता है। अलग अलग वेशभूषा संगठित ढंग से चलने का अनुशासन, संगीत और संस्कृति को दिखाने वाली झांकियां आकर्षण होती हैं। परेड में पुलिस के घोड़ों को शामिल नहीं किया, लेकिन डॉग स्क्वाएड, फैंटम पुलिस, ट्रैफिक एंजिल, यूपी 112, वज्र वाहन, वाटर कैनन, फायर ब्रिगेड, रेडियो वायरलेस टीम और पुलिस विभाग में सबसे पुराना शस्त्र थ्री नॉट थ्री लेकर चलते जवान परेड को चार चांद और लगा देते हैं।
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एक साथ पड़ती है जवानों के बूटों की थाप
प्रथम परेड कमांडर दिनेश शुक्ला बताते हैं कि अनुशासन ही दूसरों को आक र्षित करता है। विश्राम की अवस्था में दोनों एड़ियों के बीच में 12 इंच का फासला होना जरूरी है, दोनों पैर ढीले छोड़ दिए जाते हैं। दोनों हाथ पीछे बंधे हुए होते हैं। लेकिन जैसे ही कमांडर से सावधान की कमांड मिलती है तो सीना सतर्क हो जाता है। घुटने को 90 डिग्री कोण पर उठाकर एक साथ सभी जवानों की बूटों की थाप पड़ती है तो अलग ही आवाज निकलती है।
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यह मौका यादगार होता है
बचपन से ही वर्दी पहनने की चाहत थी। वर्दी पहनकर परेड में शामिल होना बड़े गर्व की बात होती है। यह मौका यादगार बन जाता है। - कामिनी
कड़ी मेहनत और अभ्यास से अनुशासन बनता है। इसमें लगातार प्रयास की जरुरत होती है। पुलिस की परेड छात्रों में भी जोश भरती है। - मोनिका
पहली बार परेड का मौका मिला है। इसमें मेहनत करनी पड़ती है लेकिन बाद में अच्छा लगता है। हर कदम पर शान के साथ जमीन पर पड़ता है।- गुड्डन
बेटियां भी आज कम नहीं है। हर कम में बढ़ चढ़कर भाग ले रही हैं। पुलिस विभाग में महिलाएं भी दूसरों को सीख दे रही हैं। - मीनू
महिला जितनी सशक्त होंगी समाज उतना आगे बढ़ेगा। महिला पुलिसकर्मी भी आज किसी भी मामले में पीछे नहीं हैं। - कविता
परेड के समय अलग अलग टोली के बीच में जो अंतर रहता है। परेड खत्म होने तक उस अंतर को बराबर बनाए रखना ही परेड का महत्व दर्शाता है। - शिल्पी
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