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Meerut News: जो चाहते हो कि रोशन हो नाम दुनिया में असात ताजिम जरूरी है...
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सरूरपुर। कस्बा हर्रा में शायरी सुनती शायरा सुल्तान जहां पूरनपुरी। संवाद
नगर पंचायत हर्रा के स्थापना दिवस पर ऑल इंडिया मुशायरा व कवि सम्मेलन का आयोजन
सरूरपुर। नगर पंचायत हर्रा के नौवें स्थापना दिवस पर शुक्रवार को पंचायत परिसर में साहित्य और संस्कृति की महक बिखेरते हुए ऑल इंडिया मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दूरदराज से आए नामचीन शायरों और कवियों ने अपनी प्रस्तुतियों से लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। शायरों ने गजल, नज्म और शेरो शायरी पेश कर खूब दाद बटोरी। कवियों ने अपनी ओजपूर्ण कविताओं और हास्य-व्यंग्य से दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
शायरा चांदनी शबनम ने पढ़ा- जो चाहते हो कि रोशन हो नाम दुनिया में असात ताजिम जरूरी है।
कवयित्री खुशबू शर्मा ने पढ़ा कि सोनू चांदी के गहने भी नहीं देखती मैं, इस कदर कीमती कपड़े भी नहीं देखती मैं, और अपने मां-बाप की आंखों से उड़ा दूं नींदें, इतने उलझे हुए सपने नहीं देखती मैं। शायरा सुल्तान जहां ने पढ़ा मेरे मुनसिफ मेरे रहबर तू अब तो फैसला कर दे। खितबे बेवफा दे दे या साबित बेवफा कर दे।
पापुलर मेरठी ने पढ़ा कि अपनी शोहरत की अलग राह निकाली हमने किसी दीवां से गजल कोई चुरा ली हमने। कार्यक्रम में गंगा-जमुनी तहजीब और भाईचारे का संदेश प्रमुखता से झलका।
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कवियों ने देशभक्ति और समसामयिक मुद्दों पर अपनी धारदार कविताएं सुनाकर दर्शकों का उत्साह बढ़ाया। स्थापना दिवस के अवसर पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी और देर रात तक शायरी व कविताओं का आनंद लिया। इस दौरान हर्रा चेयरमैन कुंवर मोहम्मद अली, सरधना चेयरपर्सन प्रतिनिधि शाहवेज अंसारी, करनवाल चेयरमैन लोकेंद्र कुमार, खिवाई चेयरमैन पति शमीम, अधिशासी अधिकारी नीति गुप्ता, अजीम, अशजद फानी, सभासद रिहान, शुभम सोम, नबी शेर, मोहम्मद ताहिर, मोहम्मद इरशाद, कामिल, मोहम्मद चौहान, हाजी सुल्तान, नफीस, मोहम्मद अली, ठेकेदार तमसीर चौहान मौजूद रहे।
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सरूरपुर। नगर पंचायत हर्रा के नौवें स्थापना दिवस पर शुक्रवार को पंचायत परिसर में साहित्य और संस्कृति की महक बिखेरते हुए ऑल इंडिया मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दूरदराज से आए नामचीन शायरों और कवियों ने अपनी प्रस्तुतियों से लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। शायरों ने गजल, नज्म और शेरो शायरी पेश कर खूब दाद बटोरी। कवियों ने अपनी ओजपूर्ण कविताओं और हास्य-व्यंग्य से दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
शायरा चांदनी शबनम ने पढ़ा- जो चाहते हो कि रोशन हो नाम दुनिया में असात ताजिम जरूरी है।
कवयित्री खुशबू शर्मा ने पढ़ा कि सोनू चांदी के गहने भी नहीं देखती मैं, इस कदर कीमती कपड़े भी नहीं देखती मैं, और अपने मां-बाप की आंखों से उड़ा दूं नींदें, इतने उलझे हुए सपने नहीं देखती मैं। शायरा सुल्तान जहां ने पढ़ा मेरे मुनसिफ मेरे रहबर तू अब तो फैसला कर दे। खितबे बेवफा दे दे या साबित बेवफा कर दे।
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पापुलर मेरठी ने पढ़ा कि अपनी शोहरत की अलग राह निकाली हमने किसी दीवां से गजल कोई चुरा ली हमने। कार्यक्रम में गंगा-जमुनी तहजीब और भाईचारे का संदेश प्रमुखता से झलका।
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कवियों ने देशभक्ति और समसामयिक मुद्दों पर अपनी धारदार कविताएं सुनाकर दर्शकों का उत्साह बढ़ाया। स्थापना दिवस के अवसर पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी और देर रात तक शायरी व कविताओं का आनंद लिया। इस दौरान हर्रा चेयरमैन कुंवर मोहम्मद अली, सरधना चेयरपर्सन प्रतिनिधि शाहवेज अंसारी, करनवाल चेयरमैन लोकेंद्र कुमार, खिवाई चेयरमैन पति शमीम, अधिशासी अधिकारी नीति गुप्ता, अजीम, अशजद फानी, सभासद रिहान, शुभम सोम, नबी शेर, मोहम्मद ताहिर, मोहम्मद इरशाद, कामिल, मोहम्मद चौहान, हाजी सुल्तान, नफीस, मोहम्मद अली, ठेकेदार तमसीर चौहान मौजूद रहे।