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सूती कपड़ा बताएगा मिट्टी की सेहत?: स्विट्जरलैंड में हजारों जगहों पर हुआ अनोखा प्रयोग, चौंकाने वाली रिपोर्ट
Tue, 15 Sep 2026 04:51 PM IST
राहुल कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, ज्यूरिख
अमर उजाला नेटवर्क, ज्यूरिख
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 15 Sep 2026 04:51 PM IST
सार
मिट्टी में सूती कपड़ा दबाकर किसान अपने खेत की सेहत का आसान अंदाजा लगा सकते हैं। स्विट्जरलैंड में हजारों जगहों पर किए गए एक अनोखे प्रयोग में खेतों की मिट्टी में सूती कपड़े दबाए गए। कुछ समय बाद कपड़े की हालत देखकर मिट्टी में मौजूद जैविक गतिविधि का आकलन किया गया। जिस मिट्टी में कपड़ा तेजी से गल गया, वहां जैविक गतिविधि अधिक पाई गई, जबकि कपड़ा धीरे गलने पर मिट्टी में जैविक गतिविधि कम होने के संकेत मिले।
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मिट्टी की सेहत।
- फोटो : एआई से निर्मित तस्वीर।
विस्तार
खेत की मिट्टी की सेहत का अंदाजा लगाने के लिए किसान आमतौर पर फसल की बढ़वार, रंग, नमी और उत्पादन को देखते हैं। लेकिन जमीन के अंदर सूक्ष्मजीव और दूसरे जीव कितने सक्रिय हैं, यह आसानी से दिखाई नहीं देता। स्विट्जरलैंड में वैज्ञानिकों ने इसका एक सरल संकेत तलाशने के लिए मिट्टी में सूती कपड़े दबाए। करीब दो महीने बाद कपड़े निकालकर देखा गया कि वे कितने गल चुके हैं। जिस मिट्टी में कपड़ा तेजी से टूटा, वहां जैविक गतिविधि भी अधिक पाई गई। इस प्रयोग से मिट्टी के अंदर की ‘जिंदगी’ को समझने का एक आसान तरीका सामने आया है।
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सूती कपड़ा प्राकृतिक रेशे से बना होता है। मिट्टी में मौजूद जीवाणु, फंगस, केंचुए और दूसरे जीव जैविक पदार्थों को तोड़ने का काम करते हैं। इसलिए इन जीवों की गतिविधि ज्यादा होने पर मिट्टी में दबा सूती कपड़ा भी अपेक्षाकृत तेजी से टूटने लगता है।इसके उलट अगर कपड़ा दो महीने बाद भी काफी हद तक अपनी स्थिति में बना रहता है तो यह मिट्टी में जैविक गतिविधि कम होने का संकेत हो सकता है। यानी कपड़ा मिट्टी के अंदर मौजूद जीवों की सक्रियता को देखने का एक आसान ‘सूचक’ बन सकता है।
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1,000 जगहों पर दबाए गए 2,000 से ज्यादा जोड़ी कपड़े
प्लांट्स, पीपल, प्लैनेट पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक यह प्रयोग 2021 में ज्यूरिख विश्वविद्यालय और स्विट्जरलैंड के कृषि अनुसंधान केंद्र एग्रोस्कोप ने शुरू किया था। ‘प्रूफ बाय अंडरपैंट्स’ नाम की इस परियोजना में करीब 1,000 आम लोगों ने हिस्सा लिया।
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प्रतिभागियों ने स्विट्जरलैंड की लगभग 1,000 जगहों पर 2,000 से अधिक जोड़ी सूती कपड़े जमीन में दबाए। इसके अलावा करीब 12,000 टी बैग भी मिट्टी में दबाए गए। लगभग दो महीने बाद कपड़ों और टी बैग को जमीन से निकालकर उनकी तस्वीरें ली गईं और मिट्टी के नमूने वैज्ञानिकों को भेजे गए। इस तरह शोधकर्ताओं को देश के अलग-अलग हिस्सों और अलग-अलग प्रकार की जमीन की जैविक गतिविधि की तुलना करने का मौका मिला।
बगीचे की मिट्टी सबसे ज्यादा सक्रिय मिली
अध्ययन में निजी बगीचों की मिट्टी में सूती कपड़े सबसे तेजी से गले। इन जगहों पर जैविक पदार्थ की मात्रा भी ज्यादा मिली। जैविक पदार्थ मिट्टी में रहने वाले सूक्ष्मजीवों और दूसरे जीवों के लिए भोजन का काम करता है और उनके लिए बेहतर वातावरण तैयार करता है।इसके विपरीत लॉन की मिट्टी में कपड़े सबसे धीमी गति से टूटे। खेतों और प्राकृतिक घास के मैदानों में मिट्टी की जैविक गतिविधि इन दोनों के बीच रही।शोधकर्ताओं के मुताबिक जमीन का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है, उसका मिट्टी की जैविक गतिविधि पर बड़ा असर पड़ता है। तापमान और नमी भी महत्वपूर्ण कारक हैं। बहुत ठंडी या बहुत सूखी मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की गतिविधि कम हो सकती है।
किसान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मिट्टी के अंदर की जिंदगी
मिट्टी केवल पौधे को खड़ा रखने का माध्यम नहीं है। उसके अंदर मौजूद सूक्ष्मजीव जैविक पदार्थों को तोड़ने, पोषक तत्वों के चक्र को चलाने और मिट्टी की संरचना बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। केंचुए और दूसरे जीव मिट्टी में हवा और पानी के आवागमन को भी प्रभावित करते हैं।स्वस्थ मिट्टी पानी को बेहतर तरीके से संभाल सकती है, कार्बन जमा कर सकती है और पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्वों को बनाए रखने में मदद करती है। इसलिए लंबे समय तक अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी की जैविक सेहत पर ध्यान देना भी जरूरी है।
मिट्टी को ‘जिंदा’ रखने के लिए क्या करें
किसानों के लिए इसका सीधा संदेश यह है कि खेत में जैविक पदार्थ बनाए रखना महत्वपूर्ण है। फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन, कंपोस्ट या जैविक खाद का इस्तेमाल, फसल चक्र में विविधता और जरूरत से ज्यादा रासायनिक खाद व कीटनाशकों के इस्तेमाल से बचना मिट्टी के जीवों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में मदद कर सकता है।खेत की मिट्टी को लंबे समय तक बिना वनस्पति के खुला छोड़ने से भी बचना चाहिए। पौधों की जड़ें और जैविक अवशेष मिट्टी में रहने वाले जीवों के लिए भोजन का महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं।
लेकिन तेजी से गलना हमेशा अच्छी मिट्टी का संकेत नहीं
वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया कि सूती कपड़े का बहुत तेजी से गलना हर स्थिति में मिट्टी के स्वस्थ होने का प्रमाण नहीं है। खेती की जमीन में पर्याप्त जैविक गतिविधि फायदेमंद हो सकती है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में अत्यधिक गतिविधि या पोषक तत्वों की अधिकता असंतुलन का संकेत भी हो सकती है।इसलिए किसान सूती कपड़े के गलने को मिट्टी की पूरी जांच का विकल्प नहीं, बल्कि उसकी जैविक गतिविधि को समझने का एक आसान संकेत मानें। मिट्टी की उर्वरता और पोषक तत्वों की सही स्थिति जानने के लिए वैज्ञानिक मिट्टी परीक्षण जरूरी है।
‘कपड़े का इंडेक्स’ बनाने की पहल
इस प्रयोग के आधार पर वैज्ञानिकों ने मिट्टी की जैविक गतिविधि को आम लोगों के लिए आसानी से समझाने के उद्देश्य से ‘कपड़े का इंडेक्स’ प्रस्तावित किया है। अध्ययन में करीब 240 नागरिकों को सह-लेखक के रूप में भी शामिल किया गया।यह प्रयोग इस बात का उदाहरण है कि मिट्टी की सेहत समझने के लिए वैज्ञानिकों को हमेशा महंगे और जटिल उपकरणों की जरूरत नहीं होती। एक साधारण सूती कपड़ा भी जमीन के अंदर चल रही जैविक गतिविधि की ओर संकेत कर सकता है। जलवायु परिवर्तन के दौर में, जब तापमान और बारिश के तौर-तरीके बदल रहे हैं, मिट्टी को स्वस्थ रखना खेती और खाद्य सुरक्षा दोनों के लिए महत्वपूर्ण होता जा रहा है।