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कागजों में डॉक्टरों की भरमार, फिर भी स्वास्थ्य सेवाएं लाचार
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बिजनौर के मेडिकल अस्पताल में खाली दंत विभाग के चिकित्सक की कुर्सी। संवाद
- मेडिकल अस्पताल में बुधवार को दोपहर एक बजे ही बंद हो गई कई ओपीडी
- अधिकारियों, चिकित्सकों को नहीं पता ओपीडी में किसी जेआर की है ड्यूटी
नंबर गेम
- 61 फैकल्टी महात्मा विदुर मेडिकल काॅलेज में है
- 11 सीनियर रेजीडेंट मेडिकल अस्पताल में कार्यरत हैं
- 91 जूनियर रेजीडेंट की मेडिकल अस्पताल में तैनाती है
- 10 पीएमएस चिकित्सक मेडिकल अस्पताल में काम कर रहे हैं
- 120 मरीज मेडिकल अस्पताल हर महीने रेफर हो रहे हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। जिला अस्पताल के महात्मा विदुर मेडिकल काॅलेज में संबद्ध होने के बाद डॉक्टरों की संख्या बढ़ गई है। लेकिन, डॉक्टरों की भरमार सिर्फ कागजों में ही है। हकीकत में ज्यादातर डॉक्टर ड्यूटी से ही नदारद हैं। लगातार अस्पताल में लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं। इसके बावजूद गैर जिम्मेदाराना हरकतें हो रही हैं। जिम्मेदार भी मौन हैं और कोई संवेदनशीलता नहीं दिखा रहे हैं।
बुधवार को अस्पताल में एक बजते ही कई ओपीडी पर ताला लटक गया। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि मरीजों की जान से खिलवाड़ हो रहा है। अमर उजाला टीम ने बुधवार को दोपहर एक बजकर 20 मिनट पर ओपीडी की पड़ताल की। इस दौरान दंत विभाग की ओपीडी में जूनियर रेजीडेंट और सीनियर रेजीडेंट मिले। जबकि, सीनियर चिकित्सक डाॅ. अलका रानी ओपीडी से नदारद थीं। इसके बाद ईएनटी विभाग की ओपीडी में ताला लटका मिला। वहीं, नेत्र विभाग की ओपीडी भी बंद मिली। जबकि, ओपीडी बंद होने का समय दो बजे है। इससे साफ जाहिर है कि दो बजने से पहले ही चिकित्सक ओपीडी बंद कर देते हैं।
- मेडिकल अस्पताल में कार्यरत 91 जूनियर रेजीडेंट, मौके पर मिलते नहीं
मेडिकल अस्पताल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, मेडिकल अस्पताल में वर्तमान में 91 जूनियर रेजीडेंट कार्यरत हैं। लेकिन, मौके पर नहीं मिलते हैं। बुधवार को पड़ताल में सामने आया कि सर्जरी विभाग में सर्जन डाॅ. नरेश तैनात थे। उनसे जूनियर रेजीडेंट के बारे में पता किया। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है। ओपीडी में कोई जूनियर रेजीडेंट नहीं आता।
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- ड्यूटी होने पर भी 30 जून की रात को इमरजेंसी में नहीं थे जूनियर रेजीडेंट
मेडिकल अस्पताल की इमरजेंसी में 30 जून की रात को झालू निवासी काजल ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया था। अस्पताल की इमरजेंसी में ईएमओ डाॅ. रामकुमार और जूनियर रेजीडेंट डाॅ. प्रिंशी की ड्यूटी थी। लेकिन, यहां सिर्फ डाॅ. रामकुमार ही तैनात थे। वह रात में पोस्टमार्टम करने चले गए। जिसके बाद इमरजेंसी में कोई चिकित्सक नहीं थी। जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं पता कि ड्यूटी पर कार्यरत चिकित्सक कहां है। उस दिन ड्यूटी पर क्यों नहीं आईं। छुट्टी पर हैं या छोड़कर चली गईं हैं। यही हाल अस्पताल के दूसरे विभागों का भी है।
- हालात : हर माह मेरठ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर हो रहे 120 मरीज
अधिकारी मेडिकल अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने का दावा कर रहे हैं। मगर, हकीकत इससे कहीं दूर है। मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद यहां से हर माह मेरठ मेडिकल कॉलेज के लिए करीब 120 मरीज रेफर किए जा रहे हैं। रोजाना करीब चार मरीज गंभीर स्थिति के रेफर हो रहे हैं। वहीं मेरठ में मरीजों के तीमारदारों से यही पूछा जा रहा है कि जब मेडिकल कॉलेज बिजनौर में है तो यहां मरीज रेफर क्यों किए जा रहे हैं।
- जूनियर रेजीडेंट पर हर महीने खर्च हो रहे 80 लाख से ज्यादा
मेडिकल अस्पताल में 91 जूनियर रेजीडेंट की तैनाती है। प्रत्येक जूनियर रेजीडेंट को करीब 90 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। जिससे साफ जाहिर है कि सरकार बिजनौर के मेडिकल अस्पताल में कार्यरत जूनियर रेजीडेंट की सैलरी पर हर माह 80 लाख से ज्यादा खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद ज्यादातर जूनियर रेजीडेंट मौके से गायब मिलते हैं।
- वर्जन :
मेडिकल अस्पताल में सभी चिकित्सकों को समय से ओपीडी करने के निर्देश दिए गए हैं। ईएनटी चिकित्सक मेडिकल अवकाश पर हैं। नेत्र विभाग बंद होने के बारे में पता किया जाएगा। सभी जूनियर रेजीडेंट को आवंटित ओपीडी में ड्यूटी करने के निर्देश दिए गए हैं। अगर, कोई ओपीडी नहीं करता है और बिना बताए गायब होता है तो कार्रवाई की जाएगी। - डाॅ. उर्मिला कार्या, प्राचार्या, मेडिकल काॅलेज, बिजनौर
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- अधिकारियों, चिकित्सकों को नहीं पता ओपीडी में किसी जेआर की है ड्यूटी
नंबर गेम
- 61 फैकल्टी महात्मा विदुर मेडिकल काॅलेज में है
- 11 सीनियर रेजीडेंट मेडिकल अस्पताल में कार्यरत हैं
- 91 जूनियर रेजीडेंट की मेडिकल अस्पताल में तैनाती है
- 10 पीएमएस चिकित्सक मेडिकल अस्पताल में काम कर रहे हैं
- 120 मरीज मेडिकल अस्पताल हर महीने रेफर हो रहे हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। जिला अस्पताल के महात्मा विदुर मेडिकल काॅलेज में संबद्ध होने के बाद डॉक्टरों की संख्या बढ़ गई है। लेकिन, डॉक्टरों की भरमार सिर्फ कागजों में ही है। हकीकत में ज्यादातर डॉक्टर ड्यूटी से ही नदारद हैं। लगातार अस्पताल में लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं। इसके बावजूद गैर जिम्मेदाराना हरकतें हो रही हैं। जिम्मेदार भी मौन हैं और कोई संवेदनशीलता नहीं दिखा रहे हैं।
बुधवार को अस्पताल में एक बजते ही कई ओपीडी पर ताला लटक गया। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि मरीजों की जान से खिलवाड़ हो रहा है। अमर उजाला टीम ने बुधवार को दोपहर एक बजकर 20 मिनट पर ओपीडी की पड़ताल की। इस दौरान दंत विभाग की ओपीडी में जूनियर रेजीडेंट और सीनियर रेजीडेंट मिले। जबकि, सीनियर चिकित्सक डाॅ. अलका रानी ओपीडी से नदारद थीं। इसके बाद ईएनटी विभाग की ओपीडी में ताला लटका मिला। वहीं, नेत्र विभाग की ओपीडी भी बंद मिली। जबकि, ओपीडी बंद होने का समय दो बजे है। इससे साफ जाहिर है कि दो बजने से पहले ही चिकित्सक ओपीडी बंद कर देते हैं।
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- मेडिकल अस्पताल में कार्यरत 91 जूनियर रेजीडेंट, मौके पर मिलते नहीं
मेडिकल अस्पताल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, मेडिकल अस्पताल में वर्तमान में 91 जूनियर रेजीडेंट कार्यरत हैं। लेकिन, मौके पर नहीं मिलते हैं। बुधवार को पड़ताल में सामने आया कि सर्जरी विभाग में सर्जन डाॅ. नरेश तैनात थे। उनसे जूनियर रेजीडेंट के बारे में पता किया। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है। ओपीडी में कोई जूनियर रेजीडेंट नहीं आता।
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- ड्यूटी होने पर भी 30 जून की रात को इमरजेंसी में नहीं थे जूनियर रेजीडेंट
मेडिकल अस्पताल की इमरजेंसी में 30 जून की रात को झालू निवासी काजल ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया था। अस्पताल की इमरजेंसी में ईएमओ डाॅ. रामकुमार और जूनियर रेजीडेंट डाॅ. प्रिंशी की ड्यूटी थी। लेकिन, यहां सिर्फ डाॅ. रामकुमार ही तैनात थे। वह रात में पोस्टमार्टम करने चले गए। जिसके बाद इमरजेंसी में कोई चिकित्सक नहीं थी। जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं पता कि ड्यूटी पर कार्यरत चिकित्सक कहां है। उस दिन ड्यूटी पर क्यों नहीं आईं। छुट्टी पर हैं या छोड़कर चली गईं हैं। यही हाल अस्पताल के दूसरे विभागों का भी है।
- हालात : हर माह मेरठ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर हो रहे 120 मरीज
अधिकारी मेडिकल अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने का दावा कर रहे हैं। मगर, हकीकत इससे कहीं दूर है। मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद यहां से हर माह मेरठ मेडिकल कॉलेज के लिए करीब 120 मरीज रेफर किए जा रहे हैं। रोजाना करीब चार मरीज गंभीर स्थिति के रेफर हो रहे हैं। वहीं मेरठ में मरीजों के तीमारदारों से यही पूछा जा रहा है कि जब मेडिकल कॉलेज बिजनौर में है तो यहां मरीज रेफर क्यों किए जा रहे हैं।
- जूनियर रेजीडेंट पर हर महीने खर्च हो रहे 80 लाख से ज्यादा
मेडिकल अस्पताल में 91 जूनियर रेजीडेंट की तैनाती है। प्रत्येक जूनियर रेजीडेंट को करीब 90 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। जिससे साफ जाहिर है कि सरकार बिजनौर के मेडिकल अस्पताल में कार्यरत जूनियर रेजीडेंट की सैलरी पर हर माह 80 लाख से ज्यादा खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद ज्यादातर जूनियर रेजीडेंट मौके से गायब मिलते हैं।
- वर्जन :
मेडिकल अस्पताल में सभी चिकित्सकों को समय से ओपीडी करने के निर्देश दिए गए हैं। ईएनटी चिकित्सक मेडिकल अवकाश पर हैं। नेत्र विभाग बंद होने के बारे में पता किया जाएगा। सभी जूनियर रेजीडेंट को आवंटित ओपीडी में ड्यूटी करने के निर्देश दिए गए हैं। अगर, कोई ओपीडी नहीं करता है और बिना बताए गायब होता है तो कार्रवाई की जाएगी। - डाॅ. उर्मिला कार्या, प्राचार्या, मेडिकल काॅलेज, बिजनौर