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Meerut News: हांगकांग में गूंजा बायो-म्यूजिकोलॉजी शोध का स्वर
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सीसीएसयू के प्रो. दिनेश शर्मा ने हांगकांग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दी प्रस्तुति
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के प्रोफेसर दिनेश सी. शर्मा ने हांगकांग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विश्वविद्यालय के बायो-म्यूजिकोलॉजी और संगीत चिकित्सा संबंधी शोध को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया।
एक से 4 अक्तूबर तक हांगकांग के होपवेल सम्मेलन केंद्र में आयोजित एशिया-प्रशांत स्वस्थ दीर्घायु अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में प्रो. शर्मा को विशिष्ट वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था। सम्मेलन में विभिन्न देशों के 2,000 से अधिक शोधकर्ता, वैज्ञानिक, चिकित्सक, स्वास्थ्य-प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि और नवप्रवर्तक शामिल हुए।
प्रो. शर्मा ने ध्वनि, मस्तिष्क एवं दीर्घायु संगीत चिकित्सा और जैव-संगीत विज्ञान को स्वस्थ वृद्धावस्था के उपायों में रूपांतरित करना विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने ध्वनि, संगीत और लय के मस्तिष्क, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक जुड़ाव तथा स्वस्थ वृद्धावस्था पर संभावित प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बायो-म्यूजिकोलॉजी को वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित स्वस्थ दीर्घायु के उपायों से जोड़ने की संभावनाएं भी बताईं। सम्मेलन में स्तन कैंसर संबंधी अनुसंधान के लिए विकसित किए जा रहे वाइब्रोअकूस्टिक के प्रारूप को प्रदर्शित किया गया।
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के प्रोफेसर दिनेश सी. शर्मा ने हांगकांग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विश्वविद्यालय के बायो-म्यूजिकोलॉजी और संगीत चिकित्सा संबंधी शोध को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया।
एक से 4 अक्तूबर तक हांगकांग के होपवेल सम्मेलन केंद्र में आयोजित एशिया-प्रशांत स्वस्थ दीर्घायु अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में प्रो. शर्मा को विशिष्ट वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था। सम्मेलन में विभिन्न देशों के 2,000 से अधिक शोधकर्ता, वैज्ञानिक, चिकित्सक, स्वास्थ्य-प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि और नवप्रवर्तक शामिल हुए।
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प्रो. शर्मा ने ध्वनि, मस्तिष्क एवं दीर्घायु संगीत चिकित्सा और जैव-संगीत विज्ञान को स्वस्थ वृद्धावस्था के उपायों में रूपांतरित करना विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने ध्वनि, संगीत और लय के मस्तिष्क, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक जुड़ाव तथा स्वस्थ वृद्धावस्था पर संभावित प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बायो-म्यूजिकोलॉजी को वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित स्वस्थ दीर्घायु के उपायों से जोड़ने की संभावनाएं भी बताईं। सम्मेलन में स्तन कैंसर संबंधी अनुसंधान के लिए विकसित किए जा रहे वाइब्रोअकूस्टिक के प्रारूप को प्रदर्शित किया गया।
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