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Meerut News: जिस आंगन में कन्यादान होना था, वहां बिखरे पड़े हैं टूटे हुए सपने

Sat, 10 Jan 2026 02:27 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 10 Jan 2026 02:27 AM IST
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The courtyard where the Kanyadaan was to take place is strewn with broken dreams.
सरधना। गांव कपसाड़ में महिला की हत्या के बाद विलाप करते परिजन। संवाद
कपसाड़ गांव में हुए जघन्य हत्याकांड ने सिर्फ एक महिला की जान नहीं ली बल्कि एक पिता के अरमानों और एक मां की ममता का भी गला घोंट दिया। शुक्रवार को मृतका सुनीता के शव के पास जो मंजर था वह पत्थर दिल इंसान को भी रुला देने वाला था। परिवार की आंखों में जहां हत्यारों के लिए आक्रोश था, वहीं अपनी लाड़ली बेटी रूबी के लिए बेबसी और गहरा गम साफ झलक रहा था।
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सतेंद्र और सुनीता की दुनिया उनके तीन बेटों-नरसी, मनदीप, शिवम और सबसे छोटी, सबकी लाड़ली इकलौती बेटी रूबी के इर्द-गिर्द घूमती थी। तीन बेटों के बाद जब रूबी का जन्म हुआ था, तभी से मां सुनीता ने उसके कन्यादान के सपने देखने शुरू कर दिए थे। वह समय करीब भी आ गया था, रूबी का रिश्ता तय हो चुका था और अप्रैल में उसके हाथ पीले होने थे। मां सुनीता अभी से बेटी की विदाई की तैयारियों में जुटी थी उसे क्या पता था कि जिस बेटी को वह डोली में बिठाना चाहती है उसे दबंग जबरन उठाकर ले जाएंगे।
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जान देकर भी बेटी को नहीं बचा पाई मां

बृहस्पतिवार का वह काला दिन परिवार कभी नहीं भूलेगा। जब हमलावरों ने रूबी पर हाथ डाला तो मां सुनीता ढाल बनकर खड़ी हो गई। उसने अपनी जान की परवाह न करते हुए आखिरी सांस तक बेटी को बचाने की कोशिश की। अस्पताल में दो घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच जूझते हुए सुनीता ने दम तोड़ दिया। उसकी मौत के साथ ही बेटी की शादी के वे सारे अरमान और तैयारियां सदा के लिए दफन हो गईं।
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भाई बोले- मां के अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाएगी बहन

शुक्रवार को जब सुनीता का शव घर के आंगन में रखा था, तो तीनों भाई नरसी, मनदीप और शिवम फफक-फफक कर रो पड़े। उनकी सिसकियां कलेजा चीर रही थीं। वे बार-बार एक ही बात कह रहे थे, हमारी बहन मां की सबसे लाड़ली थी, मां उसकी पसंद का ही हर सामान लाती थी, लेकिन आज बदकिस्मती देखो कि वो अपनी मां के अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाएगी। भाइयों को मलाल था कि जिस बहन को वे डोली में विदा करने वाले थे, आज वह उनके पास नहीं है और मां की मौत हो चुकी है।
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