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Meerut News: शपथ ग्रहण या पहली बोर्ड बैठक, अखिर
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शपथ ग्रहण या पहली बैठक... बोर्ड का कार्यकाल कब तक, विदाई समारोह टला
मेरठ। नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल शपथ ग्रहण की तारीख 12 दिसंबर तक या फिर बोर्ड की पहली बैठक आठ जनवरी तक। यह अभी स्पष्ट नहीं है। शुक्रवार को निगम के भाजपा पार्षद ने हाईकोर्ट के आदेश के हवाले के साथ शासनादेश सार्वजनिक करके हलचल मचा दी। महापौर ने भी बोर्ड का विदाई समारोह को टालते हुए नगरायुक्त को पत्र लिखकर आठ जनवरी तक बोर्ड के अस्तित्व में रहने की बात कही।
महापौर सुनीता वर्मा ने पूरे बोर्ड के साथ 12 दिसंबर को टाउन हॉल के गांधी पार्क में शपथ ली थी। पार्षद ललित नागदेव के अनुसार बोर्ड की पहली बैठक आठ जनवरी को टाउन हॉल के तिलक भवन में हुई। 2011 में हाईकोर्ट और शासनादेश के मुताबिक बोर्ड का अस्तित्व आठ जनवरी तक ही रहेगा। कुल मिलाकर निगम बोर्ड का कार्यकाल 12 दिसंबर को खत्म होने वाला नहीं है। इनका यहां तक कहना है कि कार्यकारिणी तब तक काम करती रहेगी जब तक अगले बोर्ड का गठन नहीं होता है। इतना जरूर है कि कार्यकारिणी निगम से कोई भत्ता नहीं लेगी। पार्षद का कहना है कि शासनादेश के मुताबिक निगम बोर्ड का कार्यकाल 27 दिन अधिक रहेगा।
पार्षद के इस पत्र पर महापौर सुनीता वर्मा ने भी 12 दिसंबर को आयोजित होने वाले बोर्ड के विदाई समारोह को टालते हुए नगरायुक्त को पत्र लिखा है, जिसमें विधिक राय लेकर अनुपालन के निर्देश दिए हैं।
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उधर, पूर्व पार्षद अजय गुप्ता का कहना है कि निगम एक्ट के तहत निगम बोर्ड का कार्यकाल शपथ ग्रहण से ही माना गया है। शपथ ग्रहण को ही पहली बैठक कहा जाता है। यह शासनादेश 2005 का है। इसमें अभी तक कोई परिवर्तन नहीं किया है। इसके आधार पर चालू बोर्ड का कार्यकाल 12 दिसंबर को खत्म हो जाएगा।
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मेरठ। नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल शपथ ग्रहण की तारीख 12 दिसंबर तक या फिर बोर्ड की पहली बैठक आठ जनवरी तक। यह अभी स्पष्ट नहीं है। शुक्रवार को निगम के भाजपा पार्षद ने हाईकोर्ट के आदेश के हवाले के साथ शासनादेश सार्वजनिक करके हलचल मचा दी। महापौर ने भी बोर्ड का विदाई समारोह को टालते हुए नगरायुक्त को पत्र लिखकर आठ जनवरी तक बोर्ड के अस्तित्व में रहने की बात कही।
महापौर सुनीता वर्मा ने पूरे बोर्ड के साथ 12 दिसंबर को टाउन हॉल के गांधी पार्क में शपथ ली थी। पार्षद ललित नागदेव के अनुसार बोर्ड की पहली बैठक आठ जनवरी को टाउन हॉल के तिलक भवन में हुई। 2011 में हाईकोर्ट और शासनादेश के मुताबिक बोर्ड का अस्तित्व आठ जनवरी तक ही रहेगा। कुल मिलाकर निगम बोर्ड का कार्यकाल 12 दिसंबर को खत्म होने वाला नहीं है। इनका यहां तक कहना है कि कार्यकारिणी तब तक काम करती रहेगी जब तक अगले बोर्ड का गठन नहीं होता है। इतना जरूर है कि कार्यकारिणी निगम से कोई भत्ता नहीं लेगी। पार्षद का कहना है कि शासनादेश के मुताबिक निगम बोर्ड का कार्यकाल 27 दिन अधिक रहेगा।
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पार्षद के इस पत्र पर महापौर सुनीता वर्मा ने भी 12 दिसंबर को आयोजित होने वाले बोर्ड के विदाई समारोह को टालते हुए नगरायुक्त को पत्र लिखा है, जिसमें विधिक राय लेकर अनुपालन के निर्देश दिए हैं।
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उधर, पूर्व पार्षद अजय गुप्ता का कहना है कि निगम एक्ट के तहत निगम बोर्ड का कार्यकाल शपथ ग्रहण से ही माना गया है। शपथ ग्रहण को ही पहली बैठक कहा जाता है। यह शासनादेश 2005 का है। इसमें अभी तक कोई परिवर्तन नहीं किया है। इसके आधार पर चालू बोर्ड का कार्यकाल 12 दिसंबर को खत्म हो जाएगा।