सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज बोली- 15 करोड़ के गोलमाल के खिलाफ आवाज उठाई तो...
सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता एवं तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ने वाली फरहा फैज ने कहा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए 15 करोड़ रुपये के गोलमाल के खिलाफ आवाज उठाने एवं जांच की मांग करने पर उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। उन्होंने जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडेय पर आरोप लगाया कि उन्होंने निसार को मोहरा बनाकर रिपोर्ट दर्ज करवाई है।
फरहा फैज गुरुवार को कोर्ट रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से वार्ता कर रहीं थीं। उन्होंने कहा कि अगस्त 2018 में डूडा ने प्रधानमंत्री आवासीय योजना (शहरी क्षेत्र) के लिए 213 लोगों को सूची तैयार की थी। 29 अक्तूबर 2018 को लाभार्थी मेले का आयोजन किया गया। जिसमें पांच लाभार्थियों को आवास योजना के पत्र सौंपे गए। जिसमें निसार अहमद भी शामिल था। काफी समय तक लाभार्थियों को पैसे जारी नहीं किए गए तो उन्होंने इस मामले में जानकारी की। जिसके बाद एक किश्त 50 हजार रुपये की जारी कर दी गई। जिससे निसार अहमद ने अपने मकान का लिंटर ऊंचा करवाया और भराव करवाया, लेकिन इसके बदले निसार अहमद से डूडा से जुड़े कंपनी के इंजीनियर ने 50 हजार रुपये की मांग की। जिसकी शिकायत उन्होंने जिलाधिकारी से की।
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डीएम ने पीओ डूडा को जांच के आदेश दिए, तो डूडा के परियोजना अधिकारी ने निसार अहमद को अपात्र बता दिया। उसे अगली किश्त देने से मना कर दिया। साथ ही कहा कि उससे रिकवरी होगी, जबकि उसे पात्र बनाकर पहले ही पत्र दिया जा चुका था और किश्त भी जारी की जा चुकी थी। इसलिए उन्होंने पात्रों के चयन में गड़बड़ी की आशंका जताई और पात्रों की जांच कराए जाने की मांग की थी, लेकिन जांच के नाम पर कुछ प्राइवेट कर्मचारियों पर कार्रवाई कर पूरे मामले की लीपापोती कर दी गई। जिलाधिकारी द्वारा कार्रवाई की रिपोर्ट शासन एवं केंद्र को भेज दी गई।
फरहा फैज ने कहा कि सिर्फ प्राइवेट कंपनी का कंप्यूटर ऑपरेटर एवं अन्य प्राइवेट कर्मचारी 15 करोड़ रुपये का गोलमाल नहीं कर सकते। इसलिए उन्होंने सीबीआई को जांच के लिए पत्र भेजा, हाईकोर्ट में भी डीएम की बजाय आलोक कुमार पांडेय को पार्टी बनाकर जांच की अपील दाखिल की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी आवाज को दबाने के लिए निसार अहमद को मोहरा बनाकर रिपोर्ट दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि दशहरे के दिन विजय वर्मा की शिकायत लेकर तहसील के कुछ अधिकारी उनके घर पहुंचे थे, लेकिन जांच में उनकी शिकायत झूठी पाई गई तो निसार अहमद को मोहरा बनाकर एफआईआर कराई गई। इस योजना में 15 करोड़ का गबन हुआ है। इसकी जांच कराने पर उनके खिलाफ अभी और भी रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है। सिर्फ एक मामला नहीं है, पहले उनके मकान मालिक से प्रार्थनापत्र दिलवाया गया था। 55 बीघा के सुनारों के एक बाग का भी मामला है, बच्चों के श्मशान की भूमि का भी मुद्दा उन्होंने उठाया है, जिस पर शिवधाम बनाया जा रहा है।
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