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Meerut News: माछरा रामलीला में श्रवण कथा और श्रीराम जन्म का मंचन
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माछरा में आदर्श रामलीला में कलाकारों द्वारा श्रवण कुमार की कथा का मंचन किया जाता हुआ।
संवाद न्यूज एजेंसी
माछरा। आदर्श रामलीला में तीसरे दिन श्रवण कुमार और श्रीराम जन्म की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों के प्रदर्शन से दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। बुधवार को शिवकुमार गुर्जर हसनपुर कलां, अमित कंसल और अमन गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में मंच पर उपस्थित रहे।
रामलीला में श्रवण कुमार की माता-पिता के प्रति अनन्य भक्ति को दर्शाया गया। श्रवण अपने माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर तीर्थ यात्रा पर निकले थे। अयोध्या के पास सरयू नदी पर श्रवण पानी लेने गए। शिकार की ताक में बैठे राजा दशरथ ने उन पर शब्दभेदी बाण चला दिया। श्रवण गंभीर रूप से घायल हो गए और अपने माता-पिता के लिए पानी पिलाने की बात कही। राजा दशरथ ने श्रवण के माता-पिता को पूरी घटना बताई। दोनों ने विलाप करते हुए दशरथ को श्राप दिया और अपने प्राण त्याग दिए।
कलाकारों ने राजा दशरथ के यहां पुत्रेष्टि यज्ञ के बाद का दृश्य दिखाया। कौशल्या रानी की गोद में बाल रूप में श्रीराम प्रकट हुए। इस दृश्य से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। रामलीला समिति के बिजेंद्र शर्मा, बोबिंद्र उर्फ बोबी त्यागी, राकेश प्रधान, जोशिल त्यागी, लोमस और ताराचंद त्यागी ने व्यवस्था बनाने में सहयोग किया।
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माछरा। आदर्श रामलीला में तीसरे दिन श्रवण कुमार और श्रीराम जन्म की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों के प्रदर्शन से दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। बुधवार को शिवकुमार गुर्जर हसनपुर कलां, अमित कंसल और अमन गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में मंच पर उपस्थित रहे।
रामलीला में श्रवण कुमार की माता-पिता के प्रति अनन्य भक्ति को दर्शाया गया। श्रवण अपने माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर तीर्थ यात्रा पर निकले थे। अयोध्या के पास सरयू नदी पर श्रवण पानी लेने गए। शिकार की ताक में बैठे राजा दशरथ ने उन पर शब्दभेदी बाण चला दिया। श्रवण गंभीर रूप से घायल हो गए और अपने माता-पिता के लिए पानी पिलाने की बात कही। राजा दशरथ ने श्रवण के माता-पिता को पूरी घटना बताई। दोनों ने विलाप करते हुए दशरथ को श्राप दिया और अपने प्राण त्याग दिए।
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कलाकारों ने राजा दशरथ के यहां पुत्रेष्टि यज्ञ के बाद का दृश्य दिखाया। कौशल्या रानी की गोद में बाल रूप में श्रीराम प्रकट हुए। इस दृश्य से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। रामलीला समिति के बिजेंद्र शर्मा, बोबिंद्र उर्फ बोबी त्यागी, राकेश प्रधान, जोशिल त्यागी, लोमस और ताराचंद त्यागी ने व्यवस्था बनाने में सहयोग किया।
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