फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Somewhere the sewer lids are lying broken and at other places they are lying at an angle.

Meerut News: कहीं टूटे पड़े हैं तो कहीं आड़े-तिरछे रखे हैं सीवर के ढक्कन

Mon, 04 Dec 2023 12:03 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ Updated Mon, 04 Dec 2023 12:03 AM IST
विज्ञापन
Somewhere the sewer lids are lying broken and at other places they are lying at an angle.
- ढक्कनों के टूटे होने या व्यवस्थित तरीके से नहीं रखने से राहगीरों को हो रही परेशानी
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। स्मार्ट सिटी सहारनपुर में सीवर के ढक्कन रखने का काम पूरी तरह व्यवस्थित नहीं हो पा रहा है। ढक्कन कहीं टूटे पड़े हैं तो कहीं आड़े-तिरछे रखे हुए हैं। कुछ जगहों पर ढक्कन कहीं सड़क के स्तर से नीचे हैं, तो कहीं सड़क के स्तर से तीन से चार इंच ऊंचे रखे हैं। इसकी वजह से राहगीरों, खासकर दुपहिया वाहन चालकों को समस्या हो रही है।


धोबीघाट पर सीवर का ढक्कन अक्सर टूटा रहता है। एक सप्ताह पहले यहां ढक्कन बदला गया, लेकिन पुराने ढक्कन का मलबा सड़क पर ही छोड़ा हुआ है। धोबीघाट से पुल खुमरान की ओर चलें तो करीब तीन ढक्कन हैं, जो सड़क के स्तर से गहरे हैं। राहगीर अपने वाहनों को इनसे बचाकर निकलते हैं। वैल्डर की दुकान के सामने ढक्कन की गहराई इतनी है कि लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
विज्ञापन

स्थानीय पूर्व पार्षद टिंकू अरोड़ा का कहना है कि टूटे ढक्कनों को लेकर वह कई बार शिकायत कर चुके हैं। उधर, वार्ड 43 में टूटे ढक्कनों के कारण हादसे हो चुके हैं। आठ महीने पहले एक बुजुर्ग खुले मैनहोल में गिरकर चोटिल हुए थे। पठानपुरा की आठ फीट चौड़ी सड़क के बीचोंबीच सीवर का हॉल खुला पड़ा है। यहां काफी समय पहले ढक्कन टूटा था जो बदला नहीं गया है। राहगीरों को इससे बचकर निकलना पड़ता है। रात में कई लोग गिरकर चोटिल हो चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


- ढक्कनों की गुणवत्ता पर सवाल

सीवर के ढक्कनों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। पार्षद मंसूर बदर ने बताया कि पहले सीवर के ढक्कनों के फ्रेम लोहे के हुआ करते थे और सीमेंट के ढक्कन भी ठीक से पके हुए होते थे। लेकिन कई साल से फ्रेम सीमेंट के बने हुए हैं, जो जल्दी टूट रहे हैं। इसके अलावा ढक्कन भी रखने के बाद एक सप्ताह के भीतर टूट जाते हैं। चूंकि कंपनी को ढक्कन के हिसाब से भुगतान होता है। ऐसे में बार-बार ढक्कन टूटने से निगम पर आर्थिक भार बढ़ रहा है।

- ढक्कनों की गुणवत्ता की कराएंगे जांच


जलकल अनुभाग के अधिशासी अभियंता विजय बहादुर सिंह का कहना है कि सीवर के ढक्कन सड़क के स्तर से ऊंचे या नीचे नहीं रख सकते। उनका स्तर सड़क के बराबर होना चाहिए। जहां भी इस तरह से ढक्कन रखे हैं उन्हें ठीक कराया जाएगा। इसके अलावा यदि ढक्कन बार-बार टूट रहे हैं तो उनकी गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed