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Meerut News: प्रत्येक गांव से 100 किसानों के मृदा सैंपल की निशुल्क होगी जांच
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खरखौदा में किसान गोष्ठी में जानकारी देते अधिकारी (स्वयं)
जिले के 257 गांवों का किया गया है चयन, अन्य किसान 102 रुपये देकर करा सकते हैं परीक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा। सरकार द्वारा जिले के 257 गांवों का चयन किया गया है। इनमें से प्रत्येक गांव में 100 किसानों के मृदा सैंपल निशुल्क जांच के लिए प्रयोगशाला भेजकर उनको मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराए जा रहे हैं। विकास खंड खरखौदा में ऐसे 14 गांवों का चयन किया गया है। यह बात उप कृषि निदेशक नीलेश चौरसिया ने विकासखंड के किसान कल्याण केंद्र में मृदा स्वास्थ्य के संबंध में जागरूकता को लेकर आयोजित गोष्ठी में कही। गोष्ठी की अध्यक्षता ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि अतुल त्यागी ने की।
उप कृषि निदेशक ने कहा कि इसके अलावा भी यदि कोई किसान अपने खेत की मिट्टी का परीक्षण कराना चाहता है तो दिल्ली रोड स्थित जिला स्तरीय मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में 102 रुपये का शुल्क जमा कराकर मिट्टी परीक्षण करा सकता है।
जिला कृषि अधिकारी राजीव कुमार सिंह ने कहा कि जनपद की मृदा का ऑर्गेनिक कार्बन औसत से निम्न स्तर का है। इस कारण भूमि में पहले से उपलब्ध बहुत से सूक्ष्म पोषक तत्व तथा फाॅस्फोरस और पोटेशियम उपलब्ध होने के पश्चात भी पौधों को उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। किसान लगातार उर्वरकों का प्रयोग कर रहा है और अपनी लागत बढ़ा रहा है। इसके लिए सबसे अधिक जरूरी है कि किसान अपनी भूमि में सड़ी हुई गोबर की खाद प्रतिवर्ष अवश्य डालें और उर्वरकों का संतुलित मात्रा में ही प्रयोग करें। डीएपी के स्थान पर एनपीके 20:20:0:13 तथा यूरिया के स्थान पर अमोनियम सल्फेट का प्रयोग करें। किसान अपनी फसलों का मृदा परीक्षण अवश्य बनाएं।
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कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. नवीन चंद्र कटिहार एवं डॉ. तिवारी ने किसानों द्वारा किए जा रहे अंधाधुंध उर्वरक एवं पेस्टिसाइड के प्रयोग से खराब हो रहे मृदा स्वास्थ्य के संबंध में किसानों को जागरूक किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा। सरकार द्वारा जिले के 257 गांवों का चयन किया गया है। इनमें से प्रत्येक गांव में 100 किसानों के मृदा सैंपल निशुल्क जांच के लिए प्रयोगशाला भेजकर उनको मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराए जा रहे हैं। विकास खंड खरखौदा में ऐसे 14 गांवों का चयन किया गया है। यह बात उप कृषि निदेशक नीलेश चौरसिया ने विकासखंड के किसान कल्याण केंद्र में मृदा स्वास्थ्य के संबंध में जागरूकता को लेकर आयोजित गोष्ठी में कही। गोष्ठी की अध्यक्षता ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि अतुल त्यागी ने की।
उप कृषि निदेशक ने कहा कि इसके अलावा भी यदि कोई किसान अपने खेत की मिट्टी का परीक्षण कराना चाहता है तो दिल्ली रोड स्थित जिला स्तरीय मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में 102 रुपये का शुल्क जमा कराकर मिट्टी परीक्षण करा सकता है।
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जिला कृषि अधिकारी राजीव कुमार सिंह ने कहा कि जनपद की मृदा का ऑर्गेनिक कार्बन औसत से निम्न स्तर का है। इस कारण भूमि में पहले से उपलब्ध बहुत से सूक्ष्म पोषक तत्व तथा फाॅस्फोरस और पोटेशियम उपलब्ध होने के पश्चात भी पौधों को उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। किसान लगातार उर्वरकों का प्रयोग कर रहा है और अपनी लागत बढ़ा रहा है। इसके लिए सबसे अधिक जरूरी है कि किसान अपनी भूमि में सड़ी हुई गोबर की खाद प्रतिवर्ष अवश्य डालें और उर्वरकों का संतुलित मात्रा में ही प्रयोग करें। डीएपी के स्थान पर एनपीके 20:20:0:13 तथा यूरिया के स्थान पर अमोनियम सल्फेट का प्रयोग करें। किसान अपनी फसलों का मृदा परीक्षण अवश्य बनाएं।
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कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. नवीन चंद्र कटिहार एवं डॉ. तिवारी ने किसानों द्वारा किए जा रहे अंधाधुंध उर्वरक एवं पेस्टिसाइड के प्रयोग से खराब हो रहे मृदा स्वास्थ्य के संबंध में किसानों को जागरूक किया।