Meerut News: धूप सेंके..., दूर भागेगा सर्दी का अवसाद, दिल और दिमाग रहेगा दुरूस्त
धूप की कमी से दिमाग में सिरोटोनिन रसायन का स्तर कम हो जाता है, जिससे कुछ लोगों के मन को यह मौसम का बदलाव रास नहीं आता है। ऐसे में चिकित्सक धूप सेंकने की सलाह देते हैं।
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जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. कमलेंद्र किशोर ने बताया कि इस डिसऑर्डर के मरीज आने शुरू हो गए हैं। जैसे-जैसे सर्दी बढ़ेगी, मरीज भी बढ़ेंगे। इस बीमारी में सुबह उठने में परेशानी होती है। नींद ज्यादा आती है। भूख ज्यादा लगती है और मीठा खाने का मन करता है। इससे व्यक्ति का वजन बढ़ जाता है। काम करने में मन नहीं लगता है और थकान हो जाती है।
मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक डॉ. तरुण पाल ने बताया कि सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर से पीड़ितों में डिप्रेशन होने का खतरा बढ़ जाता है और 20 से 30 प्रतिशत लोग बाइपोलर डिसऑर्डर (मैनिक अवसाद) से पीड़ित होते हैं। लोगों को गुस्सा ज्यादा आता है। जो लोग दवाइयों से बिल्कुल ठीक हो गए थे उनमें भी मौसम के बदलाव की वजह से माइग्रेन के अटैक दोबारा से शुरू हो जाते हैं।
मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा ने बताया कि सीजन के हिसाब से मन की स्थिति में बदलाव होता है। सूरज की रोशनी की वजह से आर्कटिक रीजन में इस तरह के मामले ज्यादा होते हैं। इस तरह के व्यक्तियों में निद्रा विकार हो जाता है। सर्दियों में दिन छोटे होते हैं, जिससे हार्मोन में असंतुलन पैदा होता है और शरीर में विटामिन डी की कमी आती है। इससे दिल और दिमाग पर प्रभाव पड़ता है। सर्दी के मौसम में खासकर उम्रदराज लोगों को अवसाद घेर लेता है जिससे तनाव व उच्च रक्तचाप की शिकायत हो जाती है।
इस तरह किया जाता है इलाज
इस बीमारी में व्यक्ति को नींद देर से आती है। सूरज की रोशनी मिलने से व्यक्ति ठीक हो जाता है। अगर परेशानी ज्यादा हो तो कुछ दिनों तक दवाइयां भी दी जाती हैं। साथ ही बिहेवियर थेरेपी एवं काउंसिलिंग भी की जाती है।
बचाव के लिए यह करें
रोज करीब 10 मिनट तक धूप में बैठेें।
नियमित योग और व्यायाम करें।
बादाम, अखरोट और मूंगफली आदि का सेवन करें।
ज्यादा चीनी, सोडियम व ज्यादा कैलोरी वाला भोजन खाने से बचें।