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नन्हे कंधों से घटेगा कॉपी-किताबों का बोझ
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Sat, 26 Mar 2016 02:08 AM IST
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स्कूल बैग।
- फोटो : फाइल फोटो
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दिल्ली पब्लिक स्कूल ने बच्चों के बस्ते का भार कम करने की पहल शुरू की है। इस सत्र से कक्षा एक से पांचवीं तक के छात्रों की किताब और कॉपियों को दो पार्ट में बांटा गया है। टाइम टेबल भी बदला है। इससे छोटे बच्चों को काफी राहत मिलेगी।
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सीबीएसई द्वारा लगातार बच्चों के बस्ते में किताबों का बोझ बढ़ाया जा रहा है। छोटी कक्षा के छात्र के बैग में करीब 5 से सात किलो तक वजन होता है, जिसके कारण बच्चों के कंधे झुक जाते हैं। इसी समस्या को देखते हुए बागपत रोड स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल सविता चड्ढा ने नई पहल की है। उन्होंने बताया कि चार अप्रैल से चलने वाले नये सत्र से प्रयोग किया जा रहा है। कक्षा एक से पांचवीं तक के बच्चों की पाठन सामग्री को दो भागों में बांट दिया है। इसी के अनुसार बच्चों की किताबेें और उत्तर पुस्तिकाएं तैयार कराई गई हैं। ज्यादा से ज्यादा काम वर्क शीट पर देने की योजना है।
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ऐसे बांटी पाठ्य सामग्री
सीबीएसई के अनुसार पूरे सत्र को दो भागों यानी टर्म एक और टर्म दो में बांटा जाता है। डीपीएस ने भी अप्रैल से सितंबर तक टर्म एक और अक्तूबर से मार्च तक टर्म दो में सत्र को बांटा है। इसके लिए टर्म एक के दौरान पढ़ाए जाने वाले विषय और इसके बाद टर्म दो में पढ़ाए जाने वाले विषय की एक किताब के दो भाग कर दिए हैं। यानी अगर हिंदी की किताब में 20 चैप्टर हैं तो उन्हें दो भागों यानी 10-10 चैप्टर में बांट दिया गया है। इन दोनों पुस्तकों में अलग-अलग इंडेक्स की व्यवस्था की गई है। उत्तर पुस्तिकाओं को भी दो भागों में बांटा गया है। 200 पेज की उत्तर पुस्तिका को 100-100 पेज का बनाया गया है।
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सीबीएसई और एनसीईआरटी को लिखा पत्रः प्रिंसिपल ने सीबीएसई के चेयरमैन और एनसीईआरटी के डायरेक्टर को पत्र लिखकर एक सत्र को दो भागों में बांटने के नियम को पूरे देश के स्कूलों पर लागू कराने की मांग उठाई है। वह जल्द ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय की मंत्री स्मृति ईरानी से भी मिलेंगी।
बस्ते पैराशूट के, बोतल 500 एमएल वाली
प्रिंसिपल ने अभिभावकों को बुलाकर उनसे पैराशूट मैटेरियल के बस्ते लेने के लिए कहा है, क्योंकि वह हल्के होते हैं। बच्चों के बैग में 500 एमएल की बोतल रखने के लिए कहा गया है। क्योंकि, स्कूल में आरओ का पानी मिलता है। बस में ही पानी के लिए बोतल दी जाए। प्लास्टिक की जगह स्टील के टिफिन दिए जाएं।
ऐसे कम करेंगे कॉपी और किताबों का बोझ
प्रिंसिपल ने बताया कि सभी कक्षा एक से पांचवीं तक के बच्चों का टाइम टेबल इस तरह का बनाया गया है, जिससे उन्हें प्रत्येक दिन सभी किताबें नहीं लानी पड़ें। टाइम टेबल के अनुसार उन्हें प्रत्येक सप्ताह में दो दिन ही एक विषय की किताबें लगानी पड़ेगी। बाकी दिन उन्हें वर्क शीट पर ही पढ़ाई कराई जाएगी।