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Meerut News: स्मॉग से बच्चों को बचाएं...अस्पतालों में बढ़ गए बीमार
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मेरठ। सुबह और रात को स्मॉग की चादर फैल रही है। आंखों में जलन और सांस के रोगियों की सांसें फूल रही हैं। सामान्यतः एयर क्वालिटी इंडेक्स 0 से 50 के बीच ही होना चाहिए, लेकिन यह दो दिन से 250 के आसपास चल रहा है। अस्पतालों के बाल रोग विभाग में बच्चों की संख्या बढ़ गई है। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में एक सप्ताह पहले तक हर रोज 250 से 300 बच्चे आ रहे थे, अब ये संख्या 350 से 400 पहुंच रही है।
बड़ों से ज्यादा बच्चों को नुकसान
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नवरत्न ने बताया कि बच्चों पर प्रदूषण का असर वयस्कों से ज्यादा होता है, क्योंकि 8 साल की उम्र तक बच्चे के फेफड़े का विकास हो रहा होता है। फेफड़े के अलावा बच्चों के दिल पर भी प्रदूषण का असर पड़ता है, जिससे वे हाइपरटेंशन का शिकार हो सकते हैं। गर्भवती महिलाओं के प्रदूषण के संपर्क में आने से भी गर्भ में पल रहे बच्चे पर बुरा असर पड़ता है।
बच्चों में ये लक्षण दिखें तो डॉक्टर के पास जाएं
लगातार खांसी
सांस लेने में दिक्कत
नाक, गले और आंख में दर्द
आंखों में जलन और उनका लाल होना
बार-बार छींक आना
लगातार नाक में पानी आना
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ अंजुम ने बताया कि बच्चों को स्मॉग से बचाने के लिए ये उपाय अपना सकते हैं
- घर के अंदर वायु प्रदूषण को कम करने के लिए, एयर प्यूरीफ़ायर का इस्तेमाल करें।
- घर में अगरबत्ती, धूपबत्ती, कोयला वगैरह न जलाएं।
- घर के अंदर या बच्चों के पास धूम्रपान न करें।
- घर में पेंट, सॉल्वैंट्स, या वार्निश का इस्तेमाल न करें जिनसे धुआं निकलता हो।
- बच्चों को सिखाएं कि बाहर जाने के बाद हाथ और चेहरा अच्छी तरह से धोएं।
- बच्चों को संतुलित आहार खिलाएं, जिसमें विटामिन सी और विटामिन ई जैसे एंटीऑक्सीडेंट भरपूर हों।
- अपने बच्चे के बाल रोग विशेषज्ञ से नियमित जांच करवाएं।
- जब तक प्रदूषण का स्तर नीचे नहीं आता, तब तक खुले में कम से कम निकलें और पानी पीते रहें।
स्मॉग से हो सकती हैं ये समस्याएं
- आंखों में जलन, श्वास संबंधी परेशानियां, फेफड़ों में संक्रमण, घबराहट, सिरदर्द, तनाव, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, त्वचा संबंधी बीमारियां
क्या है स्मॉग
सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया ने बताया कि स्मॉग, यह शब्द अंग्रेजी के दो शब्दों ‘स्मॉक’ और ‘फॉग’ से मिलकर बना है. आमतौर पर जब ठंडी हवा किसी भीड़भाड़ वाली जगह पर पहुंचती है तब स्मॉग बनता है। ठंडी हवा भारी होती है इसलिए वह रिहायशी इलाके की गर्म हवा के नीचे एक परत बना लेती है। तब ऐसा लगता है जैसे ठंडी हवा ने पूरे शहर को एक कंबल की तरह लपेट लिया है। स्मॉग में पानी की बूंदों के साथ धूल और हवा में मौजूद जहरीले तत्व जैसे नाइट्रोजन ऑक्साइड और ऑर्गेनिक कंपाउंड मिलकर नीचे की तरफ ओजोन की गहरी परत बना लेते हैं। सर्दियों के दौरान जब भारी यातायात, उच्च तापमान आदि के कारण वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ता है और हवा की गति कम होती हैं, यह धुआं और धुंध को एक जगह स्थिर होकर स्मॉग को बनाती है। इससे दृश्यता बाधित होती है और पर्यावरण को भी अस्त-व्यस्त कर देती है।
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बीमारियों से बचने के लिए आयुर्वेद का लें सहारा
वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. बृजभूषण ने बताया कि आयुर्वेद के सहारे स्मॉग और प्रदूषण से आसानी से लड़ा जा सकता है।
तुलसी का जूस पिएं। पहले से बने-बनाए 10-15 मिलीलीटर तुलसी के जूस को पानी मिलाकर दिन में दो बार लें। यह आपकी सांस की नली या श्वसन तंत्र से प्रदूषक तत्व हटाने में सहायक होता है।
प्रदूषण से त्रिदोष का बैलेंस बिगड़ जाता है और त्रिफला इसको ठीक करने में मदद करता है, साथ ही प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। रात के वक्त शहद के साथ त्रिफला लेना फायदेमंद होता है।
दूध या चाय में तुलसी, अदरक, लौंग, काली मिर्च उबालकर पीने से गले की खराश ठीक हो जाएगी और प्रदूषित कण भी शरीर से बाहर निकल जाएंगे।
दूध में खजूर, छोटी पीपल, काली मिर्च और सौंठ उबालकर पीने से शरीर की इम्युनिटी बढ़ेगी जिससे प्रदूषण जन्य रोगों से बचाव हो सकेगा।
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बड़ों से ज्यादा बच्चों को नुकसान
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नवरत्न ने बताया कि बच्चों पर प्रदूषण का असर वयस्कों से ज्यादा होता है, क्योंकि 8 साल की उम्र तक बच्चे के फेफड़े का विकास हो रहा होता है। फेफड़े के अलावा बच्चों के दिल पर भी प्रदूषण का असर पड़ता है, जिससे वे हाइपरटेंशन का शिकार हो सकते हैं। गर्भवती महिलाओं के प्रदूषण के संपर्क में आने से भी गर्भ में पल रहे बच्चे पर बुरा असर पड़ता है।
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बच्चों में ये लक्षण दिखें तो डॉक्टर के पास जाएं
लगातार खांसी
सांस लेने में दिक्कत
नाक, गले और आंख में दर्द
आंखों में जलन और उनका लाल होना
बार-बार छींक आना
लगातार नाक में पानी आना
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ अंजुम ने बताया कि बच्चों को स्मॉग से बचाने के लिए ये उपाय अपना सकते हैं
- घर के अंदर वायु प्रदूषण को कम करने के लिए, एयर प्यूरीफ़ायर का इस्तेमाल करें।
- घर में अगरबत्ती, धूपबत्ती, कोयला वगैरह न जलाएं।
- घर के अंदर या बच्चों के पास धूम्रपान न करें।
- घर में पेंट, सॉल्वैंट्स, या वार्निश का इस्तेमाल न करें जिनसे धुआं निकलता हो।
- बच्चों को सिखाएं कि बाहर जाने के बाद हाथ और चेहरा अच्छी तरह से धोएं।
- बच्चों को संतुलित आहार खिलाएं, जिसमें विटामिन सी और विटामिन ई जैसे एंटीऑक्सीडेंट भरपूर हों।
- अपने बच्चे के बाल रोग विशेषज्ञ से नियमित जांच करवाएं।
- जब तक प्रदूषण का स्तर नीचे नहीं आता, तब तक खुले में कम से कम निकलें और पानी पीते रहें।
स्मॉग से हो सकती हैं ये समस्याएं
- आंखों में जलन, श्वास संबंधी परेशानियां, फेफड़ों में संक्रमण, घबराहट, सिरदर्द, तनाव, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, त्वचा संबंधी बीमारियां
क्या है स्मॉग
सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया ने बताया कि स्मॉग, यह शब्द अंग्रेजी के दो शब्दों ‘स्मॉक’ और ‘फॉग’ से मिलकर बना है. आमतौर पर जब ठंडी हवा किसी भीड़भाड़ वाली जगह पर पहुंचती है तब स्मॉग बनता है। ठंडी हवा भारी होती है इसलिए वह रिहायशी इलाके की गर्म हवा के नीचे एक परत बना लेती है। तब ऐसा लगता है जैसे ठंडी हवा ने पूरे शहर को एक कंबल की तरह लपेट लिया है। स्मॉग में पानी की बूंदों के साथ धूल और हवा में मौजूद जहरीले तत्व जैसे नाइट्रोजन ऑक्साइड और ऑर्गेनिक कंपाउंड मिलकर नीचे की तरफ ओजोन की गहरी परत बना लेते हैं। सर्दियों के दौरान जब भारी यातायात, उच्च तापमान आदि के कारण वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ता है और हवा की गति कम होती हैं, यह धुआं और धुंध को एक जगह स्थिर होकर स्मॉग को बनाती है। इससे दृश्यता बाधित होती है और पर्यावरण को भी अस्त-व्यस्त कर देती है।
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बीमारियों से बचने के लिए आयुर्वेद का लें सहारा
वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. बृजभूषण ने बताया कि आयुर्वेद के सहारे स्मॉग और प्रदूषण से आसानी से लड़ा जा सकता है।
तुलसी का जूस पिएं। पहले से बने-बनाए 10-15 मिलीलीटर तुलसी के जूस को पानी मिलाकर दिन में दो बार लें। यह आपकी सांस की नली या श्वसन तंत्र से प्रदूषक तत्व हटाने में सहायक होता है।
प्रदूषण से त्रिदोष का बैलेंस बिगड़ जाता है और त्रिफला इसको ठीक करने में मदद करता है, साथ ही प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। रात के वक्त शहद के साथ त्रिफला लेना फायदेमंद होता है।
दूध या चाय में तुलसी, अदरक, लौंग, काली मिर्च उबालकर पीने से गले की खराश ठीक हो जाएगी और प्रदूषित कण भी शरीर से बाहर निकल जाएंगे।
दूध में खजूर, छोटी पीपल, काली मिर्च और सौंठ उबालकर पीने से शरीर की इम्युनिटी बढ़ेगी जिससे प्रदूषण जन्य रोगों से बचाव हो सकेगा।