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त्याग ही जीवन को बनाता है पवित्र : भाव भूषण
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कैलाश पर्वत मंदिर पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
- कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ का 31वां दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 31वें दिन विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया। स्वर्ण कलश से नरेशचंद जैन, संजय जैन ने अभिषेक किया। शांतिधारा प्रदीप जैन, अंकुर जैन, यश जैन ने की। दीप प्रज्ज्वलन दर्शनमाला जैन, शचि, सिद्धि जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया।
सभी धर्मप्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए गए और 95 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया।
विधान के मध्य गुरुवर भाव भूषण महाराज ने कहा कि जिन कारणों से विकृति आती है। उसे विसर्जित करने का नाम ही त्याग है। बाहर का त्याग बाहरी वस्तुओं को घटाएगा, परंतु भीतर का त्याग आध्यात्मिक शांति लाएगा। त्याग की विशेषता है कि जितना हम छोड़ते हैं उससे कई गुना हमारे पास आने लगता है। हम इस स्वीकार न भी करें फिर भी साधन उपलब्ध होते चले जाते हैं। मुनिराज उसका साक्षात प्रमाण हैं। जिन्होंने दीक्षा लेकर एक घर की रोटी छोड़ी तो सैकड़ों घर की रोटी उन्हें बुलाने लगी।
विधान का विसर्जन कुसुमलता जैन ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्वलन अमित जैन व महेंद्र जैन, आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन साधना जैन और चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्वलन नवीन कुमार व बबीता जैन ने किया।
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कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, मनोज जैन, धनपाल जैनी, उमेश जैन, दीपक जैन, अतुल जैन का विशेष सहयोग रहा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 31वें दिन विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया। स्वर्ण कलश से नरेशचंद जैन, संजय जैन ने अभिषेक किया। शांतिधारा प्रदीप जैन, अंकुर जैन, यश जैन ने की। दीप प्रज्ज्वलन दर्शनमाला जैन, शचि, सिद्धि जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया।
सभी धर्मप्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए गए और 95 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया।
विधान के मध्य गुरुवर भाव भूषण महाराज ने कहा कि जिन कारणों से विकृति आती है। उसे विसर्जित करने का नाम ही त्याग है। बाहर का त्याग बाहरी वस्तुओं को घटाएगा, परंतु भीतर का त्याग आध्यात्मिक शांति लाएगा। त्याग की विशेषता है कि जितना हम छोड़ते हैं उससे कई गुना हमारे पास आने लगता है। हम इस स्वीकार न भी करें फिर भी साधन उपलब्ध होते चले जाते हैं। मुनिराज उसका साक्षात प्रमाण हैं। जिन्होंने दीक्षा लेकर एक घर की रोटी छोड़ी तो सैकड़ों घर की रोटी उन्हें बुलाने लगी।
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विधान का विसर्जन कुसुमलता जैन ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्वलन अमित जैन व महेंद्र जैन, आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन साधना जैन और चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्वलन नवीन कुमार व बबीता जैन ने किया।
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कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, मनोज जैन, धनपाल जैनी, उमेश जैन, दीपक जैन, अतुल जैन का विशेष सहयोग रहा।