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रोज लगती थी यहां पुराने नोटों की बोली
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 30 Dec 2017 01:02 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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25 करोड़ की पुरानी करेंसी को बदलवाने के लिए बिल्डर के ऑफिस में रोजाना बोली लगती थी। कई राज्यों से बड़ी कंपनियों से लोग आते थे। लेकिन बात नहीं बन पाई। बिल्डर ने आठ कर्मचारी सिर्फ पुरानी करेंसी दिखाने के लिए ऑफिस में लगा रखे थे। इतना बड़ी डीलिंग करीब नौ माह से दिल्ली रोड पर चल रही थी। लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। प्रतिबंध के बाद इन नोटों को कौन बदल सकता था, ये सवाल सरकारी सिस्टम पर उठ रहे हैं। एसएसपी मंजिल सैनी ने मौके से गिरफ्तार चारों आरोपियों से पूछताछ की।
बिल्डर के ड्राइवर योगेंद्र ने बताया कि पुराने नोट बदलवाने के लिए बाहर से रोजाना यहां लोग आते थे। पुरानी करेंसी की देखरेख और लोगों को पैसा दिखाने के लिए बिल्डर ने आठ कर्मचारी यहां रखे हुए थे। नोटबंदी के बाद से इन नोटों को बदलवाने के लिए रोजाना यहां बोली लगती थी। कितने प्रतिशत पर पैसा बदलवाना है, इसकी सौदेबाजी कई बार हुई। लेकिन बात नहीं पाई। दिल्ली के नरेश अग्रवाल ने बताया कि वह शुक्रवार सुबह एक कंपनी के अधिकारी को दिल्ली से लेकर यहां आया था। वो अधिकारी तो छापा लगते ही गायब हो गया। वहीं, कर्मचारी अरुण और विनोद ने बताया कि बिल्डर ने उन्हें इन पैसों की देखरेख के लिए रखा हुआ था। पैसा देखने बहुत लोग आते थे। लेकिन संजीव से उनकी क्या बात होती थी, इसकी जानकारी उसे नहीं है।
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बिल्डर के ड्राइवर योगेंद्र ने बताया कि पुराने नोट बदलवाने के लिए बाहर से रोजाना यहां लोग आते थे। पुरानी करेंसी की देखरेख और लोगों को पैसा दिखाने के लिए बिल्डर ने आठ कर्मचारी यहां रखे हुए थे। नोटबंदी के बाद से इन नोटों को बदलवाने के लिए रोजाना यहां बोली लगती थी। कितने प्रतिशत पर पैसा बदलवाना है, इसकी सौदेबाजी कई बार हुई। लेकिन बात नहीं पाई। दिल्ली के नरेश अग्रवाल ने बताया कि वह शुक्रवार सुबह एक कंपनी के अधिकारी को दिल्ली से लेकर यहां आया था। वो अधिकारी तो छापा लगते ही गायब हो गया। वहीं, कर्मचारी अरुण और विनोद ने बताया कि बिल्डर ने उन्हें इन पैसों की देखरेख के लिए रखा हुआ था। पैसा देखने बहुत लोग आते थे। लेकिन संजीव से उनकी क्या बात होती थी, इसकी जानकारी उसे नहीं है।
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