मीट शॉप संचालकों को लगा तगड़ा झटका, योगी सरकार ने लिया अहम फैसला
मीट विक्रेताओं को एक और झटका लगा है। अब मीट की दुकानें सिर्फ नगर निगम, नगर पंचायत और स्थानीय थाने से एनओसी लेकर संचालित नहीं हो सकेंगी। बल्कि इनके साथ अब खाद्य एवं औषधि सुरक्षा विभाग से पंजीकरण कराना व लाइसेंस लेना जरूरी होगा। क्योंकि मीट खाद्य उत्पाद की श्रेणी में आता है।
खाद्य एवं औषधि सुरक्षा विभाग के अभिहित अधिकारी रणधीर सिंह का कहना है कि नगर निगम या नगर पंचायत मीट की दुकान पर होने वाली गंदगी के निस्तारण को लेकर एनओसी देते हैं। स्थानीय थाना शांति व्यवस्था के मद्देनजर एनओसी देता है। ऐसे में जो मीट कारोबारी सालाना 12 लाख तक का कारोबार करते हैं, वो पंजीकरण की श्रेणी में आयेंगे। उससे ऊपर का कारोबार करने वालों को लाइसेंस लेना होगा। अगर कोई मीट कारोबारी हमारे यहां से पंजीकरण नहीं कराता है या लाइसेंस नहीं लेता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मीट को लेकर एक्ट में स्पष्ट व्यवस्था
खाद्य एवं औषधि सुरक्षा विभाग में मीट की दुकानों का पंजीकरण व लाइसेंस जारी करने के बारे में विस्तार से लिखा गया है। मीट कारोबारी तीन श्रेणी में आते हैं, जिसके हिसाब से वे लाइसेंस ले सकते हैं या पंजीकरण करा सकते हैं।
क्षमता के हिसाब से श्रेणी
पंजीकरण : 2 बडे़ पशु, 10 बकरे, 50 मुर्गे काटने की व्यवस्था
लाइसेंस : 3 से 50 तक बड़े पशु, 11 से 150 तक बकरे, 51 से 1000 तक मुर्गे
सेंट्रल लाइसेंस : 51 से ऊपर बड़े पशु, 151 से अधिक बकरे और 1001 से अधिक मुर्गे
पंजीकरण या लाइसेंस जारी करने का अधिकार
पंजीकरण : संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारी
लाइसेंस : जिला स्तर पर मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी
सेंट्रल लाइसेंस : दिल्ली एफएसएसएआई