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कई जगह हंगामे के बीच 65.41% मतदान

Wed, 14 Oct 2015 01:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ Updated Wed, 14 Oct 2015 01:55 AM IST
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पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में तनावपूर्ण माहौल, पथराव और फायरिंग के बीच 65.41 प्रतिशत मतदान हुआ। माछरा ब्लॉक के ग्राम राधना में दो पक्षों में पथराव और फायरिंग हो गई। वहीं, भावनपुर के गांव राली चौहान में बैलेट बदलने के विवाद में पथराव हुआ। इन सबके बीच तीनों ब्लॉक में 65.41 प्रतिशत मतदान हुआ। सबसे ज्यादा रजपुरा ब्लॉक और सबसे कम माछरा ब्लॉक में मतदान हुआ। जबकि रजपुरा में सुबह से ही मतदान की गति तेज रही। वहीं, माछरा ब्लॉक में दोपहर बाद मतदान में तेजी आयी।

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पंचायत चुनाव का पहला चरण अपेक्षाकृत शांतिपूर्वक निपटा था। दूसरे चरण में माहौल तनावपूर्ण होने पर कयास लगाए जा रहे थे कि शांति की राह आसान नहीं होगी। दूसरे चरण में खरखौदा, माछरा और रजपुरा ब्लॉक में क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्यों के लिए मंगलवार को मतदान हुआ। जिसमें कुल 354422 मतदाताओं में से 231838 ने मतदान किया। सुबह से ही मतदान की गति किसी गांव में तेज तो किसी में धीमी नजर आ रही थी।
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मुस्लिम बाहुल्य गांवों में जहां हंगामों के बीच सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लाइन लगी थी, वहीं गुर्जर और जाट बाहुल्य गांवों में सुबह के समय महिलाएं लाइन में ज्यादा नजर आ रही थीं। दोपहर तक सभी गांवों में मतदान का उत्साह नजर आने लगा था तो हंगामे भी बढ़ने शुरू हो गए थे। इन सबके बीच शाम पांच बजे तक तीनों ब्लॉकों मतदान संपन्न हो गया। इनमें खरखौदा में 66.60 प्रतिशत, माछरा में 62.42 प्रतिशत और रजपुरा में 67.27 प्रतिशत मतदान हुआ।
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वार्ड 31 के दूसरे चरण की राह नहीं आसान
वार्ड 31 के मतदान को लेकर ‘अमर उजाला’ ने जो आशंका जतायी थी, वह सच साबित हुई। अब दूसरे चरण को लेकर भी हिंसा के बादल गहरा रहे हैं। क्योंकि राधना की ही तरह परीक्षितगढ़ ब्लॉक के भी तीन गांवों में दोनों प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच खूनी रंजिश है।

पुलिस प्रशासन ने अगर ध्यान दिया होता तो राधना की घटना होने से बचाया जा सकता था। क्योंकि अमर उजाला लगातार वार्ड 31 को लेकर चेता रहा था। इस वार्ड के पांच गांव अतिसंवेदनशील की श्रेणी में हैं। राधना की अगर बात करें तो ग्राम प्रधान से लोकसभा के चुनाव में कोई मतदान ऐसा नहीं गया, जिसमें यहां पर हिंसा न हुई हो। दो पक्षों की आपसी रंजिश ने यहां हमेशा बवाल कराया है। इस गांव की आपसी रजिंश का नेता फायदा उठाते रहे हैं और किसी एक पार्टी को संरक्षण देते रहे हैं।

मंगलवार को राधना के जब्बार जिनका पुत्र वसीम जब्बार बसपा प्रत्याशी है, कभी कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर के खास हुआ करते थे। बसपा सरकार आने पर राज्यसभा सदस्य बाबू मुनकाद अली के करीब आ गए। ऐसे में दूसरे पक्ष ने शाहिद मंजूर का दामन थाम लिया।

यह स्थिति सिर्फ राधना की नहीं गांव ललियाना, शौंदत्त और बौंद्रा की भी है। यहां भी आपसी रंजिश में दो पक्ष बने हैं। राधना की ही तरह ये तीनों गांव भी अतिसंवेदनशील है। यदि प्रशासन ने राधना की घटना से सबक नहीं लिया तो इन गांवों में भी हिंसा होना तय है। क्योंकि अब 17 अक्तूबर को होने वाला मतदान वार्ड 31 की पूरी तरह दशा और दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। मंगलवार को जो भी कमियां हुई हैं, उन्हें दोनाें पक्ष भरने की कोशिश करेंगे, जिससे मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया है।

फर्ती मतदान पर हंगामा, छह किशोर पकड़े 
भावनपुर थाना क्षेत्र के गांव नंगलासाहू और जई गांव में किशोरों के सहारे फर्जी वोट डालने का प्रयास किया गया। इस पर सपा और बसपा प्रत्याशियों के समर्थकों ने हंगामा कर दिया। पुलिस ने मौके से छह किशोरों को हिरासत में ले लिया। गांव नंगलाशाहू निवासी दो किशोरों को एक पार्टी के समर्थकों ने फर्जी वोट डालने के लिए उकसाते हुए स्कूल में भेज दिया। इसी बीच दूसरी पार्टी के कुछ समर्थकों की नजर पड़ी तो वहां पर हंगामा शुरू हो गया।

इन नाबालिगों को पकड़कर पूछताछ की गई तो उन्होंने सच बता दिया। इसके थोड़ी देर बाद ही चार किशोर दूसरी पार्टी के प्रत्याशी के समर्थन में मतदान करने पहुंचे तो इन्हें भी पकड़ लिया गया। 

गालीगलौज से बिगड़ा माहौल
मेरठ। भावनपुर थाना के हसनपुर कदीम स्थित प्राइमरी पाठशाला मे मतदान केंद्र पर दो युवकों में मामूली विवाद के चलते गालीगलौज शुरू हो गई। इस पर दोनो पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए। पुलिस ने लाठी भांजते हुए भीड़ को खदेड़ते हुए मामला शांत कराया।

अब याद आई आचार संहिता

मेरठ। भावनपुर पुलिस को गांव राली चौहान में उस समय आचार संहिता की याद आई, जब प्रशासनिक अधिकारी गांव में पहुंचे। आनन-फानन में थाना पुलिस ने बिजली के खंभों पर लगे प्रत्याशियों के बोर्ड उतारने शुरू कर दिए।

यह बोले नेता और अधिकारी 
जिला पंचायत चुनाव में राधना में बवाल के बाद जिलाधिकारी, एसएसपी और एसपी देहात ने फायरिंग की घटना से इंकार कर दिया है। वहीं, एसडीएम मवाना रितु पूनिया ने भी घटना के समय मौजूद न होने के कारण फायरिंग से अनभिज्ञता जतायी है। वहीं, जिला पंचायत वार्ड 30 से सपा प्रत्याशी हाजी नवाजिश मंजूर का कहना है कि बसपा समर्थित प्रत्याशी के समर्थकों ने उनके घरों और लोगों पर पथराव किया है। उन्होंने फर्जी मतदान के आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि हार के भय से बसपा प्रत्याशी झूठे आरोप लगा रहे हैं।

वहीं राधना की घटना के बाद वसीम जब्बार की तरफ से राज्यसभा सदस्य बाबू मुनकाद अली ने बयान देते हुए कहा कि शाहिद मंजूर सत्ता से अलग हटकर क्षेत्र में पहुंचे तो हकीकत सामने आ जाएगी। मुनकाद अली ने आरोप लगाया कि शाहिद मंजूर राधना में कब्जा करने पहुंचे थे और अपने गनर से गोली चलवाई।


मतदाताओं की चुप्पी और हंगामें फंस गए दावेदार
दूसरे चरण में जिला पंचायत के दस वार्डों में चुनाव था। लेकिन मुख्य रुप से सबकी नजर वार्ड 31 और 22 के साथ ही 30 और 28 पर लगी थी। मतदान से पहले सबको खुश रखने वाला मतदाता वार्ड 31 को छोड़ दें तो बाकी जगह चुप नजर आया। उसकी खामोशी भरी चाल से दावेदार सिर्फ कयास लगाते ही नजर आये। ऐसे में सपा एमएलसी डा. सरोजनी के भतीजे अजय अग्रवाल जहां वार्ड 22 में चतुष्कोणीय मुकाबले में फंसे नजर आये तो बाकी वार्ड में भी मुकाबला त्रिकोणीय और चतुष्कोणीय नजर आया।

वार्ड 31 के मुकाबले पर पूरे जिले की नजर लगी है। हालांकि मंगलवार को इस वार्ड का आधा मतदान ही संपन्न हुआ, शेष मतदान तीसरे चरण में 17 अक्तूबर को होगा। लेकिन दूसरे चरण में जिन माछरा ब्लाक के जिन पांच गांवों में सुबह से ही मतदान केंद्रों पर हंगामें और आरोप शुरू हो चुके थे। असली मुकाबला 17 अक्तूबर के मतदान में होगा और यही मतदान दोनों के भविष्य की दिशा तय करेगा।

इसके बाद वार्ड 22 सबकी नजर में था। यहां से सपा नेत्री एमएलसी डा. सरोजनी अग्रवाल के भतीजे अजय अग्रवाल मैदान में थे। लेकिन मतों के ध्रुवीकरण की खबर से अन्य मतों हुए बिखराव के बीच मुकाबला पूरी तरह फंस गया। ऐसे में अजय अग्रवाल यहां भाजपा प्रत्याशी अमित त्यागी, फतेहयाब और गोपाल के बीच फंसे नजर आये। इस वार्ड में मुकाबला चतुष्कोणीय नजर आया।

दूसरे चरण के चुनाव में दो वर्तमान जिला पंचायत सदस्यों पर भी लोगों की नजरें टिकी थी। वार्ड 28 से वर्तमान जिला पंचायत सदस्य और पूर्व विधायक स्व. समरपाल सिंह साले विश्वराज विशु मैदान में थे। जाट मतों के साथ ही भाजपा के परंपरागत वोटों की उम्मीद में विश्वराज को प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन विश्वराज अपने जाट वोट बैंक में ही फंस गये। उन्हें नबीपुर अमानत नगर के जितेंद्र कुमार जाट बहुल गांवों टक्कर देते नजर आये। जबकि इस वार्ड के मुस्लिम वोट तीन जगह बंटने से मुकाबला फंसा हुआ नजर आया।


 वार्ड 30 से वर्तमान जिला पंचायत सदस्य डा. मनोज अधाना को इस बार बसपा ने समर्थन दिया था। लगातार दो बार से जिला पंचायत सदस्य होते रहे मनोज अधाना को यहां सपा के रामवीर सिंह ने जहां जमकर टक्कर दी, वहीं मुस्लिम मतों के बंटवारे का लाभ उठाने के बावजूद भी वह मुकाबले में फंसे हुए नजर आये।

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