पुलवामा हमले में शामली के रेल पार निवासी सीआरपीएफ के जवान अमित कुमार अपने वतन के लिए शहीद हो गए। शनिवार को उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। जवान की अंतिम यात्रा में जहां सैंकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए वहीं हर कोई अमित के साथ गुजारे पल यादकर भावुक हो उठा। अमित ने ड्यूटी पर जाते हुए अपनी मां से बहुत सारी छुट्टियां लेकर जल्दी लौटकर आने को कहा था। वह लौटा तो जरूर लेकिन तिरंगे में लिपटकर। शहर के बेटे की शहादत पर हर किसी को गर्व है लेकिन परिजनों को बेटे से कभी न मिल पाने का दुख इतना है कि आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे।
{"_id":"5c67d30ebdec22737c291ac2","slug":"pulwama-attack-martyr-amit-emotional-story-said-that-i-will-come-again-with-lots-of-leave","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"शादी है आऊंगा महीने भर की छुट्टी लेकर..., वो लौटा मगर तिरंगे में लिपटकर, शहीद अमित की भावुक कहानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शादी है आऊंगा महीने भर की छुट्टी लेकर..., वो लौटा मगर तिरंगे में लिपटकर, शहीद अमित की भावुक कहानी
Sat, 16 Feb 2019 03:06 PM IST
Dimple Sirohi
रोहित अग्रवाल, अमर उजाला, शामली
रोहित अग्रवाल, अमर उजाला, शामली
Published by: Dimple Sirohi
Updated Sat, 16 Feb 2019 03:06 PM IST
विज्ञापन
shamli jawan
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
shamli jawan
परिजनों के अनुसार अमित को बचपन से ही फौज में जाने की इच्छा रखता था। जहां भी फौजी को देखा उससे हाथ मिलाना और बात करना उसे अच्छा लगता था।
shamli jawan
शहर के कालेज से बीएससी कर रहा था कि उसने सीआपीएफ में भर्ती का आवेदन किया। 2017 में उसकी भर्ती सीआरपीएफ में हो गई। दिसंबर 2017 में रामपुर में उसकी ट्रेनिंग हुई। इसी दौरान उसके बड़े भाई अर्जुन का रिश्ता तय हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
shamli jawan
फरवरी 2018 में शादी थी, लेकिन अमित को ट्रेनिंग के कारण छुट्टी नहीं मिली। पिता ने छुट्टी के लिए सीआरपीएफ के अफसरों से बात करनी चाहिए लेकिन खुद अमित ने ही मना कर दिया।
विज्ञापन
shamli jawan
पिता के अनुसार अमित ने कहा कि पिताजी ये ट्रेनिंग ही उसके जीवन भर काम आएगी। दो भाई ओर हैं उनकी शादी में आ जाऊंगा। अमित की अपने काम के प्रति निष्ठा देख पिता ने भी छुट्टी के प्रयास नहीं किए। अमित के बिना ही अर्जुन की शादी हुई।