{"_id":"5ffc6dc18ebc3e2ecf239a8d","slug":"no-bird-flu-in-bijnor-of-up-pet-pigeons-dying-of-this-contagious-disease","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूपी के बिजनौर में बर्ड फ्लू नहीं, इस संक्रामक बीमारी से मर रहे पालतू कबूतर, अपने आप मुड़ने लगती है गर्दन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी के बिजनौर में बर्ड फ्लू नहीं, इस संक्रामक बीमारी से मर रहे पालतू कबूतर, अपने आप मुड़ने लगती है गर्दन
Mon, 11 Jan 2021 08:54 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
Published by: Dimple Sirohi
Updated Mon, 11 Jan 2021 08:54 PM IST
सार
- संक्रामक बीमारी होने के कारण अन्य कबूतरों में फैलते हैं तेजी से
- आमतौर पर जंगली कबूतर नहीं आते हैं इस बीमारी की चपेट में
- कबूतर पालकों को किया जा रहा जागरूक
विज्ञापन
कबूतर - प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Wikipedia
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बिजनौर जिले में बर्ड फ्लू सेे अब तक किसी पक्षी की जान नहीं गई है, लेकिन ठंड और कबूतरों में फैली मेरेक्स बीमारी कबूतरों की जान ले रही है। यह एक संक्रामक बीमारी है, जिसे आम भाषा में गर्दन मोड़ भी कहा जाता है। इससे कई जगह पर अब तक कबूतरों की मौत हो चुकी है।
विज्ञापन
बर्ड फ्लू को लेकर देशभर में अलर्ट जारी है। जिले में कुछ जगह पर कौवे मरे मिले हैं लेकिन यह सामान्य मौत हैं। कबूतरों के मरने के मामले भी सामने आ रहे हैं। कबूतरों की मौत मेरेक्स बीमारी से हो रही है। यह एक संक्रामक बीमारी होती है। अगर एक कबूतर इससे संक्रमित हो जाए तो बाकी कबूतर भी इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।
विज्ञापन
हालांकि यह बीमारी केवल पालतू कबूतरों में ही होती है। आमतौर पर जंगली कबूतर इसकी चपेट में नहीं आते हैं। इस बीमारी का प्रकोप सर्दी में ज्यादा देखने को मिलता है। इस बीमारी में कबूतर की गर्दन मुड़ने लग जाती है। कबूतर पालकों को इस बीमारी के बारे में सचेत किया जा रहा है।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें : कड़ी नजर रखें किसान, आंदोलन में सरकार करवा सकती है हिंसा: अजित सिंह
कबूतरों के तंत्रिका तंत्र पर अटैक
मेरेक्स बीमारी कबूतरों के तंत्रिका तंत्र पर असर डालती है। इसमें कबूतरों को लकवा भी मार जाता है और गर्दन अपने आप मुड़ने लगती है। पालतू कबूतरों के छोटे बाड़े में बंद होने की वजह से यह बीमारी एक कबूतर से दूसरे में बहुत तेजी से फैलती है। जंगली कबूतर के घोंसले में दो-तीन कबूतर ही रहने के कारण उनमें यह बीमारी ज्यादा नहीं आती है।
बाहर के कबूतरों को न आने दें
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी भूपेंद्र सिंह के अनुसार मेरेक्स बीमारी का टीकाकरण कबूतरों के बचपन में ही होता है। अगर किसी के कबूतरों में यह बीमारी है तो उसे बाड़े से अलग कर दें। कबूतरों को ठंड से बचाएं और बीमार कबूतरों को चिकित्सक को दिखाएं। अपने कबूतरों में बाहर के कबूतरों को न बैठने दें।