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निगम अधिकारी विकास कार्यों में नहीं ले रहे रुचि
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 25 May 2017 02:40 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
अवस्थापना निधि से शहर में विकास कार्य कराने, नगर निगम में मार्ग प्रकाश विभाग में श्रमिकों की आपूर्ति के टेंडर निरस्त कराने आदि मांगों को लेकर बुधवार को नगर निगम के पार्षद कमिश्नर से मिले। पार्षदों ने कमिश्नर को ज्ञापन भी सौंपा।
सभी पार्षद मेरठ दक्षिण विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर के साथ कमिश्नर कार्यालय पहुंचे। पार्षद हरीश कुमार, संजीव पुंडीर, रविंद्र तेवतिया, मनोज वर्मा ने कहा कि अवस्थापना निधि और टीएफसी से प्राप्त लगभग 80 करोड़ रुपया खजाने में जमा है। इससे शहर का तेजी से विकास हो सकता है, लेकिन नगर निगम के अधिकारी कार्यों में रुचि नहीं ले रहे। गड्ढा मुक्त सड़कों के नाम पर अधिकारियों ने बोर्ड फंड से चार करोड़ के टेंडर निकाले हैं, जबकि अवस्थापना निधि से सड़कें बनाई जा सकती थीं। पार्षदों ने कहा कि जब शहर की स्ट्रीट सोडियम लाइटों के स्थान पर एलईडी लाइटें लगाने का ठेका ईईएसएल कंपनी को दिया गया है उसी कंपनी को सभी लाइटों का रख रखाव करना है। ऐसी स्थिति में नगर निगम मार्ग प्रकाश विभाग में श्रमिकों की आपूर्ति करने का टेंडर निकाले हुए है। जिससे सीधे नगर निगम के खजाने का दुरुपयोग होगा। टेंडर शीघ्र रुकवाए जाने चाहिए। महानगर की सफाई पटरी से उतरी हुई है। इसके लिए नगर निगम के अधिकारी जिम्मेदार हैं। पिछली बोर्ड बैठक में शहर की सफाई सुधार के लिए आउट सोर्सिंग के 30-30 सफाई कर्मचारियों को प्रत्येक वार्ड में भेजने का निर्णय लिया गया था। जिस पर पर निगम प्रशासन ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। किसी वार्ड में 20 सफाई कर्मचारी हैं तो किसी में 70 लगे हैं। ठेकेदार और निगम अधिकारी मिलकर काली कमाई कर रहे हैं। ठेकेदार सफाई कर्मचारियों का उत्पीड़न कर रहे हैं। प्रत्येक सफाई कर्मचारी से 300 रुपये जीपीएफ के नाम पर काटे जा रहे हैं। सफाई कर्मचारियों को न्याय दिलाया जाए। कमिश्नर ने इस संबंध में नगरायुक्त देवेंद्र कुमार कुशवाहा को अपने कार्यालय में तलब किया। साथ ही पार्षदों द्वारा की गई शिकायतों पर विस्तार से चर्चा की। गौरव, राजू वर्मा, पंकज कतीरा आदि मुख्य रहे।
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सभी पार्षद मेरठ दक्षिण विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर के साथ कमिश्नर कार्यालय पहुंचे। पार्षद हरीश कुमार, संजीव पुंडीर, रविंद्र तेवतिया, मनोज वर्मा ने कहा कि अवस्थापना निधि और टीएफसी से प्राप्त लगभग 80 करोड़ रुपया खजाने में जमा है। इससे शहर का तेजी से विकास हो सकता है, लेकिन नगर निगम के अधिकारी कार्यों में रुचि नहीं ले रहे। गड्ढा मुक्त सड़कों के नाम पर अधिकारियों ने बोर्ड फंड से चार करोड़ के टेंडर निकाले हैं, जबकि अवस्थापना निधि से सड़कें बनाई जा सकती थीं। पार्षदों ने कहा कि जब शहर की स्ट्रीट सोडियम लाइटों के स्थान पर एलईडी लाइटें लगाने का ठेका ईईएसएल कंपनी को दिया गया है उसी कंपनी को सभी लाइटों का रख रखाव करना है। ऐसी स्थिति में नगर निगम मार्ग प्रकाश विभाग में श्रमिकों की आपूर्ति करने का टेंडर निकाले हुए है। जिससे सीधे नगर निगम के खजाने का दुरुपयोग होगा। टेंडर शीघ्र रुकवाए जाने चाहिए। महानगर की सफाई पटरी से उतरी हुई है। इसके लिए नगर निगम के अधिकारी जिम्मेदार हैं। पिछली बोर्ड बैठक में शहर की सफाई सुधार के लिए आउट सोर्सिंग के 30-30 सफाई कर्मचारियों को प्रत्येक वार्ड में भेजने का निर्णय लिया गया था। जिस पर पर निगम प्रशासन ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। किसी वार्ड में 20 सफाई कर्मचारी हैं तो किसी में 70 लगे हैं। ठेकेदार और निगम अधिकारी मिलकर काली कमाई कर रहे हैं। ठेकेदार सफाई कर्मचारियों का उत्पीड़न कर रहे हैं। प्रत्येक सफाई कर्मचारी से 300 रुपये जीपीएफ के नाम पर काटे जा रहे हैं। सफाई कर्मचारियों को न्याय दिलाया जाए। कमिश्नर ने इस संबंध में नगरायुक्त देवेंद्र कुमार कुशवाहा को अपने कार्यालय में तलब किया। साथ ही पार्षदों द्वारा की गई शिकायतों पर विस्तार से चर्चा की। गौरव, राजू वर्मा, पंकज कतीरा आदि मुख्य रहे।
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