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Meerut News: निगम में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाना होगा राजनीतिक दलों के लिए चुनौती

Tue, 11 Apr 2023 01:07 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 11 Apr 2023 01:07 AM IST
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nigam me purn bhaumat
- पिछले चुनाव में बसपा और भाजपा के सबसे अधिक जीते थे पार्षद
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- चार पार्षदों पर ही सिमट गई थी सपा
राजकुमार सैनी
मेरठ। नगर निगम में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में सभी दलों के लिए चुनौती होगा। भाजपा, बसपा, सपा, कांग्रेस और आप में मजबूत प्रत्याशियों की तलाश की जा रही है। 2017 में हुए नगर निगम के पार्षद चुनाव में सबसे कमजोर कांग्रेस केवल दो, दूसरे स्थान पर सपा के पार्षद चार, तीसरे स्थान पर बसपा के पार्षदों की संख्या 16 थी। भाजपा के सबसे अधिक पार्षद सदन में पहुंचे थे।
नगर निगम में 90 वार्ड हैं। 2017 में वार्डों का परिसीमन हुआ था। सभी दलों ने महापौर सीट से लेकर सभी वार्ड पार्षद पदों पर अपने अपने प्रत्याशी उतारे थे। बसपा ने महापौर पद के लिए सुनीता वर्मा को चुनावी मैदान में उतारा था, वहीं भाजपा ने कांता कर्दम पर दाव लगाया था। उधर, सपा ने दीपू मनोठिया, कांग्रेस ने ममता सूद और आम आदमी पार्टी ने नीलम राठौर को महापौर प्रत्याशी बनाया था। जीती सुनीता वर्मा थीं। हालांकि वह बाद में उन्होंने सपा का दामन थाम लिया था। भाजपा मेरठ ही नहीं बल्कि पूरे उप्र की सभी 17 नगर निगमों में अपनी सरकार बनाने की योजना बना रही है। इनका बूथ से लेकर वार्ड स्तर तक मजबूत संगठन है, जिसके आधार पर भाजपाई इस बार महानगर की जनता को भाजपा का महापौर देने की बात कर रहे हैं। उधर, बसपा अपनी पुरानी विरासत को खोना नहीं चाहती है। बसपा ने भले ही अभी तक महापौर सीट के दावेदारों के नामों की सूची सार्वजनिक नहीं की हो, लेकिन मजबूत प्रत्याशी उतारने की बात कही जा रही है।
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इसके अलावा सपा और रालोद गठबंधन भी मजबूत और जनता में पहचान रखने वाला प्रत्याशी उतारने के दावे कर रही है। सपा से सरधना विधायक अतुल प्रधान की पत्नी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान और शहर विधायक रफीक अंसारी की पत्नी महापौर टिकट मांग रही हैं। इनमें से ही किसी एक के नाम पर पार्टी मुहर लगा सकती है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की तरफ से भी मजबूत प्रत्याशियों पर दाव लगाने की तैयारी है। भाजपा में तो पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों में जाट, गुर्जर, सैनी, प्रजापति, कश्यप, कलाल, पंजाबी, पाल आदि जातियों से लगभग 52 लोग महापौर का टिकट मांग रहे हैं। इतनी लंबी सूची में से मजबूत प्रत्याशी का चयन करने में भी भाजपा को पसीने छूट रहे हैं। कारण है कि अति पिछड़ी जातियाें का वोट बैंक। भाजपा का परंपरागत वोट बैंक है, इनको संजोकर रखना और एक को महापौर प्रत्याशी बना मुश्किल हो रहा है।
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