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नई पेंशन व्यवस्था के खिलाफ हड़ताल शुरू  

Thu, 30 Aug 2018 03:03 AM IST
amarujala
amarujala Updated Thu, 30 Aug 2018 03:03 AM IST
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nayi pansion vayvastha ke khilaf hadtal suru
meerut - फोटो : meerut

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 सरकार द्वारा पुरानी पेंशन बंद कर नई व्यवस्था लागू करने के विरोध में सरकारी कर्मचारी और शिक्षकों ने कार्य बहिष्कार कर तीन दिवसीय हड़ताल बुधवार से शुरू की। जिला और तहसील मुख्यालयों पर धरने प्रदर्शन कर अधिकारियों को ज्ञापन दिया गया। 
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद् के तत्वावधान में विभिन्न सरकारी विभागों से जुडे़ कर्मचारी, शिक्षक चौ. चरण सिंह पार्क पर एकत्रित हुए और धरना प्रदर्शन किया। सरकार ने जो नई पेंशन व्यवस्था लागू की है उससे कर्मचारी का आर्थिक भविष्य सुरक्षित नहीं है। पुरानी पेंशन बहाली को लेकर सत्ता में आने से पूर्व योगी आदित्यनाथ , तत्कालीन सांसद राजनाथ सिंह, कल्याण सिंह जगदंबिका पाल आदि कई जनप्रतिनिधियों ने भी इसकी संस्तुति की थी। अब इनकी सरकार है इसलिए कर्मचारी उनसे अपना वादा पूरा करने की मांग कर रहे हैं।  यूनियन मंत्री बनी सिंह चौहान, सुभाष दत्त शर्मा, झम्मन सिंह, प्रेमपाल सिंह राणा, एके कौशिक, पूनम गर्ग, संजीव शर्मा, सुनील भड़ाना, सविता शर्मा, पंकज शर्मा, प्रदीप गुप्ता, मनोज शर्मा, पुष्पा विष्ट, विनय कुमार, कमल सिंह, मनोज शर्मा आदि मौजूद थे।
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ये विभाग रहे शामिल 
शिक्षा विभाग, राजस्व, वाणिज्य कर, एआरटीओ, सिंचाई, परिवहन, आईटीआई, मातृ शिशु कल्याण, लोक निर्माण, डीआरडीए, कृषि, राजकीय वाहन चालक संघ, जिला पंचायत राज विभाग, माध्यमिक शिक्षक, पेंशनर्स एसोसिएशन, अतिरिक्त नार्दन रेलवे मेंस यूनियन, आयकर विभाग। 
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ये है नई और पुरानी पेंशन व्यवस्था
कर्मचारी, शिक्षक अधिकारी पुरानी पेंशन बहाली मंच के मंत्री बनी सिंह चौहान के अनुसार 2005 से पूर्व कर्मचारी से वेतन से पेंशन संबंधी कोई पैसा नहीं काटता था। उसके रिटायरमेंट के वक्त उसकी बेसिक सैलरी के आधार पर उसकी पेंशन का निर्धारण किया जाता था, लेकिन अब सरकार द्वारा की गई नई व्यवस्था में कर्मचारी का बेसिक और डीए के योग की 10 प्रतिशत धनराशि उसके वेतन से कटेगी। उतनी ही धनराशि सरकार देगी। 

इसलिए विरोध कर रहे कर्मचारी
कर्मचारी नेताओं के अनुसार नई पेंशन व्यवस्था में कर्मचारी की पेंशन के लिए कटने वाली रकम को सरकार अपने माध्यमों से शेयर मार्केट में लगाएगी और जब वो रिटायर होगा उसे शेयर मार्केट की स्थिति के आधार पर फंड की रकम तय होगी। कर्मियों का तर्क है कि शेयर मार्केट का कोई भरोसा नहीं है। यदि कर्मचारी के रिटायरमेंट के वक्त शेयर मार्के ट डूब गया तो उसके फंड का क्या होगा? इस व्यवस्था में कर्मचारी के भविष्य की आर्थिक सुरक्षा खतरे में है। 
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