फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   nagar nigam news meerut

हैंडपंप खरीद में नियमों को पिलाया पानी

Thu, 19 May 2016 02:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ Updated Thu, 19 May 2016 02:28 AM IST
विज्ञापन
nagar nigam news meerut
नगर ‌निगम लोगो - फोटो : अमर उजाला
नगर निगम के जलकल विभाग में हैंडपंप और सबमर्सिबल की मरम्मत में बड़ा खेल सामने आया है। निगम प्रशासन ने पिछले वित्तीय वर्ष के अंतिम माह में 53.75 लाख रुपये के गोलमाल की नींव रख दी है। कंपनी से कोटेशन पर रेट लेकर 500 हैंडपंपों का सामान खरीद लिया।
विज्ञापन


नगर निगम प्रशासन मार्च माह में ही हैंडपंप सप्लाई करने वाली कंपनी को पूर्ण भुगतान भी कर चुका है, लेकिन दो माह बाद भी निगम में सामान की सप्लाई नहीं हुई है। निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली के चलते जलकल विभाग सवालों के घेरे में है। जलकल विभाग में एक बड़े घोटाले की बू आ रही है। 
विज्ञापन


ये है नियम 
सामान
की खरीद होने और सामान स्टोर में प्राप्त होने के बाद ही किसी सामान का भुगतान हो सकता है। एकाउंट विभाग को पेमेंट करते समय अपने अभिलेखों में अंकित करना होता है कि सामान की डिलीवरी हो चुकी है। इसलिए कंपनी या ठेकेदार को पेमेंट किया जा रहा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


अपनी मर्जी से बदला प्रस्ताव 
13वें
वित्त आयोग की बैठक में पास प्रस्ताव पर गौर करें तो महानगर में 125 हैंडपंप लगने थे। वित्तीय वर्ष 2015-16 के अंतिम माह मार्च तक निगम जलकल विभाग से हैंडपंप लगवाने की व्यवस्था नहीं करा पाया। अधिकारियों ने बीच का रास्ता निकालकर टीएफसी के प्रस्ताव को ही बदल दिया। यानी 125 हैंडपंप लगवाने की बजाय, प्रस्ताव में पास धनराशि से 500 हैंडपंपों का सामान खरीदने की फाइल तैयार कर ली। कुटेशन पर हैंडपंप सामान के रेट लेकर गाजियाबाद की एक कंपनी से सामान खरीद का समझौता कर लिया। 

गंभीरता की खुली पोल 
एक
तरफ जहां शहर की जनता पानी को लेकर परेशान है। खासकर बाहरी इलाके जहां पर नगर निगम की पानी की टंकी नहीं हैं। वहां की जनता हैंडपंपों के पानी पर ही आधारित है। उन इलाकों की जनता को पीने का पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने में जलकल विभाग पूरी तरह फेल साबित हो रहा है। सरकारी खजाने का दुरुपयोग हो रहा है। एक कंपनी दो माह से सरकारी धन का उपयोग कर रही है। वहीं जनता भीषण गर्मी में पानी को तरस रही है। लगता है कि निगम प्रशासन गर्मी के बजाय बरसात में हैंडपंपों का पानी देना अच्छा मानकर चल रहा है। 

कमिश्नर के आदेश हवा
निगम
प्रशासन के लिए कमिश्नर के आदेश भी कोई मायने नहीं रखते हैं। 13वें वित्त आयोग की बैठक की अध्यक्षता कमिश्नर करते हैं। टीएफसी के धन से होने वाले प्रत्येक कार्य के प्रस्ताव बैठक में कमिश्नर के सामने रखे जाते हैं। एक-एक प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा होती है। उसके बाद कमिश्नर प्रत्येक पास प्रस्ताव की धनराशि और समय सीमा निर्धारित करते हैं। टीएफसी से होने वाले कार्यों की निगरानी कमिश्नर करते हैं। 

फरवरी तक नहीं कराए टेंडर 
जलकल
विभाग टीएफसी की बैठक में प्रस्ताव होने के कई माह बाद यानी फरवरी 2016 तक हैंडपंप लगाए जाने के टेंडर नहीं करा पाया। यही कारण रहा कि बाद में अधिकारियों ने टीएफसी की धनराशि को समायोजित करने का रास्ता निकाला। 

अब ऐसे निकलेगा टेंडर 
नियमानुसार
हैंडपंप सामान से लेकर लगाने तक का ठेका छोड़ा जाना चाहिए था। जिसमें निगम प्रशासन सफल नहीं हो पाया था। अब निगम द्वारा खरीदे गए हैंडपंप के सामान को जलकल विभाग मजदूरी पर लगवाने का काम करेगा। हैँडपंप कब लगेंगे, यह कोई नहीं जानता है। 

वर्जन
मेरे
समय से पहले का मामला है। जांच के बाद ही पूरे मामले का खुलासा हो सकेगा। इसमें यह बात सामने आई कि पेमेंट हो चुका है और सामान नहीं आया है तो गलत है। दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। - डीके कुशवाहा, नगरायुक्त

---  
अगर ऐसा है तो बड़ी लापरवाही है। नगरायुक्त को पत्र लिखकर इसकी जांच कराएंगे। जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ शासन को भी लिखेंगे।- हरिकांत अहलूवालिया, महापौर
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed